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मीटर रीडर घर बैठकर बना दे रहे बिजली बिल, 30 आए जांच के घेरे में
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झांसी। बिजली के बिलों में बड़ा गोलमाल सामने आ रहा है। मीटर रीडर घर पर बैठकर ही बिल बना दे रहे हैं। हर रोज बीस से पच्चीस मामले इस तरह के सामने आ रहे हैं। बढ़ती शिकायतों के बाद विभाग ने भी माना है कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ है। फिलहाल 30 मीटर रीडर जांच के घेरे में आ गए हैं। इनके बारे में उपभोक्ताओं से पूछा जाएगा कि क्या यह मीटर की रीडिंग लेने आते हैं।
महानगर में बिजली के 1 लाख 24 हजार उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के घरों पर लगे मीटर से रीडिंग निकालने के लिए 140 मीटर रीडर हैं। अगर जून और जुलाई माह की बात की जाए तो गलत बिलों की शिकायतें अचानक बढ़ गईं। स्थिति यह रही कि अगर किसी का बिल पहले 2000 आता था तो 2500 आने लगा। उपभोक्ता शिकायतें लेकर अफसरों पर पहुंचने लगे। जब शिकायतें बढ़ीं तो अफसरों को भी शक हुआ लिहाजा उपभोक्ताओं से पूछना शुरू किया। सैकड़ों ने बताया कि मीटर रीडर उनके घर पर कभी आया ही नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि जब रीडर आ ही नहीं रहे तो बिल बन कैसे जा रहा है। अफसरों की माने तो 25 से 30 मीटर रीडर ऐसे हैं, जिन्होंने उपभोक्ता के घर जाए बिना ही, बिजली बिल बना दिया। इसका खुलासा तब हुआ जब, उपभोक्ताओं ने मीटर की रीडिंग से बिजली के बिल का मिलान किया, तो किसी का एक महीने में पांच हजार, तो किसी का तीन हजार, तो किसी का 20 हजार रुपये बिजली का बिल निकाल दिया।
केस नंबर एक
पंचवटी इलाके में रहने वाले भगवती ने बताया कि उनके मीटर की रीडिंग लेने के लिए कोई मीटर रीडर घर नहीं आया, लेकिन मोबाइल पर 20 हजार का बिल भेज दिया। अब इसको सही कराने के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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केस नंबर दो
उन्नाव गेट पावर हाउस परिक्षेत्र के महीपत ने बताया कि उनकी रीडिंग कम है लेकिन बिल ज्यादा आया है। मोबाइल पर 5000 का मेसेज मिला। जबकि इतना बिल कभी नहीं आता। अब बिल सही कराने के लिए अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
केस नंबर तीन
नगरिया कुआं निवासी अशोक, फूलमती का भी कहना है कि घर पर कोई मीटर रीडर नहीं आया। अपने मन मुताबिक बिजली का बिल 3000 बनाकर भेज दिया। जब मीटर की रीडिंग से मिलान किया, रीडिंग कम थी, लेकिन बिल ज्यादा।
जिन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बिजली बिल ज्यादा या मीटर रीडिंग के अनुसार आ रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। इसके बाद मामला सही पाए जाने पर संबंधित क्षेत्र के मीटर रीडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - डी. यादवेंदु , अधिशासी अभियंता
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महानगर में बिजली के 1 लाख 24 हजार उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के घरों पर लगे मीटर से रीडिंग निकालने के लिए 140 मीटर रीडर हैं। अगर जून और जुलाई माह की बात की जाए तो गलत बिलों की शिकायतें अचानक बढ़ गईं। स्थिति यह रही कि अगर किसी का बिल पहले 2000 आता था तो 2500 आने लगा। उपभोक्ता शिकायतें लेकर अफसरों पर पहुंचने लगे। जब शिकायतें बढ़ीं तो अफसरों को भी शक हुआ लिहाजा उपभोक्ताओं से पूछना शुरू किया। सैकड़ों ने बताया कि मीटर रीडर उनके घर पर कभी आया ही नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि जब रीडर आ ही नहीं रहे तो बिल बन कैसे जा रहा है। अफसरों की माने तो 25 से 30 मीटर रीडर ऐसे हैं, जिन्होंने उपभोक्ता के घर जाए बिना ही, बिजली बिल बना दिया। इसका खुलासा तब हुआ जब, उपभोक्ताओं ने मीटर की रीडिंग से बिजली के बिल का मिलान किया, तो किसी का एक महीने में पांच हजार, तो किसी का तीन हजार, तो किसी का 20 हजार रुपये बिजली का बिल निकाल दिया।
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केस नंबर एक
पंचवटी इलाके में रहने वाले भगवती ने बताया कि उनके मीटर की रीडिंग लेने के लिए कोई मीटर रीडर घर नहीं आया, लेकिन मोबाइल पर 20 हजार का बिल भेज दिया। अब इसको सही कराने के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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केस नंबर दो
उन्नाव गेट पावर हाउस परिक्षेत्र के महीपत ने बताया कि उनकी रीडिंग कम है लेकिन बिल ज्यादा आया है। मोबाइल पर 5000 का मेसेज मिला। जबकि इतना बिल कभी नहीं आता। अब बिल सही कराने के लिए अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
केस नंबर तीन
नगरिया कुआं निवासी अशोक, फूलमती का भी कहना है कि घर पर कोई मीटर रीडर नहीं आया। अपने मन मुताबिक बिजली का बिल 3000 बनाकर भेज दिया। जब मीटर की रीडिंग से मिलान किया, रीडिंग कम थी, लेकिन बिल ज्यादा।
जिन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बिजली बिल ज्यादा या मीटर रीडिंग के अनुसार आ रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। इसके बाद मामला सही पाए जाने पर संबंधित क्षेत्र के मीटर रीडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - डी. यादवेंदु , अधिशासी अभियंता