{"_id":"6ac40b0c31ceab4770010e7e","slug":"police-to-scrutinize-the-backgrounds-of-the-sub-inspector-and-constables-in-the-6-lakh-robbery-case-jhansi-news-c-11-jhs1019-891890-2026-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: छह लाख की लूट मामले में दरोगा और सिपाहियों की कुंडली खंगालेगी पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: छह लाख की लूट मामले में दरोगा और सिपाहियों की कुंडली खंगालेगी पुलिस
विज्ञापन
झांसी। छह लाख रुपये एवं दो महंगे ब्रांडेड मोबाइल फोन की लूट मामले में घिरे दरोगा राजेश अवस्थी, सिपाही कपिल चाहर, राजेश पाल समेत दो अज्ञात सिपाहियों की जांच में डिटिजल फुटप्रिंट जुटाए जाएंगे। इसके लिए साइबर जानकारों की मदद ली जा रही है।
आरोपों की पड़ताल के लिए आरोपी पुलिसकर्मियों और लूटे गए मोबाइल की लोकेशन एवं सीडीआर का पुलिस विश्लेषण करने में जुटी है। वहीं, इवेंट ऑर्गेनाइजर शारिक सिद्दीकी का बयान भी क्रॉस चेक किया जा रहा है।
शारिक की तहरीर पर 3 अक्तूबर को कोतवाली पुलिस ने दरोगा समेत चार सिपाहियों पर लूट के आरोप में कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज किया था। शारिक का आरोप है कि सिपाही कपिल चाहर ने उसकी गाड़ी से छह लाख रुपये निकाले, जबकि सिपाही राजेश ने उसके दोनों मोबाइल रख लिए। उसके छह लाख हड़पने की खातिर पुलिस ने उसे साइबर फ्राड के झूठे मामले में फंसा दिया।
विज्ञापन
शारिक के मुताबिक उसने बियांस नामक प्लेटफार्म से यूएसटीडी का लेनदेन किया। गलती से कुछ रकम आने से उसका खाता फ्रीज हो गया। यह पैसा सीधे न आकर तीसरे अथवा चौथे स्तर से उसके खाते में पहुंचा था। यह बात जानते हुए भी पुलिस ने उसे हिस्ट्रीशीटर कामरान के साथ मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। इस मामले में वह 120 दिन जेल में रहा। हैरानी की बात यह कि उसे जेल भेजने के बाद गुपचुप तरीके से पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर कामरान को इस मामले से बाहर निकाल दिया। शारिक ने अपने लूटे गए दोनों मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर भी बताया। अब पुलिस इसके सहारे पुराने डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है। वहीं, इस मामले ने पुलिस अफसरों में खलबली मचा दी है। आईजी आकाश कुलहरि खुद मामले की निगरानी कर रहे है। सोमवार को उन्होंने प्रगति आख्या तलब करके निर्देश दिए।
आईजी के सामने फफक पड़ा शारिक
आईजी के सामने आपबीती सुनाते-सुनाते शारिक फफक पड़ा। उसने बताया कि पहले उससे रुपये और मोबाइल ले लिए गए, इसके बाद उसे साइबर अपराध के मामले में जेल भेज दिया गया। शारिक ने कहा कि जेल जाने की वजह से उसकी शादी टूट गई। काम-धंधा बंद हो गया। उसने बताया कि घटना से पहले उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। उसका आरोप है कि पैसों की जानकारी होने के कारण उसे पुलिसकर्मियों ने निशाना बनाया। उसने दावा किया कि उसे हिस्ट्रीशीटर के साथ भी जानबूझकर मामले में फंसाया गया। शारिक ने कहा कि वह 120 दिन तक जेल में रहा और जमानत पर बाहर आया। अपनी जिंदगी बर्बाद होने की बात कहते हुए वह आईजी से निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाता रहा। आईजी ने उसे निष्पक्ष विवेचना का भरोसा दिया।
एसओजी में तैनात है आरोपी कपिल
लूट मामले में नामजद सिपाही कपिल चाहर इन दिनों एसओजी में तैनात है, जबकि दूसरा सिपाही राजेश पाल कुछ माह पहले बबीना थाने में तैनात रहने के दौरान मारपीट के मामले में लाइन हाजिर हो चुका। दरोगा के तौर पर नामजद राजेश अवस्थी का तबादला गैर जनपद हो चुका। बताया जा रहा कि तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पाल के अवकाश पर होने की वजह से वह उस दिन अतिरिक्त निरीक्षक के तौर पर तैनात थे। पुलिस रिकॉर्ड में राजेश अवस्थी निरीक्षक के तौर पर दर्ज हैं।
