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जालसाजों ने पांच सालों से मेडिकल कॉलेज को बना रखा ठगी का अड्डा
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र की युवती से हुई ठगी कोई पहला मामला नहीं है। बल्कि, पिछले पांच सालों से कॉलेज बुलाकर छात्रों को ठगा जा रहा है। कर्मचारियों को लालच देकर जालसाज कमरा खुलवाते हैं। खुद अधिकारी बनकर छात्रों को विश्वास में लेते हैं। बाद में लाखों लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं। पिछले कुछ मामलों में जालसाजों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
किसी न किसी कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर बड़ा रैकेट काम कर रहा है। आशंका है कि इस रैकेट से झांसी मेडिकल कॉलेज का भी कोई न कोई सदस्य जुड़ा हुआ है। पिछले दो साल कोरोना काल के छोड़ दें तो उससे पहले 2018 से लगातार ये मामले सामने आते रहे। किसी से साढ़े आठ लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक की ठगी की गई। अब फिर से महाराष्ट्र की युवती को पूल कोटे के नाम पर पांच लाख रुपये की ठगी की गई है। कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। सोमवार तक समिति अपनी रिपोर्ट कॉलेज प्राचार्य को सौंपा सकती है।
ये मामले सामने आ चुके
केस-1
वर्ष 2018 में ठगों ने कर्नाटका की ईश्वर रेड्डी की पुत्री निगमा से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। 25 अगस्त 2018 को छात्रा और उसके परिजनों को मेडिकल कॉलेज बुलाया गया। वहां ओपीडी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर एक डॉक्टर के ऑफिस में ही छात्रा के प्रवेश से संबंधित सभी फॉर्म भरवाए गए। एक होटल में छात्रों के परिजनों ने जालसाजों को 20 लाख रुपये दिए। बाद में प्रवेश न होने पर छात्रा व उसके परिजनों को ठगी का अहसास हुआ। छात्रा अपने परिजनों के साथ मामले की शिकायत करने मेडिकल कॉलेज आई थी। शिकायत पर नवाबाद पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले में बंगलूरू में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
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केस-2
वर्ष 2019 में मथुरा निवासी वीर सिंह के पुत्र विष्णु से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर 8.5 लाख की ठगी हुई थी। कंसल्टेंसी की ओर से बात करने वाले जालसाज ने विष्णु को सरकारी नामित कोटे से सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने की बात कही। अगस्त 2019 में युवक को नोएडा के सेक्टर 62 स्थित कंसल्टेंसी कार्यालय बुलाया। युवक को बातचीत कर जाल में फंसाया। तीन अगस्त को युवक को झांसी मेडिकल कॉलेज बुलाया। चर्म रोग विभाग में एक जालसाज अधिकारी बनकर बैठ गया। युवक का विश्वास जीतने के बाद रुपये लेकर फॉर्म भरवाया। एमसीआई और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्रवेश के लिए मिला अनुमति पत्र दिखाया। इसमें मोहर भी लगी हुई थीं। यह सब फर्जी था। इस मामले का बाद में खुलासा हुआ।
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किसी न किसी कोटे से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने के नाम पर बड़ा रैकेट काम कर रहा है। आशंका है कि इस रैकेट से झांसी मेडिकल कॉलेज का भी कोई न कोई सदस्य जुड़ा हुआ है। पिछले दो साल कोरोना काल के छोड़ दें तो उससे पहले 2018 से लगातार ये मामले सामने आते रहे। किसी से साढ़े आठ लाख से लेकर 20 लाख रुपये तक की ठगी की गई। अब फिर से महाराष्ट्र की युवती को पूल कोटे के नाम पर पांच लाख रुपये की ठगी की गई है। कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। सोमवार तक समिति अपनी रिपोर्ट कॉलेज प्राचार्य को सौंपा सकती है।
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ये मामले सामने आ चुके
केस-1
वर्ष 2018 में ठगों ने कर्नाटका की ईश्वर रेड्डी की पुत्री निगमा से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। 25 अगस्त 2018 को छात्रा और उसके परिजनों को मेडिकल कॉलेज बुलाया गया। वहां ओपीडी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर एक डॉक्टर के ऑफिस में ही छात्रा के प्रवेश से संबंधित सभी फॉर्म भरवाए गए। एक होटल में छात्रों के परिजनों ने जालसाजों को 20 लाख रुपये दिए। बाद में प्रवेश न होने पर छात्रा व उसके परिजनों को ठगी का अहसास हुआ। छात्रा अपने परिजनों के साथ मामले की शिकायत करने मेडिकल कॉलेज आई थी। शिकायत पर नवाबाद पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले में बंगलूरू में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
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केस-2
वर्ष 2019 में मथुरा निवासी वीर सिंह के पुत्र विष्णु से मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर 8.5 लाख की ठगी हुई थी। कंसल्टेंसी की ओर से बात करने वाले जालसाज ने विष्णु को सरकारी नामित कोटे से सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने की बात कही। अगस्त 2019 में युवक को नोएडा के सेक्टर 62 स्थित कंसल्टेंसी कार्यालय बुलाया। युवक को बातचीत कर जाल में फंसाया। तीन अगस्त को युवक को झांसी मेडिकल कॉलेज बुलाया। चर्म रोग विभाग में एक जालसाज अधिकारी बनकर बैठ गया। युवक का विश्वास जीतने के बाद रुपये लेकर फॉर्म भरवाया। एमसीआई और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्रवेश के लिए मिला अनुमति पत्र दिखाया। इसमें मोहर भी लगी हुई थीं। यह सब फर्जी था। इस मामले का बाद में खुलासा हुआ।