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न पार्कों में रहते गार्ड और न ही गोशालाओं में
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झांसी। नगर निगम हर महीने सुरक्षा के नाम पर 30 लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन निगम की संपत्तियों की सुरक्षा हाशिये पर है। आलम यह है कि निगम में बनी फाइलों में तो सुरक्षा के लिए 200 गार्डों की तैनाती है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है। महानगर के तमाम पार्क और गोशालाओं में गार्ड रहते ही नहीं हैं। इसे लेकर पार्षद कई बार निगम अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन निगम अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधिकारियों की अनदेखी के चलते सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगर निगम ने महानगर के सभी पार्कों में गार्डों की तैनाती की है। महानगर के बड़े पार्क महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, मैथिलीशरण गुप्त पार्क , वृंदावन लाल वर्मा पार्क, कांशीराम पार्क में पांच-पांच गार्डों की तैनाती तीन शिफ़्टों में है, लेकिन यहां अधिकतर गार्ड गायब रहते हैं। नगर निगम ने मानिक चौक के इंदिरा पार्क में एक गार्ड तैनात किया है, लेकिन वह भी गायब रहता है। इसी तरह नगरिया कालोनी के पार्क में भी गार्ड की तैनाती है, मगर गार्ड आता ही नहीं है। इसके अलावा नरसिंह राव टौरिया में बने गुलाम गौस खां पार्क में भी गार्ड की तैनाती कागजों पर है। यहां कोई रहता नहीं है। महानगर के तमाम पार्कों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
यही नहीं, नगर निगम की गोशालाओं में गार्ड की तैनाती के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। गोशालाओं की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं, लेकिन यहां से अधिकतर गार्ड गायब रहते हैं। बिजौली गोशाला में तैनाती तीन गार्डों में से एक गार्ड
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गायब रहता है। इसके अलावा नगर निगम की अन्य संपत्तियोें से भी गार्ड गायब रहते हैं। पार्षद इसको लेकर कई बार सवाल भी उठा चुके हैं।
कार्यालय में भी सुरक्षा के नाम पर मनमानी
नगर निगम कार्यालय परिसर में करीब 10 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। लेकिन यहां भी आठ गार्ड ही आते हैं। जबकि कुछ महीने पहले नगर निगम कार्यालय में लिफ्ट में गिरकर एक युवक की मौत हो चुकी है। इसके अलावा गार्ड प्रशिक्षित भी नहीं हैं।
पीआरडी जवान लगाने का है नियम
नगर निगम कार्यालय और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए शासन ने पीआरडी और होमगार्ड जवान लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निगम ने इसका पालन नहीं किया। जबकि सदन में इसका प्रस्ताव पारित किया गया था। निगम अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से एजेंसी को जिम्मा सौंप दिया।
सुरक्षाकर्मियों की तैनाती मेें बड़ा खेल चल रहा है। हर पार्क में गार्ड लगाने की बात निगम अधिकारी कह रहे हैं,लेकिन कई पार्कों में तो गार्ड रहते ही नहीं हैं। जबकि इनका वेतन हर महीने निकलता है।- किशोरी प्रसाद रायकवार, पार्षद
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मेरे वार्ड के पार्क में एक गार्ड की तैनाती है, लेकिन वह आता ही नहीं है। पार्क के बाहर कूड़े का ढेर लगता है। निगम में कई बार शिकायत कर चुका हूं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। गार्ड को हर महीने वेतन भी दे दिया जाता है। - पुष्पेंद्र कुमार, पार्षद
नगर निगम की संपत्तियों और पार्कों में गार्डों की तैनाती है। रोज सभी जगह गार्ड नहीं पहुंचते हैं, तो इसकी जांच कराई जाएगी। गार्ड गायब मिलेंगे, तो एजेंसी का भुगतान काटा जाएगा।- शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त
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नगर निगम ने महानगर के सभी पार्कों में गार्डों की तैनाती की है। महानगर के बड़े पार्क महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, मैथिलीशरण गुप्त पार्क , वृंदावन लाल वर्मा पार्क, कांशीराम पार्क में पांच-पांच गार्डों की तैनाती तीन शिफ़्टों में है, लेकिन यहां अधिकतर गार्ड गायब रहते हैं। नगर निगम ने मानिक चौक के इंदिरा पार्क में एक गार्ड तैनात किया है, लेकिन वह भी गायब रहता है। इसी तरह नगरिया कालोनी के पार्क में भी गार्ड की तैनाती है, मगर गार्ड आता ही नहीं है। इसके अलावा नरसिंह राव टौरिया में बने गुलाम गौस खां पार्क में भी गार्ड की तैनाती कागजों पर है। यहां कोई रहता नहीं है। महानगर के तमाम पार्कों का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
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यही नहीं, नगर निगम की गोशालाओं में गार्ड की तैनाती के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। गोशालाओं की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए गए हैं, लेकिन यहां से अधिकतर गार्ड गायब रहते हैं। बिजौली गोशाला में तैनाती तीन गार्डों में से एक गार्ड
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गायब रहता है। इसके अलावा नगर निगम की अन्य संपत्तियोें से भी गार्ड गायब रहते हैं। पार्षद इसको लेकर कई बार सवाल भी उठा चुके हैं।
कार्यालय में भी सुरक्षा के नाम पर मनमानी
नगर निगम कार्यालय परिसर में करीब 10 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। लेकिन यहां भी आठ गार्ड ही आते हैं। जबकि कुछ महीने पहले नगर निगम कार्यालय में लिफ्ट में गिरकर एक युवक की मौत हो चुकी है। इसके अलावा गार्ड प्रशिक्षित भी नहीं हैं।
पीआरडी जवान लगाने का है नियम
नगर निगम कार्यालय और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए शासन ने पीआरडी और होमगार्ड जवान लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निगम ने इसका पालन नहीं किया। जबकि सदन में इसका प्रस्ताव पारित किया गया था। निगम अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से एजेंसी को जिम्मा सौंप दिया।
सुरक्षाकर्मियों की तैनाती मेें बड़ा खेल चल रहा है। हर पार्क में गार्ड लगाने की बात निगम अधिकारी कह रहे हैं,लेकिन कई पार्कों में तो गार्ड रहते ही नहीं हैं। जबकि इनका वेतन हर महीने निकलता है।- किशोरी प्रसाद रायकवार, पार्षद
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मेरे वार्ड के पार्क में एक गार्ड की तैनाती है, लेकिन वह आता ही नहीं है। पार्क के बाहर कूड़े का ढेर लगता है। निगम में कई बार शिकायत कर चुका हूं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। गार्ड को हर महीने वेतन भी दे दिया जाता है। - पुष्पेंद्र कुमार, पार्षद
नगर निगम की संपत्तियों और पार्कों में गार्डों की तैनाती है। रोज सभी जगह गार्ड नहीं पहुंचते हैं, तो इसकी जांच कराई जाएगी। गार्ड गायब मिलेंगे, तो एजेंसी का भुगतान काटा जाएगा।- शादाब असलम, अपर नगर आयुक्त