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विद्यार्थियों ने बनाया पिरामिड और बजरंगी आसन
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रस्सी पर रोव मल्लखंभ का प्रदर्शन करतीं छात्राएं।
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झांसी। माध्यमिक शिक्षा विभाग की दो दिवसीय प्रादेशिक मल्लखंभ प्रतियोगिता का शुभारंभ लक्ष्मी व्यायाम मंदिर के जिमभनेजियम हॉल में हुआ। इसमें खिलाड़ियों ने मल्लखंभ के कई रोमांचकारी आसन बनाए। इनमें पिरामिड, बजरंगी, गुरु पकड़, हनुमान ध्वज आदि रहे।
देश की प्राचीन खेल विद्या मल्लखंभ की इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों में गुरुदत्त रिछारिया ने पोल पर हनुमान ध्वज, चकौर आसन, गोविंद ने मयूर पंखी, तीर आसन, एक हत्थी, अंकित आर्या ने हाफ आर्म, रस्सी पर राधा ने नटराज, पद्मासन, खुशी ने गुरु पकड़, बजरंगी, निंद्रासन आदि को प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में झांसी मंडल के साथ ही चित्रकूट मंडल भी प्रतिभाग कर रहा है।
इससे पहले शुभारंभ में वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश शासन से मांग की, कि मल्लखंभ के विकास के लिए इसे अनुदान सूची में शामिल किया जाए। इस अवसर पर गजानन खानवलकर, पवन ओझा, प्रधानाचार्य अरविंद ओझा, राम सिंह सिकौरिया, रघुवीर रावत, अजय रजक, संजीव त्रिपाठी, कामिनी कुशवाहा, अखिलेश ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।
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मल्लखंभ हमारे देश की प्राचीन खेल विद्या है। इसमें पारंगत होने के लिए वह नियमित अभ्यास करती हूं।
खुशी कुशवाहा
आज कई परिवार अपने बच्चों को मल्लखंभ सिखा रहे हैं। झांसी ने कई खिलाड़ी इस खेल में दिए हैं।
काजल कुशवाहा
मल्लखंभ में निंद्रासन, क्रास, बजरंगी का रोज अभ्यास करती हूं। यह खेल शरीर को फिट रखता है।
हिमांशी
सभी मौसमों में मल्लखंभ को खेला जाता है। इस खेल के माध्यम से शरीर पूरी तरह से दुरस्त रहता है।
गुरुदत्त रिछारिया
मल्लखंभ का खेल संतुलन का है। रस्सी, पोल पर पकड़ और संतुलन अच्छा है, तो कोई आसन बना सकते हैं।
अंकित आर्य
रोज दो से तीन घंटे पोल व रस्सी पर अभ्यास करता हूं। इस खेल को बढ़ावा देना खिलाड़ियों के हित में जरूरी है।
गोविंद
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देश की प्राचीन खेल विद्या मल्लखंभ की इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों में गुरुदत्त रिछारिया ने पोल पर हनुमान ध्वज, चकौर आसन, गोविंद ने मयूर पंखी, तीर आसन, एक हत्थी, अंकित आर्या ने हाफ आर्म, रस्सी पर राधा ने नटराज, पद्मासन, खुशी ने गुरु पकड़, बजरंगी, निंद्रासन आदि को प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में झांसी मंडल के साथ ही चित्रकूट मंडल भी प्रतिभाग कर रहा है।
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इससे पहले शुभारंभ में वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश शासन से मांग की, कि मल्लखंभ के विकास के लिए इसे अनुदान सूची में शामिल किया जाए। इस अवसर पर गजानन खानवलकर, पवन ओझा, प्रधानाचार्य अरविंद ओझा, राम सिंह सिकौरिया, रघुवीर रावत, अजय रजक, संजीव त्रिपाठी, कामिनी कुशवाहा, अखिलेश ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।
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मल्लखंभ हमारे देश की प्राचीन खेल विद्या है। इसमें पारंगत होने के लिए वह नियमित अभ्यास करती हूं।
खुशी कुशवाहा
आज कई परिवार अपने बच्चों को मल्लखंभ सिखा रहे हैं। झांसी ने कई खिलाड़ी इस खेल में दिए हैं।
काजल कुशवाहा
मल्लखंभ में निंद्रासन, क्रास, बजरंगी का रोज अभ्यास करती हूं। यह खेल शरीर को फिट रखता है।
हिमांशी
सभी मौसमों में मल्लखंभ को खेला जाता है। इस खेल के माध्यम से शरीर पूरी तरह से दुरस्त रहता है।
गुरुदत्त रिछारिया
मल्लखंभ का खेल संतुलन का है। रस्सी, पोल पर पकड़ और संतुलन अच्छा है, तो कोई आसन बना सकते हैं।
अंकित आर्य
रोज दो से तीन घंटे पोल व रस्सी पर अभ्यास करता हूं। इस खेल को बढ़ावा देना खिलाड़ियों के हित में जरूरी है।
गोविंद