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मकर संक्रांति: पर्व एक, नाम और परंपराएं अलग-अलग

Mon, 10 Jan 2022 12:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jan 2022 12:57 AM IST
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Makar Sankranti: One festival, different names and traditions
झांसी। मकर संक्रांति पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस त्योहार को लेकर घरों और मंदिरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। आमतौर पर इस त्योहार पर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। मगर खास बात यह है कि इस त्योहार को अलग-अलग समाज अपनी-अपनी परंपराओं से मनाते हैं। मराठी समाज में सुहागिन महिलाओं को खिचड़ी के साथ सुहाग की सामग्री दी जाती है, तो वहीं बंगाली समाज कुलदेवता और देवी की पूजा कर भगवान श्रीकृष्ण को गोकुल पीठे का प्रसाद अर्पण करते हैं। मलयालम समाज में भगवान स्वामी अयप्पा का विशेष पूजन होता है, तो सिंधी समाज की परंपरा भी अलग है।
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पांच और 13 डबलियों में देते हैं सुहाग सामग्री
महाराष्ट्र समाज में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद मिट्टी की डबलियों में जो पांच अथवा 13 की संख्या में होती है, में खिचड़ी, मौसमी फल, तिल के लड्डू रखकर हल्दी, कुमकुम और अन्य सुहाग की सामग्री के साथ सुहागिन महिलाओं को देने की परंपरा है। इनमें एक डबलिया घर में तथा दूसरी मंदिर में भी रखी जाती है। समाज के सह पुरोहित उज्जवल देवधर के अनुसार मकर संक्रांति पर नव विवाहिता गहरे रंग के कपड़े पहनती है।
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बंगाली समाज मनाता है पौष पर्वन
बंगाली समाज में मकर संक्रांति का त्योहार पौष पर्वन के नाम से जाना जाता है। इस दिन सभी लोग घरों में कुल देवता व कुल देवी की विधि विधान से पूजा करते हैं। त्योहार के लगभग सभी व्यंजन चावल से बने होते हैं। इनमें खजूर के गुड़ का उपयोग होता है। व्यंजनों में पूली पीठे, गोकुल पीठे, पाटी सप्टा आदि बनते है। बांधव समिति के सांस्कृतिक सचिव रवि शंकर चटर्जी के अनुसार यह त्योहार 15 जनवरी को मनेगा।
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दक्षिण भारतीय व्यंजन का बंटता है प्रसाद
महानगर का मलयाली समाज 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाएगा। श्री अयप्पा मंदिर पूजा समिति के तत्वावधान में सीपरी के अयप्पा मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान होगी। इसमें श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय व्यंजनों के प्रसाद का आनंद प्राप्त होगा। समिति के सचिव केवी कृष्ण कुमार के अनुसार मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त से पूजा शुरू हो जाएगी, जो देर शाम तक चलेगी।

सिंधी समाज करता है कन्या का पूजन
मकर संक्रांति का पर्व सिंधी समाज में तिर मूरी के नाम से जाना जाता है। इस दिन समाज के लोग कन्याओं की घरों में पूजा कर उन्हें तिल की गजक देते हैं। त्योहार का खास व्यंजन मैथी, मटर, गोभी आदि से बनने वाला पुलाव है। पूज्य सिंधी पंचायत शहर के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैनवानी ने बताया कि मकर संक्रांति का त्योहार 15 को मनेगा। पर्व पर पंचायत भवन के मंदिर में सभी लोग भगवान झूलेलाल का आशीर्वाद लेने जाते है।
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