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मनमाने तरीके से बना दी सड़क, भुगतान भी कर दिया
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झांसी। मनरेगा के कामों की निगरानी में लापरवाही बरती गई। इसी के चलते कई काम मानक के विपरीत ही करा दिए गए। अब टीएसी की जांच में लगातार गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं। बामौर ब्लॉक के सेमरी गांव में सीसी सड़क निर्माण में मानक के विपरीत निर्माण कराने के साथ ही भुगतान भी कर दिया गया। टीएसी जांच में ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी एवं तकनीकी सहायक को इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
मनरेगा के जरिए करोड़ों रुपये के काम कराए गए लेकिन, इनकी समुचित निगरानी न होने से बड़ी संख्या में अनियमितताएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कच्चे काम के साथ ही पक्के काम में भी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई। बामौर के सेमरी गांव में सीसी मार्ग निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत मिली। इसकी मंडलीय प्रविधिक परीक्षक (टीएसी) से तकनीकी जांच कराई गई। शिकायत में बताया गया कि गांव में भगीरथ के मकान से रजनीश के बोर तक 398700 रुपये से सीसी रोड निर्माण कराया, जिसमें मानक के विपरीत कार्य कराए गए। करीब तीन माह बाद कुछ दिन पहले जांच पूरी हुई, इसमें कार्य के मानक के विपरीत होने की पुष्टि हुई। टीएसी ने इस मामले में सेमरी ग्राम प्रधान शिवा देवी, ग्राम विकास अधिकारी वीर सिंह यादव, तकनीकी सहायक भगवती शरण कौशिक को गड़बड़ी का आरोपी मानते हुए उनके साथ वसूली की संस्तुति की है।
दरियादिली का फायदा उठा रहे मनरेगा सेल के अफसर
पिछले एक वर्ष के भीतर मनरेगा के काम में लाखों रुपये का घपला उजागर हो चुका। कुछ दिनों पहले बामौर ब्लॉक में 12 से अधिक गांवों में व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत बिना काम कराए ही लाखों रुपये का भुगतान करने के मामले का भी खुलासा हुआ। लेकिन, उसके बावजूद इस पूरी योजना की निगरानी के लिए तैनात किए गए मनरेगा सेल के अफसरों की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। लाखों रुपये के घपले लगातार उजागर होने के बावजूद सिर्फ तकनीकी सहायक को निपटाकर सेल के आला अफसर को बचा लिया जाता है। मनरेगा में तमाम घपलों के उजागर होने के बाद भी उपायुक्त से कोई सवाल-जवाब तलब नहीं हुआ।
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मनरेगा के जरिए करोड़ों रुपये के काम कराए गए लेकिन, इनकी समुचित निगरानी न होने से बड़ी संख्या में अनियमितताएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कच्चे काम के साथ ही पक्के काम में भी वित्तीय गड़बड़ी पाई गई। बामौर के सेमरी गांव में सीसी मार्ग निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत मिली। इसकी मंडलीय प्रविधिक परीक्षक (टीएसी) से तकनीकी जांच कराई गई। शिकायत में बताया गया कि गांव में भगीरथ के मकान से रजनीश के बोर तक 398700 रुपये से सीसी रोड निर्माण कराया, जिसमें मानक के विपरीत कार्य कराए गए। करीब तीन माह बाद कुछ दिन पहले जांच पूरी हुई, इसमें कार्य के मानक के विपरीत होने की पुष्टि हुई। टीएसी ने इस मामले में सेमरी ग्राम प्रधान शिवा देवी, ग्राम विकास अधिकारी वीर सिंह यादव, तकनीकी सहायक भगवती शरण कौशिक को गड़बड़ी का आरोपी मानते हुए उनके साथ वसूली की संस्तुति की है।
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दरियादिली का फायदा उठा रहे मनरेगा सेल के अफसर
पिछले एक वर्ष के भीतर मनरेगा के काम में लाखों रुपये का घपला उजागर हो चुका। कुछ दिनों पहले बामौर ब्लॉक में 12 से अधिक गांवों में व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत बिना काम कराए ही लाखों रुपये का भुगतान करने के मामले का भी खुलासा हुआ। लेकिन, उसके बावजूद इस पूरी योजना की निगरानी के लिए तैनात किए गए मनरेगा सेल के अफसरों की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। लाखों रुपये के घपले लगातार उजागर होने के बावजूद सिर्फ तकनीकी सहायक को निपटाकर सेल के आला अफसर को बचा लिया जाता है। मनरेगा में तमाम घपलों के उजागर होने के बाद भी उपायुक्त से कोई सवाल-जवाब तलब नहीं हुआ।
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