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आबकारी महकमे को दस करोड़ की चपत
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झांसी। कोरोना कर्फ्यू के दौरान बंद चल रहीं शराब की दुकानों के चलते जनपद से आबकारी विभाग को करीब दस करोड़ की चपत सहनी पड़ी। हालांकि ग्यारह मई से दुकानें फिर खुल गईं, लेकिन करीब दस दिनों तक दुकान बंदी की वजह से हुए एक्साइज ड्यूटी के नुकसान की भरपाई कर पाना अब अफसरों के भी वश में भी नहीं रहा।
पूरे प्रदेश में शराब की दुकानें पंचायत चुनाव की मतगणना की वजह से एक मई को बंद कर दी गई थीं। उसके बाद से सरकार ने कोरोना कर्फ्यू का एलान कर दिया। कर्फ्यू पहले दस मई तक के लिए तय हुआ, उसे बाद में 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस बीच शराब की दुकानें भी पूरी तरह बंद कर दी गईं। उधर, शासन की गाइडलाइन में शराब की दुकानों की बंदी को लेकर कोई बात नहीं कही गई। लाइसेंस फीस के साथ ही एक्साइज ड्यूटी को हो रहे नुकसान को देखते हुए 11 मई से दुकानें खोल दी गईं लेकिन, तब तक आबकारी विभाग को मोटी चपत लग गई।
जनपद में शराब की कुल 438 दुकानें हैं। सामान्य तौर पर औसतन प्रतिदिन 1.25 करोड़ रुपये की शराब बिक्री होती है। इसी तरह औसतन करीब 1 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी आबकारी विभाग को मिलती है, लेकिन दुकानें बंद होने से एक्साइज ड्यूटी शून्य हो गई। इस नुकसान से बचने के लिए ही सरकार ने इशारों-इशारोें में जिलाधिकारियों को तत्काल शराब की दुकान खोलने को कह दिया था।
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कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज
कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने शुक्रवार को पोले बाबा, हड्डीघर, ताज कंपाउंड, पहुंज नदी, फिल्टर चौराहा, रेलवे क्रासिंग, कांशीराम पार्क, रामजानकी पेट्रोल पंप के आसपास छापेमारी की। डीओ प्रमोद गोयल के मुताबिक इस दौरान दो मामले दर्ज किए गए। 50 लीटर कच्ची शराब भी बरामद की गई। टीम में आबकारी निरीक्षक शिशुपाल सिंह, अमित कुमार समेत अन्य मौजूद रहे।
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पूरे प्रदेश में शराब की दुकानें पंचायत चुनाव की मतगणना की वजह से एक मई को बंद कर दी गई थीं। उसके बाद से सरकार ने कोरोना कर्फ्यू का एलान कर दिया। कर्फ्यू पहले दस मई तक के लिए तय हुआ, उसे बाद में 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस बीच शराब की दुकानें भी पूरी तरह बंद कर दी गईं। उधर, शासन की गाइडलाइन में शराब की दुकानों की बंदी को लेकर कोई बात नहीं कही गई। लाइसेंस फीस के साथ ही एक्साइज ड्यूटी को हो रहे नुकसान को देखते हुए 11 मई से दुकानें खोल दी गईं लेकिन, तब तक आबकारी विभाग को मोटी चपत लग गई।
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जनपद में शराब की कुल 438 दुकानें हैं। सामान्य तौर पर औसतन प्रतिदिन 1.25 करोड़ रुपये की शराब बिक्री होती है। इसी तरह औसतन करीब 1 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी आबकारी विभाग को मिलती है, लेकिन दुकानें बंद होने से एक्साइज ड्यूटी शून्य हो गई। इस नुकसान से बचने के लिए ही सरकार ने इशारों-इशारोें में जिलाधिकारियों को तत्काल शराब की दुकान खोलने को कह दिया था।
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कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज
कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने शुक्रवार को पोले बाबा, हड्डीघर, ताज कंपाउंड, पहुंज नदी, फिल्टर चौराहा, रेलवे क्रासिंग, कांशीराम पार्क, रामजानकी पेट्रोल पंप के आसपास छापेमारी की। डीओ प्रमोद गोयल के मुताबिक इस दौरान दो मामले दर्ज किए गए। 50 लीटर कच्ची शराब भी बरामद की गई। टीम में आबकारी निरीक्षक शिशुपाल सिंह, अमित कुमार समेत अन्य मौजूद रहे।