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लॉकडाउन में बदल गया मिजाज, घर के काम में बंटा रहे हाथ
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सदर बाजार निवासी नरेंद्र कौशिक रसोई में बर्तन मांजते हुए।
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झांसी। जिले में लॉकडाउन के दौरान घर में बंद लोग तरह-तरह के काम कर रहे हैं। कोई रसोई में बर्तन मांज रहा है, तो किसी का वक्त बागवानी संवारने में बीत रहा है। आलम यह है कि लॉकडाउन में तमाम पुरुषों खाना बनाने में किचिन किंग बन गए हैं। इसके साथ ही लॉकडाउन में नौकर-नौकरानी की छुट्टी कर दी गई है, तो सफाई समेत तमाम काम परिवार के सदस्य मिलकर कर रहे हैं। इन सब कामों को परिवार के लोग जमकर इंजॉय कर रहे हैं और घरों का माहौल खुशनुमा बना हुआ है।
खोया पनीर और रसगुल्ले बनाना सीख लिया
सदर बाजार निवासी रेलवे कर्मचारी नरेंद्र कौशिक घर में तमाम कामों में हाथ बंटा रहे हैं। वे रसोई में बर्तन साफ करने में पत्नी की मदद कर देते हैं, तो कभी पकवान बनाकर परिवार के लोगों का जायका बदलते हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन के चलते पूरा वक्त परिवार के साथ बीत रहा है। रसोई में अब तक खोया पनीर, मटर पनीर और रसगुल्ले बनाना सीख गए हैं। इसके अलावा तमाम कामों में मदद कर देते हैं।
चाय-कॉफी बनाकर कर रहे मदद
बीएचईएल निवासी मूर्तिकार जगदीश लाल भी लॉकडाउन के वक्त को परिवार के साथ खुशी से बिता रहे हैं। पत्नी की मदद के लिए रसोई में चाय-कॉफी बनाने का जिम्मा संभाला हुआ है। इसके साथ ही कभी-कभी खिचड़ी और दाल चावल बना देेते हैं। इसके साथ ही खाली वक्त में वे घर की बागवानी को संवार रहे हैं। वे कहते हैं कि रसोई में काम करने में अच्छा लगता है।
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बागवानी को दिया नया रूप
सीपरी बाजार निवासी प्रधानाचार्य जीएस भोगल ने लॉकडाउन में अपने घर की बागवानी को संवारा है। पत्नी के साथ वे सुबह-सुबह बागवानी में लगे पौधों के सूखे पत्ते को हटाकर उनको संरक्षित करते हैं। वे बताते हैं कि पहले इतना समय कभी मिला नहीं। पत्नी ही बागवानी और पौधों की रखवाली करती थीं। अब लॉकडाउन में पौधों को संवार रहा हूं। पर्यावरण संरक्षण भी बहुत जरूरी है।
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खोया पनीर और रसगुल्ले बनाना सीख लिया
सदर बाजार निवासी रेलवे कर्मचारी नरेंद्र कौशिक घर में तमाम कामों में हाथ बंटा रहे हैं। वे रसोई में बर्तन साफ करने में पत्नी की मदद कर देते हैं, तो कभी पकवान बनाकर परिवार के लोगों का जायका बदलते हैं। वे बताते हैं कि लॉकडाउन के चलते पूरा वक्त परिवार के साथ बीत रहा है। रसोई में अब तक खोया पनीर, मटर पनीर और रसगुल्ले बनाना सीख गए हैं। इसके अलावा तमाम कामों में मदद कर देते हैं।
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चाय-कॉफी बनाकर कर रहे मदद
बीएचईएल निवासी मूर्तिकार जगदीश लाल भी लॉकडाउन के वक्त को परिवार के साथ खुशी से बिता रहे हैं। पत्नी की मदद के लिए रसोई में चाय-कॉफी बनाने का जिम्मा संभाला हुआ है। इसके साथ ही कभी-कभी खिचड़ी और दाल चावल बना देेते हैं। इसके साथ ही खाली वक्त में वे घर की बागवानी को संवार रहे हैं। वे कहते हैं कि रसोई में काम करने में अच्छा लगता है।
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बागवानी को दिया नया रूप
सीपरी बाजार निवासी प्रधानाचार्य जीएस भोगल ने लॉकडाउन में अपने घर की बागवानी को संवारा है। पत्नी के साथ वे सुबह-सुबह बागवानी में लगे पौधों के सूखे पत्ते को हटाकर उनको संरक्षित करते हैं। वे बताते हैं कि पहले इतना समय कभी मिला नहीं। पत्नी ही बागवानी और पौधों की रखवाली करती थीं। अब लॉकडाउन में पौधों को संवार रहा हूं। पर्यावरण संरक्षण भी बहुत जरूरी है।

बीएचईएल निवासी जगदीश लाल रसोई में सब्जी काटते हुए।