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लेखपालों की हड़ताल से जनता के काम धड़ाम

Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 01:36 AM IST
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Leckpal strike, people all work stop
झांसी। मोंठ के ग्राम भरोसा में रहने वाले राजकुमार ने खेत की हदबंदी के लिए आवेदन किया था। कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ रही थी, लेकिन काम पूरा होने के पहले ही लेखपालों की हड़ताल शुरू हो गई। अब वे रोजाना तहसील के चक्कर काट रहे हैं, परंतु काम जहां का तहां लटका हुआ है। ये केवल एक व्यक्ति की ही परेशानी नहीं है, बल्कि लेखपालों की हड़ताल की वजह से जिले में हजारों लोगों के काम अटक कर रह गए हैं। इसके अलावा अन्य सरकारी कामकाज भी प्रभावित बने हुए हैं।
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किसानों को खसरा जारी करना हो या जमीन की पैमाइश का मामला हो, राजस्व विभाग से जुड़े ज्यादातर काम लेखपालों के भरोसे पर ही हैं। लेकिन, 13 दिसंबर से हड़ताल पर हैं। इसका असर आम लोगों के कामकाज पर पड़ने लगा है। जिले में लगभग दस हजार लोगों के काम अटके हुए हैं। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। आईजीआरएस, तहसील व थाना दिवस में आने वाले तमाम शिकायतों के निस्तारण में भी दिक्कतें आ रही हैं। लोग अपना काम निपटवाने के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन यहां उनके हाथ मायूसी ही लग रही है। सभी को लेखपालों की हड़ताल खत्म होने का इंतजार है।
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लेखपाल संघ की झांसी इकाई के संरक्षक संतोष सिंह गौर ने कहा कि सरकार की जनता से सीधे तौर पर जुड़े 52 कार्य ऐसे हैं जो लेखपालों के बगैर संभव नहीं है। हड़ताल की वजह से जिले में दस हजार से अधिक लोगों के काम अटके हुए हैं। मांग पूरी न होने तक लेखपाल काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
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लोगों को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है। 75 लेखपाल हड़ताल से नाता तोड़कर काम पर वापस लौट आए हैं। इनके जरिये लोगों के काम निस्तारित किए जा रहे हैं। इसके अलावा राजस्व निरीक्षकों को भी लगाया गया है।
- बी प्रसाद, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)
ये 18 काम हैं अटके
वैसे तो लेखपालों के पास जनता से जुड़े लगभग 52 कार्य हैं, लेकिन इनमें से 18 काम ऐसे हैं, जिनका ज्यादातर लोगों को गाहे बगाहे वास्ता पड़ता रहता है। खासतौर पर ग्रामीणों का। इनमें खसरा तैयार करना, नामांतरण दर्ज कराना, पैमाइश करना, बंटवारा प्रस्ताव बनाना, आईजीआरएस, तहसील व थाना दिवस में आने वाले शिकायतों के निस्तारण में सहयोग करना, ठंड में अलाव व कंबल वितरण करना, आय, जाति व निवास प्रमाण पत्रों की जांच करना, हैसियत प्रमाण पत्रों की जांच करना, आवास सूची की जांच करना, पराली के संबंध में सूचना देना, गो आश्रय स्थलों की जांच व देखभाल करना, सामान्य वर्ग के आरक्षण की जांच कर रिपोर्ट तैयार करना, राजस्व वादों के निस्तारण में सहयोग करना, जमानत का सत्यापन करना आदि प्रमुख हैं।
जन सेवा केंद्र भी ठप
जन सेवा केंद्रों के जरिये मुख्य रूप से आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन दाखिल किए जाते हैं। इन पर लेखपालों की रिपोर्ट लगती है। इसके बाद ये प्रमाण पत्र तहसीलों द्वारा आवेदकों को जारी किए जाते हैं, लेकिन हड़ताल की वजह से ये बन नहीं पा रहे हैं। इससे जन सेवा केंद्रों का काम भी लगभग ठप पड़ा हुआ है।
खेत की हदबंदी के लिए आवेदन किया था। कार्यवाही शुरू हो गई थी, लेकिन काम पूरा होने के पहले लेखपाल हड़ताल पर चले गए, जिससे काम अटक कर रह गया है। हड़ताल से काम प्रभावित न हो, इसके इंतजाम किए जाएं।
- राजकुमार गुप्ता, ग्राम भरोसा
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था, इस पर लेखपाल की रिपोर्ट लगनी है, लेकिन हड़ताल पर होने की वजह से न तो अब तक जांच हुई और न ही रिपोर्ट लग पाई है। अब तो हड़ताल खत्म होने का इंतजार ही है।
- वीरेंद्र कुमार, ग्राम - टांडा
नियमानुसार आय, जाति प्रमाण पत्र पंद्रह दिन में जारी हो जाना चाहिए। लेकिन, पूरा महीने गुजरने वाला है। अब तक ये नहीं मिल पाए हैं। जबकि, इसके लिए लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं। बावजूद, ये नहीं मिल पा रहे हैं।
- जितेंद्र सिंह राजपूत, ग्राम - अटरिया
ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी सरकार योजना का आवेदन करने पर पहली रिपोर्ट उस पर लेखपाल की लगती है। लेखपाल की रिपोर्ट के बाद ही आवेदन आगे बढ़ता है, परंतु रिपोर्ट न लगने की वजह से आवेदन जहां के तहां पड़े हुए हैं।
- राजकुमार यादव, ग्राम - टांडा
जन सेवा केंद्रों पर आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र बनने के सबसे ज्यादा आवेदन आते हैं, लेकिन लेखपालों की रिपोर्ट न लगने की वजह से ये बन नहीं पा रहे हैं। आवेदक केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। केंद्र का काम लगभग ठप से बना हुआ है।

- कृष्णकांत अग्रवाल, जनसेवा केंद्र संचालक
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कामकाज की धुरी लेखपाल हैं। हड़ताल की वजह से ज्यादातर काम अटके हैं। इससे ग्रामीण परेशान हैं। वे तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन को किसी का काम न अटके इसके लिए समानांतर व्यवस्था बनानी चाहिए।
- प्रदीप यादव, अध्यक्ष - ग्राम प्रधान संगठन
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