000
वर्जन
मामले की विवेचना कराई जा रही है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ सुबूत मिलेंगे, तो उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
-आकाश कुलहरि, आईजी, झांसी रेंज
विज्ञापन
आरोपों की पड़ताल के लिए आरोपी पुलिसकर्मियों और लूटे गए मोबाइल की लोकेशन एवं सीडीआर का पुलिस विश्लेषण करने में जुटी है। वहीं, इवेंट ऑर्गेनाइजर शारिक सिद्दीकी का बयान भी क्रॉस चेक किया जा रहा है।
विज्ञापन
शारिक की तहरीर पर 3 अक्तूबर को कोतवाली पुलिस ने दरोगा समेत चार सिपाहियों पर लूट के आरोप में कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज किया था। शारिक का आरोप है कि सिपाही कपिल चाहर ने उसकी गाड़ी से छह लाख रुपये निकाले, जबकि सिपाही राजेश ने उसके दोनों मोबाइल रख लिए। उसके छह लाख हड़पने की खातिर पुलिस ने उसे साइबर फ्राड के झूठे मामले में फंसा दिया।
विज्ञापन
शारिक के मुताबिक उसने बियांस नामक प्लेटफार्म से यूएसटीडी का लेनदेन किया। गलती से कुछ रकम आने से उसका खाता फ्रीज हो गया। यह पैसा सीधे न आकर तीसरे अथवा चौथे स्तर से उसके खाते में पहुंचा था। यह बात जानते हुए भी पुलिस ने उसे हिस्ट्रीशीटर कामरान के साथ मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। इस मामले में वह 120 दिन जेल में रहा। हैरानी की बात यह कि उसे जेल भेजने के बाद गुपचुप तरीके से पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर कामरान को इस मामले से बाहर निकाल दिया। शारिक ने अपने लूटे गए दोनों मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर भी बताया। अब पुलिस इसके सहारे पुराने डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है। वहीं, इस मामले ने पुलिस अफसरों में खलबली मचा दी है। आईजी आकाश कुलहरि खुद मामले की निगरानी कर रहे है। सोमवार को उन्होंने प्रगति आख्या तलब करके निर्देश दिए।
आईजी के सामने फफक पड़ा शारिक
आईजी के सामने आपबीती सुनाते-सुनाते शारिक फफक पड़ा। उसने बताया कि पहले उससे रुपये और मोबाइल ले लिए गए, इसके बाद उसे साइबर अपराध के मामले में जेल भेज दिया गया। शारिक ने कहा कि जेल जाने की वजह से उसकी शादी टूट गई। काम-धंधा बंद हो गया। उसने बताया कि घटना से पहले उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। उसका आरोप है कि पैसों की जानकारी होने के कारण उसे पुलिसकर्मियों ने निशाना बनाया। उसने दावा किया कि उसे हिस्ट्रीशीटर के साथ भी जानबूझकर मामले में फंसाया गया। शारिक ने कहा कि वह 120 दिन तक जेल में रहा और जमानत पर बाहर आया। अपनी जिंदगी बर्बाद होने की बात कहते हुए वह आईजी से निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाता रहा। आईजी ने उसे निष्पक्ष विवेचना का भरोसा दिया।
एसओजी में तैनात है आरोपी कपिल
लूट मामले में नामजद सिपाही कपिल चाहर इन दिनों एसओजी में तैनात है, जबकि दूसरा सिपाही राजेश पाल कुछ माह पहले बबीना थाने में तैनात रहने के दौरान मारपीट के मामले में लाइन हाजिर हो चुका। दरोगा के तौर पर नामजद राजेश अवस्थी का तबादला गैर जनपद हो चुका। बताया जा रहा कि तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पाल के अवकाश पर होने की वजह से वह उस दिन अतिरिक्त निरीक्षक के तौर पर तैनात थे। पुलिस रिकॉर्ड में राजेश अवस्थी निरीक्षक के तौर पर दर्ज हैं।
000
वर्जन
मामले की विवेचना कराई जा रही है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ सुबूत मिलेंगे, तो उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
-आकाश कुलहरि, आईजी, झांसी रेंज