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ठेकेदार की मर्जी से चलता है नगर निगम!
jhansi
Updated Fri, 30 Nov 2018 01:01 AM IST
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nagar nigam jhansi
- फोटो : demo
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मोहल्ला नरसिंहराव टौरिया में गुलाम गौस खां पार्क स्वीकृत है। पार्क का विकास कराने के लिए 16 लाख रुपये का टेंडर जुलाई में हो गया था, लेकिन अब तक ठेकेदार ने एग्रीमेंट नहीं किया है। इस कारण पार्क का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने के बाद भी ठेकेदार पर नगर निगम की दरियादिली समझ से परे है।
नरसिंहराव टौरिया में टौरिया (पहाड़ी) की ओर खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जे न हो सकें, इसलिए वहां पर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के तोपची गुलाम गौस खां के नाम पर पार्क स्वीकृत किया गया। पार्क का एस्टीमेट 19.79 लाख रुपये का बनाया गया। टेंडर डाले गए तो लगभग 20 प्रतिशत कम रेट (15.83 लाख रुपये) में काम स्वीकृत हो गया। टेंडर स्वीकृत होने के बाद ठेकेदार को वर्कआर्डर जारी करने के लिए नियमानुसार अनुबंध किया जाता है। जुलाई में टेंडर स्वीकृत होने के बाद 28 सितंबर को ठेकेदार को नोटिस जारी किया कि अनुबंध कर लें, लेकिन ठेकेदार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने अनुबंध नहीं किया।
तब से लेकर अब तक पार्षद अनिल सोनी लगातार ठेेकेदार की शिकायत नगर निगम में कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब कार्यकारिणी की बैठक से पहले हुए कार्यों का अपडेट नगर आयुक्त ने मांगा तो अधिशासी अभियंता बीएल गुप्ता ने उन्हें बताया कि 10 प्रतिशत काम हो गया है। मजदूर नहीं मिलने के कारण अब काम बंद है। लेकिन, जब नगर आयुक्त ने पूरा ब्योरा खंगाला तो पता चला कि ठेकेदार ने अब तक काम शुरू करने के लिए अनुबंध ही नहीं किया है। न मौके पर कोई काम हुआ है।
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अधिशासी अभियंता की भूमिका संदिग्ध
ठेकेदार का काम देख रहे अधिशासी अभियंता बीएल गुप्ता की भूमिका इस मामले में संदिग्ध नजर आती है। एक तो उन्होंने नियम विरुद्ध ठेकेदार की पैरवी की, दूसरे नगर आयुक्त को रिपोर्ट दे दी कि दस फीसदी काम हो गया है, जबकि मौके पर कुछ नहीं है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि मजदूर नहीं मिल रहे हैं। यह तर्क भी गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि बेकारी के आलम यह है कि मजदूरों के सेंटर पर एक मजदूर लेने जाओ, तो भीड़ लग जाती है। नियम विरुद्ध ठेकेदार की पैरवी क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है। या फिर अधिशासी अभियंता फील्ड में भ्रमण नहीं कर रहे हैं और आफिस में बैठे- बैठे ही रिपोर्ट दे रहे हैं। उस पर उनका तर्क कि शौचालय निर्माण देखने के कारण बाकी काम नहीं देख पा रहा हूं, समझ से परे है। क्योंकि, अन्य अधिकारी भी शौचालयों का काम देख रहे हैं।
एक नहीं कई टेंडर का अनुबंध नहीं
नगर निगम में चार- चार महीने तक अनुबंध नहीं होने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि फाइलों को खंगाला जाए तो कई ऐसे मामले पकड़े जाएंगे। ठेकेदार को किसी काम का टेंडर डालने से पहले न्यूनतम पांच प्रतिशत पैसा एफडीआर के रूप में जमा करना पड़ता है, लेकिन कई ठेकेदार ऐसे भी हैं जो एफडीआर लगाकर टेंडर डाल देते हैं, फिर गुपचुप तरीके से फाइल से एफडीआर निकाल लेते हैं।
