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लक्ष्मण हुए मूर्छित, बिलख पड़े श्रीराम
amarujala
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:30 AM IST
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ramlila, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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श्री बाल युवक रामलीला नाट्य समिति बड़ा बाजार में बुधवार की रात लक्ष्मण-शक्ति व कुंभकरण वध की लीला का मंचन हुआ।
बुधवार को रामलीला के मंचन में श्रीराम द्वारा लंका पर आक्रमण किए जाने की योजना बनाई गई। सभी वानरों ने लंका को चारों ओर से घेर लिया तभी रावण की आज्ञानुसार मेघनाद युद्ध करने के लिए पहुंचा। उसकी मुलाकात हनुमान जी से हुई। लक्ष्मण के आने के बाद मेघनाद व लक्ष्मण संवाद प्रारंभ हुआ और लक्ष्मण ने मेघनाथ को युद्घ के लिए ललकारा। मेघनाद ने युद्घ के दौरान लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र से वार किया। ब्रह्मास्त्र के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं। हनुमान जी उन्हें वहां से उठाकर रामदल में ले आते हैं। वहां प्रभु राम लक्ष्मण की हालत को देखकर विलाप करने लगते हैं।
रामजी को विलाप करते देख जामवंत द्वारा लंका से सुखेन वैद्य को लाने की बात कही जाती है। हनुमानजी लंका जाकर वैद्य को ले आते हैं। लक्ष्मण को होश में लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने को कहते हैं। वैद्य संजीवनी बूटी द्वारा ही लक्ष्मणजी के उपचार करने की युक्ति बताने के साथ ही बताते सूर्योदय से पूर्व संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए निकलते हैं। रास्ते में कालनेमी नामक राक्षस साधु बनकर हनुमान जी से गुरूमंत्र लेने को कहता है। तालाब में स्नान करते वक्त एक मछली हनुमानजी को कालनेम की माया के बारे में बता देती है और हनुमान जी कालनेम की माया को समाप्त करते हैं। वह संजीवनी बूटी लेने पर्वत पर पहुंचते हैं।
संजीवनी बूटी न मिलने पर हनुमानजी पूरा पर्वत उठा लाते हैं। अयोध्या के ऊपर से गुजरते वक्त भरत उन्हें राक्षस समझकर प्रहार करते हैं। हनुमानजी हमले से जमीन पर गिर जाते हैं। पूरी कथा बताकर हनुमानजी रामदल पहुंचते हैं। वैद्य लक्ष्मण का उपचार करते हैं। इधर, लंका में रावण क्रोधित होकर अंत में कुंभकरण को निद्रा से जगाता है और युद्ध करने के लिए भेजता है। कुंभकरण रण में आकर कोहराम मचा देता है। श्रीराम आकर कुंभकरण का वध कर देते हैं।
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रामलीला में श्रीराम की शुभम शर्मा, लक्ष्मण की कृष्णा पांडे, भरत की अंश तिवारी, हनुमान की रमा शंकर रावत, रावण की राजू मिश्रा, मेघनाथ की ऋषभ यादव, सुषेण वैद्य की एनडी सेन, कालनेमि की कमलेश खरे, जामवंत की राघव बंसल और विभीषण की हरी मोहन दुबे ने भमिका निभाई।
लीला का निर्देशन हरि प्रकाश शर्मा व संगीत निर्देशन रवि तिवारी ने किया। मंच निर्देशन एवं मंच की समस्त व्यवस्था संजय दोसाज ने संभाली संगीत में सागर दीक्षित ने तबले पर संगत की।
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बुधवार को रामलीला के मंचन में श्रीराम द्वारा लंका पर आक्रमण किए जाने की योजना बनाई गई। सभी वानरों ने लंका को चारों ओर से घेर लिया तभी रावण की आज्ञानुसार मेघनाद युद्ध करने के लिए पहुंचा। उसकी मुलाकात हनुमान जी से हुई। लक्ष्मण के आने के बाद मेघनाद व लक्ष्मण संवाद प्रारंभ हुआ और लक्ष्मण ने मेघनाथ को युद्घ के लिए ललकारा। मेघनाद ने युद्घ के दौरान लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र से वार किया। ब्रह्मास्त्र के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित होकर जमीन पर गिर जाते हैं। हनुमान जी उन्हें वहां से उठाकर रामदल में ले आते हैं। वहां प्रभु राम लक्ष्मण की हालत को देखकर विलाप करने लगते हैं।
रामजी को विलाप करते देख जामवंत द्वारा लंका से सुखेन वैद्य को लाने की बात कही जाती है। हनुमानजी लंका जाकर वैद्य को ले आते हैं। लक्ष्मण को होश में लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने को कहते हैं। वैद्य संजीवनी बूटी द्वारा ही लक्ष्मणजी के उपचार करने की युक्ति बताने के साथ ही बताते सूर्योदय से पूर्व संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए निकलते हैं। रास्ते में कालनेमी नामक राक्षस साधु बनकर हनुमान जी से गुरूमंत्र लेने को कहता है। तालाब में स्नान करते वक्त एक मछली हनुमानजी को कालनेम की माया के बारे में बता देती है और हनुमान जी कालनेम की माया को समाप्त करते हैं। वह संजीवनी बूटी लेने पर्वत पर पहुंचते हैं।
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संजीवनी बूटी न मिलने पर हनुमानजी पूरा पर्वत उठा लाते हैं। अयोध्या के ऊपर से गुजरते वक्त भरत उन्हें राक्षस समझकर प्रहार करते हैं। हनुमानजी हमले से जमीन पर गिर जाते हैं। पूरी कथा बताकर हनुमानजी रामदल पहुंचते हैं। वैद्य लक्ष्मण का उपचार करते हैं। इधर, लंका में रावण क्रोधित होकर अंत में कुंभकरण को निद्रा से जगाता है और युद्ध करने के लिए भेजता है। कुंभकरण रण में आकर कोहराम मचा देता है। श्रीराम आकर कुंभकरण का वध कर देते हैं।
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रामलीला में श्रीराम की शुभम शर्मा, लक्ष्मण की कृष्णा पांडे, भरत की अंश तिवारी, हनुमान की रमा शंकर रावत, रावण की राजू मिश्रा, मेघनाथ की ऋषभ यादव, सुषेण वैद्य की एनडी सेन, कालनेमि की कमलेश खरे, जामवंत की राघव बंसल और विभीषण की हरी मोहन दुबे ने भमिका निभाई।
लीला का निर्देशन हरि प्रकाश शर्मा व संगीत निर्देशन रवि तिवारी ने किया। मंच निर्देशन एवं मंच की समस्त व्यवस्था संजय दोसाज ने संभाली संगीत में सागर दीक्षित ने तबले पर संगत की।