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मौत के मुहाने पर भी पूर्णिमा को याद रहा मां का संकल्प

Sat, 14 Sep 2019 11:42 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 11:42 PM IST
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mot ke muhane pr bhi puridma ka yad rha maa ka sankalp
अंगदान करने वालीं पूर्णिमा (फाइल फोटो)।
मौत के मुहाने पर भी पूर्णिमा को याद रहा मां का संकल्प
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झांसी। मौत सामने खड़ी थी, हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। एक ऑपरेशन हो चुका था और दूसरे की तैयारी थी। इसके साथ ही क्षीण होती जा रही थी स्मरण शक्ति, लेकिन याद था मां का संकल्प, जो वो तो पूरा नहीं कर पाईं थीं, लेकिन बेटी ने मरने के बाद उसे पूरा किया। जी हां, खनिज विभाग में कार्यरत पूर्णिमा श्रीवास्तव ने मृत्यु से ठीक पहले अंगदान की इच्छा जताई। दूसरों की जिंदगी बचाने की खातिर वह अपने दोनों गुर्दे, लीवर और दिल दान कर गईं।
एडीएम के स्टेनो राकेश खरे की पत्नी पूर्णिमा श्रीवास्तव (44) खनिज विभाग में कार्यरत थीं। एक-दो सितंबर की दरम्यानी रात दो बजे उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। परिजन रात में ही उन्हें स्थानीय अस्पताल ले गए। यहां गंभीर हालत होने पर उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। एयर एंबुलेंस के माध्यम से परिजन उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले गए। यहां चार सितंबर को उनके दिमाग का ऑपरेशन हुआ। इसके बाद उनकी हालत में सुधार होने लगा। इसी दरम्यान पूर्णिमा ने इच्छा जताई कि उनकी मृत्यु होने पर उनके शरीर के अंग दान कर दिए जाएं, ताकि इससे किसी और की जिंदगी बच सके। इसके बाद एक बार फिर उनकी हालत बिगड़ गई। 10 सितंबर को उनका दूसरा ऑपरेशन करना पड़ा। लेकिन, इसके बाद भी पूर्णिमा की हालत में सुधार नहीं आया। 12 सितंबर को उनकी अस्पताल में मौत हो गई। पूर्णिमा की इच्छा के अनुसार उनके किडनी, लीवर और दिल को निकाला गया।
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उल्लेखनीय है कि पूर्णिमा की मां जीजीआईसी की सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मोहिनी देवी श्रीवास्तव मृत्यु उपरांत अपने अंगदान करना चाहती थीं, ये इच्छा उन्होंने अपनी बेटी को भी बताई थी। लेकिन, इसी साल 18 मई को वह अचानक काल के गाल में समा गईं और उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई थी। पूर्णिमा को मां का ये संकल्प आखिरी दम तक याद रहा और उन्होंने मृत्यु उपरांत उसे पूरा किया।
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जज्बे को हर किसी ने किया सलाम
मौत के बाद भी दूसरों की मदद के पूर्णिमा के जज्बे को हर किसी ने सलाम किया। अपोलो अस्पताल से जब उनका शव बाहर आ रहा था, तो वहां अस्पताल के सभी चिकित्सक व स्टाफ ने कतारबद्ध खड़े होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। झांसी में उनके अंतिम संस्कार से पहले जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी, अपर जिलाधिकारी नगेंद्र शर्मा ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। वहीं, पूर्णिमा की शव यात्रा में भी भारी भीड़ उमड़ी।

मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं मां
पूर्णिमा अपने पीछे बेटी अदिती (22) और बेटा आदित्य (12) को छोड़ गईं हैं। बेटी ने बताया कि मां हमेशा से ही हर किसी की मदद को तत्पर रहती थीं। हर किसी की जरूरत को वह पूरा करने की कोशिश करती थीं। मृत्यु उपरांत वह अंगदान की इच्छा भी परिवार में सभी को बता चुकी थीं। पता नहीं था कि वह इतनी जल्दी हम सब को छोड़ कर चली जाएंगी। मुझे मेरी मां पर गर्व है।
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