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नेताओं की अंतर्कलह से डूबी सपा की लुटिया
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झांसी। जिले में समाजवादी पार्टी के कुनबे में दिग्गजों की भरमार है। पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और एमएलसी सपा के खेमे में हैं। बावजूद, जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में प्रत्याशी का टिक तक नहीं पाना कई सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी में नेताओं के बीच की अंतर्कलह को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
झांसी में समाजवादी पार्टी का खासा दबदबा रहा है। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट के अलावा महानगर को छोड़ बाकी जिले की तीनों विधानसभाओं में पार्टी अपना परचम फहरा चुकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर सपा का लंबे समय तक कब्जा रहा है। वर्तमान में पार्टी के खेमे में दो एमएलसी, एक पूर्व सांसद, दो पूर्व विधायक, दो पूर्व एमएलसी तथा दो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। ये सभी राजनीति का खासा अनुभव रखते हैं। बावजूद, ये सब मिलकर चुनाव लड़ाना तो दूर पार्टी के प्रत्याशी का नामांकन तक दाखिल नहीं करा पाए। इसकी बड़ी वजह पार्टी में हावी गुटबाजी बताई जा रही है। सपा झांसी में दो गुटों में बंटी हुई है। पार्टी के प्रदेश की सत्ता से बेदखल होने के अरसे बाद भी ये कम होने का नाम नहीं ले रही है। दोनों गुटों के नेता अपनी-अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि संगठन में एक गुट के बढ़ते दबदबे के चलते दूसरे गुट के नेता पंचायत चुनाव में रस्म अदायगी भर करते रहे। उनका यहां तक कहना है कि ये नेता भाजपा की सभी चालों से वाकिफ थे। बावजूद, उसकी काट करने या अपने अनुभव से चुनावी प्रबंधन करने से बचते रहे। हालांकि, इसकी जानकारी पहले से पार्टी नेतृत्व को भी है। लेकिन, नेतृत्व इन नेताओं की हरकतों को नजरअंदाज करता रहा। इसी का शर्मसार कर देने वाला नतीजा जिला पंचायत के नामांकन के दौरान सामने आया।
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झांसी में समाजवादी पार्टी का खासा दबदबा रहा है। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट के अलावा महानगर को छोड़ बाकी जिले की तीनों विधानसभाओं में पार्टी अपना परचम फहरा चुकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर सपा का लंबे समय तक कब्जा रहा है। वर्तमान में पार्टी के खेमे में दो एमएलसी, एक पूर्व सांसद, दो पूर्व विधायक, दो पूर्व एमएलसी तथा दो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। ये सभी राजनीति का खासा अनुभव रखते हैं। बावजूद, ये सब मिलकर चुनाव लड़ाना तो दूर पार्टी के प्रत्याशी का नामांकन तक दाखिल नहीं करा पाए। इसकी बड़ी वजह पार्टी में हावी गुटबाजी बताई जा रही है। सपा झांसी में दो गुटों में बंटी हुई है। पार्टी के प्रदेश की सत्ता से बेदखल होने के अरसे बाद भी ये कम होने का नाम नहीं ले रही है। दोनों गुटों के नेता अपनी-अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं। जानकारों का कहना है कि संगठन में एक गुट के बढ़ते दबदबे के चलते दूसरे गुट के नेता पंचायत चुनाव में रस्म अदायगी भर करते रहे। उनका यहां तक कहना है कि ये नेता भाजपा की सभी चालों से वाकिफ थे। बावजूद, उसकी काट करने या अपने अनुभव से चुनावी प्रबंधन करने से बचते रहे। हालांकि, इसकी जानकारी पहले से पार्टी नेतृत्व को भी है। लेकिन, नेतृत्व इन नेताओं की हरकतों को नजरअंदाज करता रहा। इसी का शर्मसार कर देने वाला नतीजा जिला पंचायत के नामांकन के दौरान सामने आया।
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