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घनघनाहट से तनाव में पुलिसकर्मी, रातों की उड़ी नींद

Mon, 24 Feb 2020 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 01:21 AM IST
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mental stress
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झांसी। दिन के 24 घंटे में से 12 घंटे मोबाइल फोन घनघनाने के साथ ही दिन भर चीखने वाले वायरलेस सेट से चिपके रहने से पुलिसकर्मी भारी मानसिक तनाव झेल रहे हैं। मोबाइल फोन के चलन के कारण दिन का चैन और रात की नींद उड़ने लगी है।
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जिले में पुलिस के पास दो-दो मोबाइल फोन हैं। इनमें एक सीयूजी सुविधा का सरकारी फोन शामिल है। इसके अलावा ड्यूटी के दौरान वायरलेस सेट होना भी अनिवार्य है। जिससे हर समय संदेश प्रसारित होते हैं। आला अफसर हों या सिपाही सभी को इन संचार माध्यमों से जुड़े रहना मजबूरी बन गई है, लेकिन संचार के ये आधुनिक उपकरण पुलिसकर्मियों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रहे हैं। इसके नतीजे मेडिकल जांच में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन दस से पंद्रह पुलिसकर्मी इलाज करा रहे हैं। दिगामी बोझ से किसी को हार्ट की परेशानी, ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी बीमारियां जकड़ रही हैं। अधिकांश तो हृदय रोग व मानसिक रोग का भी इलाज करा रहे हैं।
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सौ कॉल रोजाना
पुलिसकर्मियों के मुताबिक सुबह से रात तक रोजाना वे करीब 100 से अधिक फोन कॉल्स रिसीव करते हैं। इसके अतिरिक्त वायरलेस सेट से संपर्क में बने रहते हैं। सेट पर रोजाना करीब सौ बार संदेश देना पड़ता है। कभी-कभी आधी रात को भी लोग फोन करने में गुरेज नहीं करते। इससे झुंझलाहट भी पैदा हो रही है।
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सुनने व जवाब देने में गुजर जाती रात
पुलिसकर्मी बताते हैं कि उनकी दिनचर्या सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती है और देर रात बजे तक वे लगातार सेट व मोबाइल फोन दोनों के जरिए कम्युनिकेशन करते रहते हैं। औसतन इन 12 घंटों में करीब 6 घंटे उनके सेल फोन रिसीव करने, कॉल बैक करने में गुजर जाते हैं। कभी-कभी गंभीर घटना होने पर रात 3 व सुबह 4 बजे भी फोन रिसीव करना पड़ता है।

लगातार फोन व सेट के संपर्क में रहने से पुलिसकर्मी में चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। इससे उनको कई तरह की बीमारियोें की चपेट में आ रहे हैं। अवसाद बढ़ने पर ब्लड प्रेशर, शुगर की समस्या हो रही है। जीवन शैली में बदलाव लाना बहुत जरूरी है।
डॉ. रामबाबू, मेडिसन विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज
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