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184 मीटर भरा जाएगा लखेरी बांध, पूरा खाली होगा डूब क्षेत्र
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झांसी। मानसूनी सीजन में लखेरी बांध को 184 मीटर तक भरा जाएगा। डूब इलाके में आने वाले ग्राम रेवन, बचेरा एवं बुढ़ाई को खाली कराने को लेकर सिंचाई विभाग ने अलर्ट जारी किया है। सिंचाई विभाग के अनुसार यहां रहने वालों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था की जा चुकी, ऐसे में डूब वाले इलाका खाली करना होगा। वहीं, 182.64
मऊरानीपुर के लखेरी गांव के पास वर्ष 2003 से चौधरी चरण सिंह लखेरी बांध का निर्माण शुरू हुआ। इसकी मदद से ग्राम किशोरपुरा, तुर्क लहचूरा, कुटैरा समेत 36 गांवों की 3168 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाना है। पिछले वर्ष सिर्फ तीस फीसदी पानी ही भरा जा सका। इस वर्ष इसे बढ़ाकर साठ फीसदी करने की योजना है। अभी बांध 182.64 मीटर ऊंचाई तक भरा जा सका लेकिन, बांध को 184 मीटर तक भरा जाना है। डूब क्षेत्र के सभी गांव खाली करने होंगे। पूरी क्षमता से बांध भरने पर ग्राम बुढाई, रेवन, बचेेरा एवं किशोरपुरा डूब क्षेत्र में आ जाएगा। पिछले काफी समय से इनको खाली कराने का काम चल रहा है। बचेरा एवं रेवन गांव में अधिकांश काम पूरा हो गया। केवल बुढ़ाई में विवाद बना हुआ है। मुआवजा वितरित होने के बाद यहां कई परिवार विभाजित हो गए लेकिन, बांध का निर्माण पूरा न होने की वजह से वह इस इलाके में ही बसे रहे। अब जब गांव डूब इलाके में आ गया तब नए बने परिवार भी मुआवजा की मांग पर अड़ गए। वहीं, सिंचाई विभाग इसके लिए राजी नहीं। अभियंताओं का कहना है कि काश्तकारों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका। अब इनको मुआवजा नहीं दिया जा सकता। सिंचाई खंड पंचम परियोजना, अधिशासी अभियंता सिद्घार्थ सिंह के मुताबिक यह सभी इलाके डूब इलाके में शुमार कर लिए गए हैं। इसे खाली कराने को सार्वजनिक नोटिस भी जारी की जा चुकी।
पुनर्वास कॉलोनी में जाने को लोग राजी नहीं
सिंचाई विभाग भले इन गांव के लोगों को काफी पहले प्लॉट एवं पुनर्वास लाभ दिए जाने की बात कह रहा हो लेकिन, इनके पुनर्वास के लिए जिस कॉलोनी को बनाया गया है वहां अभी कई मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। कॉलोनी के भीतर आने- जाने का रास्ता कच्चा है। बारिश में यहां कीचड़ भर जाता है। ग्रामीणों का कहना है बिजली की यहां अच्छी व्यवस्था नहीं है हालांकि कुछ समय पहले ही यहां ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है। पास में बांध होने से यहां जलीय जंतुओं का भी खतरा बना रहता है। इन सब वजहों से लोग यहां जाने को राजी नहीं हैं।
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मऊरानीपुर के लखेरी गांव के पास वर्ष 2003 से चौधरी चरण सिंह लखेरी बांध का निर्माण शुरू हुआ। इसकी मदद से ग्राम किशोरपुरा, तुर्क लहचूरा, कुटैरा समेत 36 गांवों की 3168 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित किया जाना है। पिछले वर्ष सिर्फ तीस फीसदी पानी ही भरा जा सका। इस वर्ष इसे बढ़ाकर साठ फीसदी करने की योजना है। अभी बांध 182.64 मीटर ऊंचाई तक भरा जा सका लेकिन, बांध को 184 मीटर तक भरा जाना है। डूब क्षेत्र के सभी गांव खाली करने होंगे। पूरी क्षमता से बांध भरने पर ग्राम बुढाई, रेवन, बचेेरा एवं किशोरपुरा डूब क्षेत्र में आ जाएगा। पिछले काफी समय से इनको खाली कराने का काम चल रहा है। बचेरा एवं रेवन गांव में अधिकांश काम पूरा हो गया। केवल बुढ़ाई में विवाद बना हुआ है। मुआवजा वितरित होने के बाद यहां कई परिवार विभाजित हो गए लेकिन, बांध का निर्माण पूरा न होने की वजह से वह इस इलाके में ही बसे रहे। अब जब गांव डूब इलाके में आ गया तब नए बने परिवार भी मुआवजा की मांग पर अड़ गए। वहीं, सिंचाई विभाग इसके लिए राजी नहीं। अभियंताओं का कहना है कि काश्तकारों को पहले ही मुआवजा दिया जा चुका। अब इनको मुआवजा नहीं दिया जा सकता। सिंचाई खंड पंचम परियोजना, अधिशासी अभियंता सिद्घार्थ सिंह के मुताबिक यह सभी इलाके डूब इलाके में शुमार कर लिए गए हैं। इसे खाली कराने को सार्वजनिक नोटिस भी जारी की जा चुकी।
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पुनर्वास कॉलोनी में जाने को लोग राजी नहीं
सिंचाई विभाग भले इन गांव के लोगों को काफी पहले प्लॉट एवं पुनर्वास लाभ दिए जाने की बात कह रहा हो लेकिन, इनके पुनर्वास के लिए जिस कॉलोनी को बनाया गया है वहां अभी कई मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। कॉलोनी के भीतर आने- जाने का रास्ता कच्चा है। बारिश में यहां कीचड़ भर जाता है। ग्रामीणों का कहना है बिजली की यहां अच्छी व्यवस्था नहीं है हालांकि कुछ समय पहले ही यहां ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है। पास में बांध होने से यहां जलीय जंतुओं का भी खतरा बना रहता है। इन सब वजहों से लोग यहां जाने को राजी नहीं हैं।
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