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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: दो दिन में सत्तर से अधिक आपत्तियां
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झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में दो दिन के भीतर विभिन्न पदों के लिए 70 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। इनमें सर्वाधिक 38 आपत्तियां ग्राम प्रधान पदों के लिए हुए आरक्षण को लेकर दर्ज कराई गई हैं। हालांकि अधिकांश आपत्ति दर्ज कराने वालों ने आबादी को ही आधार बनाया है।
शासनादेश के मुतातिक दो मार्च को चक्रानुक्रम के अनुसार सभी 496 ग्राम पंचायतों का आरक्षण तय कर दिया गया। प्रदेश सरकार की बनाई नई व्यवस्था में इस दफेे जो सीटें कभी एससी को आरक्षित नहीं हुईं उनको प्राथमिकता पर एससी को आरक्षित कर दिया गया। इस वजह से जनपद की 43 सीट अनुसूचित जाति (महिला) एवं 77 सीट अनुसूचित जाति को आरक्षित हो गईं। 1995 के बाद पहली दफे यह सीटें इस वर्ग को आरक्षित हुईं। इस तरह के आरक्षण ने कई ग्राम पंचायतों का सियासी समीकरण गड़बड़ा दिया। इस नए आरक्षण ने काफी दिनों से चुनावी तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों के होश फाख्ता कर दिए। ऐसे में इन उम्मीदवारोें की सारी उम्मीदें अब आपत्तियों पर जा टिकीं।
दो दिनों में ही विभिन्न पदों की कुल 70 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकीं हैं, जिनमें अधिकांश ग्राम प्रधान पदों को लेकर की गई हैं। बृहस्पतिवार तक दर्ज हुई आपत्तियों में बंगरा ब्लॉक से खिसनी खुर्द, बुढ़ियाबम्हौरी, मोंठ से बेलमा कला, खूजा, कायला, बरौंदा, दतावलीकला, साकिन, बबीना से रक्सा, कोटखेरा, चिरगांव से रामनगर, मढ़डिलावली, गुरसराय से करगुवांबुजुर्ग, आमली, खिसनीबुजुर्ग, सैगुवां, मऊरानीपुर से सिजारीबुजुर्ग, घाटलहचूरा, बंगरा से लुहरगांव रानीपुर, घुराट ग्राम पंचायतों में हुए आरक्षण को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इनमें सर्वाधिक आपत्तियां आबादी को आधार बनाकर दर्ज कराई गई। आपत्ति दर्ज कराने वालों का कहना है ग्राम पंचायत की अधिकांश आबादी का ख्याल किए बगैर पंचातय का आरक्षण दूसरे वर्ग को कर दिया गया जबकि अधिकारियों का कहना है शासनादेश में किसी पंचायत में तीन लोगों की आबादी होने पर भी उसका आरक्षण किया जा सकता है हालांकि इन आपत्तियों का निस्तारण कमेटी व्यापक सुनवाई के बाद करेंगी।
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शासनादेश के मुतातिक दो मार्च को चक्रानुक्रम के अनुसार सभी 496 ग्राम पंचायतों का आरक्षण तय कर दिया गया। प्रदेश सरकार की बनाई नई व्यवस्था में इस दफेे जो सीटें कभी एससी को आरक्षित नहीं हुईं उनको प्राथमिकता पर एससी को आरक्षित कर दिया गया। इस वजह से जनपद की 43 सीट अनुसूचित जाति (महिला) एवं 77 सीट अनुसूचित जाति को आरक्षित हो गईं। 1995 के बाद पहली दफे यह सीटें इस वर्ग को आरक्षित हुईं। इस तरह के आरक्षण ने कई ग्राम पंचायतों का सियासी समीकरण गड़बड़ा दिया। इस नए आरक्षण ने काफी दिनों से चुनावी तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों के होश फाख्ता कर दिए। ऐसे में इन उम्मीदवारोें की सारी उम्मीदें अब आपत्तियों पर जा टिकीं।
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दो दिनों में ही विभिन्न पदों की कुल 70 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकीं हैं, जिनमें अधिकांश ग्राम प्रधान पदों को लेकर की गई हैं। बृहस्पतिवार तक दर्ज हुई आपत्तियों में बंगरा ब्लॉक से खिसनी खुर्द, बुढ़ियाबम्हौरी, मोंठ से बेलमा कला, खूजा, कायला, बरौंदा, दतावलीकला, साकिन, बबीना से रक्सा, कोटखेरा, चिरगांव से रामनगर, मढ़डिलावली, गुरसराय से करगुवांबुजुर्ग, आमली, खिसनीबुजुर्ग, सैगुवां, मऊरानीपुर से सिजारीबुजुर्ग, घाटलहचूरा, बंगरा से लुहरगांव रानीपुर, घुराट ग्राम पंचायतों में हुए आरक्षण को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। इनमें सर्वाधिक आपत्तियां आबादी को आधार बनाकर दर्ज कराई गई। आपत्ति दर्ज कराने वालों का कहना है ग्राम पंचायत की अधिकांश आबादी का ख्याल किए बगैर पंचातय का आरक्षण दूसरे वर्ग को कर दिया गया जबकि अधिकारियों का कहना है शासनादेश में किसी पंचायत में तीन लोगों की आबादी होने पर भी उसका आरक्षण किया जा सकता है हालांकि इन आपत्तियों का निस्तारण कमेटी व्यापक सुनवाई के बाद करेंगी।
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