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चांद की तस्दीक हुई, 21 जुलाई को मनाई जाएगी बकरीद
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चांद की तस्दीक हुई, 21 जुलाई को मनाई जाएगी बकरीद
झांसी। रविवार को मस्जिद बिसाती बाजार में रुय्यते हिलाल कमेटी की बैठक मौलाना आमिल कासमी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के चांद की तस्दीक की गई। चांद का दीदार होते ही 21 जुलाई को शहर भर में बकरीद का त्योहार मनाने का एलान किया गया। सोमवार को जिलहिज्जा की पहली तारीख होगी। जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को शहर भर में ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जाएगा।
बकरीद पर कुर्बानी देने का रिवाज है। इस दिन मुस्लिमों द्वारा बकरे सहित कई हलाल जानवराें की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी से पहले ईदगाह के साथ ही शहर की कई मस्जिदों में ईद की खास नमाज अदा की जाती है। ईद की नमाज में लोग अपनों के सलामती की दुआ करते हैं। एक दूसरे से गले मिलकर भाईचारे का संदेश दिया जाता है। ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद ही शहर भर में कुर्बानियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस्लाम के अनुसार कुर्बानी के जानवर के तीन हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा गरीबों और मिस्कीनों में तकसीम किया जाता है। जबकि दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों का होता है। वहीं तीसरा हिस्सा कुर्बानी करने वाले का होता है। हिलाल कमेटी की बैठक में मुफ्ती साबिर कासमी, मौलाना खुर्शीद, मौलाना सैफुद्दीन, कारी हसीब, हाफिज रियाज आदि मौजूद रहे।
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झांसी। रविवार को मस्जिद बिसाती बाजार में रुय्यते हिलाल कमेटी की बैठक मौलाना आमिल कासमी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में ईद-उल-अजहा (बकरीद) के चांद की तस्दीक की गई। चांद का दीदार होते ही 21 जुलाई को शहर भर में बकरीद का त्योहार मनाने का एलान किया गया। सोमवार को जिलहिज्जा की पहली तारीख होगी। जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को शहर भर में ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जाएगा।
बकरीद पर कुर्बानी देने का रिवाज है। इस दिन मुस्लिमों द्वारा बकरे सहित कई हलाल जानवराें की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी से पहले ईदगाह के साथ ही शहर की कई मस्जिदों में ईद की खास नमाज अदा की जाती है। ईद की नमाज में लोग अपनों के सलामती की दुआ करते हैं। एक दूसरे से गले मिलकर भाईचारे का संदेश दिया जाता है। ईद-उल-अजहा की नमाज के बाद ही शहर भर में कुर्बानियों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस्लाम के अनुसार कुर्बानी के जानवर के तीन हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा गरीबों और मिस्कीनों में तकसीम किया जाता है। जबकि दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों का होता है। वहीं तीसरा हिस्सा कुर्बानी करने वाले का होता है। हिलाल कमेटी की बैठक में मुफ्ती साबिर कासमी, मौलाना खुर्शीद, मौलाना सैफुद्दीन, कारी हसीब, हाफिज रियाज आदि मौजूद रहे।
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