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पहाड़ी काटकर कब्जे हो रहे, अफसर सो रहे

Fri, 16 Nov 2018 02:00 AM IST
jhansi
jhansi Updated Fri, 16 Nov 2018 02:00 AM IST
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mafia cut mountain, oficcer sleeped
cut mountain in karguan - फोटो : amarujala
 दबंग और जमीन कारोबारी कैमासिन की पहाड़ी काटकर रातों रात मालामाल हो रहे हैं। वह पहाड़ी के आगे के कुछ हिस्से की रजिस्ट्री करते हैं और प्लाट के खरीदार को सलाह देते हैं कि पीछे का हिस्सा जेसीबी से काट लेना, सब तुम्हारा है। इसी लालच में प्लाट के खरीदार पहाड़ी काटते चले जा रहे हैं। लेकिन, न तो उनकी ओर जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही किसी जिम्मेदार अफसर का। नतीजा, एक तो प्राकृतिक सुंदरता नष्ट हो रही है और दूसरे महानगर का अनियोजित विकास हो रहा है।
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मेडिकल कॉलेज के सामने करगुवां जाने वाली सड़क के दाहिने ओर पहाड़ी है, जो कैमासिन मंदिर की पहाड़ी के नाम से जानी जाती है। इस पहाड़ी के दूसरी ओर मकान बन रहे हैं। खास बात यह है कि इन मकानों का नक्शा स्वीकृत नहीं होता है, लेकिन बिना रोकटोक धड़ल्ले से मकान बनाने का कारोबार चल रहा है। पहाड़ी की वजह से यहां पर प्राकृतिक सुंदरता निहारते ही बनती थी, लेकिन धीरे-धीरे पहाड़ी काटकर मैदान बना दिया गया और इस मैदान में मकान खड़े हो गए।
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तत्कालीन मंडलायुक्त सत्यजीत ठाकुर ने मार्च 2013 में करगुंवा में जमीन का सीमांकन कराने के लिए तत्कालीन अपर आयुक्त (न्याय) रामावतार के नेतृत्व में नगर निगम, जेडीए, तहसील प्रशासन की टीम गठित की थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला और पहाड़ी पर बराबर मकान बनते रहे। उन्होंने जमीनों के इस अवैध कारोबार के खेल पर रोक लगाने के लिए नगर निगम, झांसी विकास प्राधिकरण और तहसील से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना जमीन की रजिस्ट्री पर भी रोक लगा दी है। साथ ही, मकान का नक्शा पास कराए बिना बिजली का कनेक्शन देने पर रोक लगा दी है। कुछ दिनों तक तो आदेश पर अमल हुआ, जिससे जमीन के अवैध कारोबारियों की दुकानें बंद हो गईं, लेकिन उनका तबादला होते ही फिर से जमीन के कारोबारी सक्रिय हो गए और यह खेल आज भी धड़ल्ले से चल रहा है।
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जांच करा रहे
कैमासन मामले की जांच जिला खान अधिकारी मो. महबूब और डिप्टी कलेक्टर दीपक कुमार को सौंपी गई है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।
- नगेंद्र शर्मा, अपर जिलाधिकारी

जमीन के लिए तहसील व नगर निगम के चक्कर लगा रही महिला
मौजा नयागांव में आराजी नंबर 327 और 329 में आईटीआई के पास रहने वाली महिला किसान कुसुमा यादव और नगर निगम की जमीन है। महिला तहसील दिवस और नगर निगम में तीन- तीन आवेदन पत्र देकर अपनी जमीन का बंटवारा कराने की मांग कर चुकी है, लेकिन नगर निगम से उक्त महिला को आज-कल कहकर टरकाया जा रहा है। जबकि, नगर निगम की इस जमीन का बंटवारा हो चुका है, जमीनों में रंग भरा हुआ है। इसके बाद भी महिला को परेशान किया जा रहा है। ऐसे अनेक मामले हैं, जिनमें नगर निगम व काश्तकार की जमीन का आराजी नंबर एक है। यदि काश्तकार की जमीन अलग छोड़ दी जाए तो उसे बेवजह परेशान नहीं होना पड़ेगा। लेकिन, ऐसा हो गया तो जिम्मेदार अफसरों की ‘दुकानें’ बंद हो जाएंगी।
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