पैसा जब्त किया जाएगा
ठेकेदार ने टेंडर डालने से पहले एक लाख रुपये से अधिक के दो चेक जमा किए हैं। यदि 15 दिसंबर तक ठेकेदार काम शुरू नहीं करता है तो पैसा जब्त कर लिया जाएगा और उसे काली सूची में डाला जाएगा।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त
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नरसिंहराव टौरिया में टौरिया (पहाड़ी) की ओर खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जे न हो सकें, इसलिए वहां पर वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के तोपची गुलाम गौस खां के नाम पर पार्क स्वीकृत किया गया। पार्क का एस्टीमेट 19.79 लाख रुपये का बनाया गया। टेंडर डाले गए तो लगभग 20 प्रतिशत कम रेट (15.83 लाख रुपये) में काम स्वीकृत हो गया। टेंडर स्वीकृत होने के बाद ठेकेदार को वर्कआर्डर जारी करने के लिए नियमानुसार अनुबंध किया जाता है। जुलाई में टेंडर स्वीकृत होने के बाद 28 सितंबर को ठेकेदार को नोटिस जारी किया कि अनुबंध कर लें, लेकिन ठेकेदार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और उसने अनुबंध नहीं किया।
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तब से लेकर अब तक पार्षद अनिल सोनी लगातार ठेेकेदार की शिकायत नगर निगम में कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब कार्यकारिणी की बैठक से पहले हुए कार्यों का अपडेट नगर आयुक्त ने मांगा तो अधिशासी अभियंता बीएल गुप्ता ने उन्हें बताया कि 10 प्रतिशत काम हो गया है। मजदूर नहीं मिलने के कारण अब काम बंद है। लेकिन, जब नगर आयुक्त ने पूरा ब्योरा खंगाला तो पता चला कि ठेकेदार ने अब तक काम शुरू करने के लिए अनुबंध ही नहीं किया है। न मौके पर कोई काम हुआ है।
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अधिशासी अभियंता की भूमिका संदिग्ध
ठेकेदार का काम देख रहे अधिशासी अभियंता बीएल गुप्ता की भूमिका इस मामले में संदिग्ध नजर आती है। एक तो उन्होंने नियम विरुद्ध ठेकेदार की पैरवी की, दूसरे नगर आयुक्त को रिपोर्ट दे दी कि दस फीसदी काम हो गया है, जबकि मौके पर कुछ नहीं है। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि मजदूर नहीं मिल रहे हैं। यह तर्क भी गले नहीं उतर रहा है, क्योंकि बेकारी के आलम यह है कि मजदूरों के सेंटर पर एक मजदूर लेने जाओ, तो भीड़ लग जाती है। नियम विरुद्ध ठेकेदार की पैरवी क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है। या फिर अधिशासी अभियंता फील्ड में भ्रमण नहीं कर रहे हैं और आफिस में बैठे- बैठे ही रिपोर्ट दे रहे हैं। उस पर उनका तर्क कि शौचालय निर्माण देखने के कारण बाकी काम नहीं देख पा रहा हूं, समझ से परे है। क्योंकि, अन्य अधिकारी भी शौचालयों का काम देख रहे हैं।
एक नहीं कई टेंडर का अनुबंध नहीं
नगर निगम में चार- चार महीने तक अनुबंध नहीं होने का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि फाइलों को खंगाला जाए तो कई ऐसे मामले पकड़े जाएंगे। ठेकेदार को किसी काम का टेंडर डालने से पहले न्यूनतम पांच प्रतिशत पैसा एफडीआर के रूप में जमा करना पड़ता है, लेकिन कई ठेकेदार ऐसे भी हैं जो एफडीआर लगाकर टेंडर डाल देते हैं, फिर गुपचुप तरीके से फाइल से एफडीआर निकाल लेते हैं।
पैसा जब्त किया जाएगा
ठेकेदार ने टेंडर डालने से पहले एक लाख रुपये से अधिक के दो चेक जमा किए हैं। यदि 15 दिसंबर तक ठेकेदार काम शुरू नहीं करता है तो पैसा जब्त कर लिया जाएगा और उसे काली सूची में डाला जाएगा।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त