फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Negligence

मरने से पहले कोरोना संक्रमित ने वीडियो शूट कर लगाया मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं का आरोप

Tue, 28 Jul 2020 08:51 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 08:51 PM IST
विज्ञापन
Negligence
Negligence - फोटो : DEHAT
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में कोरोना से दम तोड़ने के बाद मरीज का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में मरीज चौतरफा अव्यवस्थाएं, लापरवाही और देखभाल न होने का आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए मरीज का हर संभव उपचार करने की बात कही है।
विज्ञापन

मऊरानीपुर निवासी और वहीं के एक डिग्री कॉलेज के प्राध्यापक को 19 जुलाई को मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती किया गया था। उसी दिन उनका सैंपल लेकर जांच के लिए कोविड लैब भेज दिया गया। तीन दिन बीतने के बाद 23 जुलाई को उनकी जांच रिपोर्ट आई तो वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। 27 जुलाई को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के बाद ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह कराहते हुए मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाएं होने का आरोप लगा रहे हैं। वीडियो में वह कह रहे हैं कि यहां चारों तरफ अव्यवस्थाएं हैं। लापरवाही हो रही है। कोई केयर नहीं हो रही। इसलिए उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कर दिया जाए। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रहा है। लोग तमाम तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। मृतक की पत्नी और बेटी भी कोरोना पॉजिटिव हैं और एसिमटोमेटिक होने के कारण एल-1 इकाई में भर्ती हैं।
विज्ञापन

बचाने की पूरी कोशिश की, वीडियो से डॉक्टर आहत: प्राचार्य
इस प्रकरण में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. साधना कौशिक की तरफ से प्रेस नोट जारी कर कहा गया कि उक्त मरीज जब मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए तो उन्हें सांस लेने में तकलीफ और बुखार था। ऑक्सीजन लेवल 82 प्रतिशत होने पर तुरंत ऑक्सीजन लगा दी गई। भर्ती होने के दो घंटे में ही सैंपल ले लिया गया। पॉजिटिव रिपोर्ट की जानकारी होने पर मरीज विचलित हो गए और कहने लगे कि अब नहीं बचेंगे। वह घर वालों को साथ रखने की जिद करने लगे। उनके तीमारदार को लगातार मरीज की सेहत के बारे में जानकारी दी जा रही थी। वह मधुमेह से पीड़ित थे और एक्सरे में एआरडीएस के बदलाव बढ़ रहे थे। इसके मद्देनजर 26 जुलाई को उन्हें टॉक्लीजूमेब इंजेक्शन लगाया गया। रेमडेसिविर भी लगाना शुरू किया गया। अनियंत्रित मधुमेह और गिर रहे ऑक्सीजन सेचुरेशन के कारण उन्हें वेंटीलेटर पर डालना पड़ा। सीपैपे वेंटिलेटर लगाया गया। तब भी ऑक्सीजन की कमी पूरी नहीं हुई तो इनवेसिव वेंटीलेटर लगाया गया। उनकी मौत के बाद भी तीमारदारों ने इलाज को लेकर कोई शिकायत नहीं की। मगर इस तरह के निगेटिव दृष्टिकोण के वीडियो वायरल होने से डॉक्टर और कर्मचारी आहत हैं, क्योंकि वह खुद और अपने परिवार की परवाह किए बिना नियमित रूप से दिन-रात कोविड मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed