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स्कूल बंद रहे तो जारी रखी मुहल्ला क्लासेस
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झांसी। सरकारी और प्राइवेट स्कूल जब बंद थे, तब बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक-शिक्षकों ने मिसाल पेश करते हुए मुहल्ले-मुहल्ले जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई। उनका उद्देश्य था कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान आ रही समस्याओं को समझाना। साथ ही समझ न आने वाले विषयों को बताना।
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए बिल्कुल नई व्यवस्था थी। हर कोई इसमें रम नहीं सका। खासकर सरकारी स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की पहल पर कई शिक्षकों ने बच्चों को मुहल्ला क्लासेस पढ़ानी शुरू की। शिक्षक पीयूष अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने हंसारी के श्रीनगर, नई बस्ती, खुशीपुरा में मुहल्ला क्लासेस में बच्चों की पढ़ाई कराई। जबकि, शिक्षिका साधना तिवारी ने नगरा, वीणा तिवारी गुदरी, रजनी साहू ने खुशीपुरा में प्रेरणा साथी के जरिए मुहल्ले में जाकर ही बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को आ रही दिक्कतों के बारे में भी पूछा। साथ ही जो कोर्स समझ नहीं आया, उसे ऑफलाइन फिर से पढ़ाया। बच्चों को होम वर्क भी दिया। अगले दिन उसकी जांच भी की।
झांसी। मोंठ निवासी सुरजीत सिंह यादव ने कोरोना काल में बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाई कराई। यही नहीं, किताबें तक अपने पास से विद्यार्थियों को फ्री में दी। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए घरों पर ही विद्यार्थियों को पढ़ाया।
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सुरजीत ने बताया कि वह कोचिंग पहले से पढ़ाते रहे हैं लेकिन कोविड के दौरान कई विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई। ऐसे में उन्होंने फैसला लिया कि जब तक लोगों का जनजीवन पटरी पर नहीं लौटता है, वो गरीब बच्चों से कोचिंग की फीस नहीं लेंगे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल से लेकर जुलाई तक बच्चों को अपने घर पर ही अंग्रेजी नि:शुल्क पढ़ाई। इसमें अंग्रेजी बोलने से लेकर ग्रामर तक का ज्ञान दिया। साथ ही अपनी तरफ से बच्चों को फ्री में किताबें भी दीं। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी कोई गरीब बच्चा उनके पास आ जाता है तो वह उसे नि:शुल्क पढ़ाते हैं।
झांसी। तालपुरा के बेसिक प्राइमरी पाठशाला नवीन ओरछा गेट में कभी लोग कूड़ा डाला करते थे लेकिन अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चों को कराटे सिखाने वाले ब्लैक बेल्ड आनंद साहू ने प्रधानाध्यापक के साथ मिलकर विद्यालय का जीर्णोद्धार करने का काम किया। अब यहां बच्चों का छात्रांकन भी बढ़ गया है।
तालपुरा निवासी आनंद ने बताया कि प्राथमिक पाठशाला को लोगों ने कूड़ा घर बना रखा था। यहां पर काफी दुर्गंध आती थी। इसके अलावा विद्यालय का भवन, शौचालय भी काफी जर्जर हो गया था। वह यहां पर बच्चों को कराटे सिखाते थे। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक के साथ मिलकर स्कूल की तस्वीर बदलने की ठान ली। स्कूल को कब्जा मुक्त कराते हुए साफ-सफाई कराई। इसके बाद विद्यालय के भवन की भी मरम्मत कराई। पहले यहां पर 40-50 बच्चे ही पढ़ते थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 250 हो गई है। विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था के लिए हैंडपंप लगवाया। पौधरोपण भी किया गया।
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कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए बिल्कुल नई व्यवस्था थी। हर कोई इसमें रम नहीं सका। खासकर सरकारी स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन क्लासेस में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग की पहल पर कई शिक्षकों ने बच्चों को मुहल्ला क्लासेस पढ़ानी शुरू की। शिक्षक पीयूष अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने हंसारी के श्रीनगर, नई बस्ती, खुशीपुरा में मुहल्ला क्लासेस में बच्चों की पढ़ाई कराई। जबकि, शिक्षिका साधना तिवारी ने नगरा, वीणा तिवारी गुदरी, रजनी साहू ने खुशीपुरा में प्रेरणा साथी के जरिए मुहल्ले में जाकर ही बच्चों को पढ़ाया। इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को आ रही दिक्कतों के बारे में भी पूछा। साथ ही जो कोर्स समझ नहीं आया, उसे ऑफलाइन फिर से पढ़ाया। बच्चों को होम वर्क भी दिया। अगले दिन उसकी जांच भी की।
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झांसी। मोंठ निवासी सुरजीत सिंह यादव ने कोरोना काल में बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाई कराई। यही नहीं, किताबें तक अपने पास से विद्यार्थियों को फ्री में दी। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए घरों पर ही विद्यार्थियों को पढ़ाया।
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सुरजीत ने बताया कि वह कोचिंग पहले से पढ़ाते रहे हैं लेकिन कोविड के दौरान कई विद्यार्थियों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई। ऐसे में उन्होंने फैसला लिया कि जब तक लोगों का जनजीवन पटरी पर नहीं लौटता है, वो गरीब बच्चों से कोचिंग की फीस नहीं लेंगे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल से लेकर जुलाई तक बच्चों को अपने घर पर ही अंग्रेजी नि:शुल्क पढ़ाई। इसमें अंग्रेजी बोलने से लेकर ग्रामर तक का ज्ञान दिया। साथ ही अपनी तरफ से बच्चों को फ्री में किताबें भी दीं। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी कोई गरीब बच्चा उनके पास आ जाता है तो वह उसे नि:शुल्क पढ़ाते हैं।
झांसी। तालपुरा के बेसिक प्राइमरी पाठशाला नवीन ओरछा गेट में कभी लोग कूड़ा डाला करते थे लेकिन अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। बच्चों को कराटे सिखाने वाले ब्लैक बेल्ड आनंद साहू ने प्रधानाध्यापक के साथ मिलकर विद्यालय का जीर्णोद्धार करने का काम किया। अब यहां बच्चों का छात्रांकन भी बढ़ गया है।
तालपुरा निवासी आनंद ने बताया कि प्राथमिक पाठशाला को लोगों ने कूड़ा घर बना रखा था। यहां पर काफी दुर्गंध आती थी। इसके अलावा विद्यालय का भवन, शौचालय भी काफी जर्जर हो गया था। वह यहां पर बच्चों को कराटे सिखाते थे। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक के साथ मिलकर स्कूल की तस्वीर बदलने की ठान ली। स्कूल को कब्जा मुक्त कराते हुए साफ-सफाई कराई। इसके बाद विद्यालय के भवन की भी मरम्मत कराई। पहले यहां पर 40-50 बच्चे ही पढ़ते थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 250 हो गई है। विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था के लिए हैंडपंप लगवाया। पौधरोपण भी किया गया।