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‘प्रेरणा’ एप वापस नहीं होगा, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री बोले-जल्द होगा अनिवार्य

Wed, 16 Oct 2019 07:56 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ललितपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ललितपुर Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 16 Oct 2019 07:56 PM IST
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Minister Dr. Satish Chandra Dwivedi says that 'Prerna' app will be made compulsory soon
प्रेरणा एप - फोटो : फाइल फोटो
प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि ‘प्रेरणा’ एप को जल्द ही अनिवार्य किया जाएगा। इस पर शिक्षकों को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी ही होगी। इसे वापस नहीं लिया जाएगा। 
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वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिभा सम्मान समारोह में शामिल होने के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। राजकीय इंटर कॉलेज में उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में योगी सरकार आई है, तब से कायाकल्प योजना शुरू हुई है। 
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सबसे बड़ी शिकायत होती थी कि स्कूलों में बैठने की व्यवस्था अच्छी नहीं थी। बच्चों के ड्रेस अच्छे नहीं थे। पंचायतों के माध्यम से जर्जर भवनों की जगह अब दीवारों पर रंग-बिरंगे शिक्षाप्रद चित्र बन रहे हैं। स्कूलों की दीवारें और फर्श बन रहे हैं। बिजली पहुंच गई है। हमने अवस्थापना और व्यवस्थाओं पर जोर दिया है। अभी सारे स्कूलों में व्यवस्थाएं नहीं कर पाए हैं। 
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प्रदेश में एक लाख उनसठ हजार विद्यालय हैं, जिनमें से बानवे हजार विद्यालयों को ठीक किया गया है। नगरों में कायाकल्प योजना शुरू की गई है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की ओर से सुधार के प्रयास किए गए हैं। उन्नाव जिले में खेल किट में घोटाला हुआ था, वहां के बीएसए को निलंबित किया गया है। अन्य जिलों से भी खेलकिट की स्थिति का पता लगा रहे हैं। उपभोग प्रमाण पत्र भी मांगे जा रहे हैं। जांच में जो व्यक्ति दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

उर्दू शिक्षकों की जांच होने के बाद कार्रवाई नहीं होने के जवाब में उन्होंने कहा कि यह मामला संज्ञान में नहीं था। योगी सरकार जीरो टोलरेंस की नीति पर काम कर रही है। फर्जी शिक्षकों की सघन जांच हो रही है। इसमें शिक्षक बर्खास्त हो रहे हैं, उनके खिलाफ एफआईआर की जा रही है। यदि उर्दू शिक्षकों की भर्ती में भी गड़बड़ी हुई है तो इसकी जांच रिपोर्ट शासन में मंगाकर कार्रवाई की जाएगी। 

‘प्रेरणा’ एप को शुरू में एच्छिक किया गया था, हमें उम्मीद थी कि लोग इसे डाउनलोड करेंगे, लेकिन वे नहीं करना चाहते हैं। हम अब स्कूलों को टेबलेट भेज रहे हैं। महीने दो महीने में जब टेबलेट पहुंच जाएंगे, तब इसे अनिवार्य कर दिया जाएगा। 

इसके बाद सभी शिक्षकों को अपनी उपस्थिति इसी एप पर देनी होगी। यह जीपीएस आधारित एप है, इसमें बिजली की समस्या आड़े नहीं आएगी। इंटरनेट के संपर्क में आते ही एप पर फोटो अपलोड होना आरंभ हो जाएगी। इसमें फोटो का समय और लोकेशन तभी की होगी, जब उसे अपलोड किया गया होगा।
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