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इन श्रमिकों के सफर की पीड़ा सुनने भर से रूह कांप जाती है साहब !
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तपती धूप में नंगे पैर गोरखपुर के लिए निकला नन्हा अल्लू।
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पुनीत शर्मा
झांसी। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली से अपने गांव जाने को निकले श्रमिकों के सफर की पीड़ा सुनने भर से रूह कांप जाती है। झांसी होकर गुजरने वाले ट्रकों को कभी दूर से देखना। मजदूर ठूंस-ठूंसकर भरे गए हैं। सांस लेना भी दूभर है। कइयों की तबीयत बिगड़ जा रही है। महाराष्ट्र से ही मजदूर अपने परिवार को मोटरसाइकिल पर बैठाकर गोरखपुर ले जा रहे हैं। गर्भवती महिला श्रमिक ने सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। पैरों की खाल उधड़ गई। बच्चे एक दूसरे को कंधे पर उठाकर ले जा रहे हैं। शुक्रवार को कुछ इस तरह के पीड़ा दायी दृश्य यूपी-एमपी के सिकंदरा बार्डर, मुंबई-झांसी हाईवे, कानपुर हाईवे और ललितपुर हाईवे पर देखने को मिले।
महाराष्ट्र से पत्नी-बच्चों को बाइक पर बैठाकर निकल पड़े अखिलेश
झांसी। अखिलेश और रविंद्र महाराष्ट्र में एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन का पहला चरण जब शुरू हुआ तो खर्च चलाने के लिए कुछ जमा पूंजी थी। लेकिन जब लॉकडाउन बढ़ा तो गांव चलने की ठान ली। न बस मिली और न कोई दूसरा वाहन। लिहाजा अपनी बाइक पर पत्नी और बच्चों को बैठाकर निकल पड़े। चार दिन पहले यह लोग चले थे। शुक्रवार को झांसी से गुजरे हैं। इनका कहना है कि शनिवार की शाम तक पहुंच जाएंगे।
भूख से रो रहे थे बच्चे, बिस्कुट और ब्रेड के अलावा कुछ नहीं था
झांसी। छोटा हाथी में बच्चे भरे थे। यह लोग भी महाराष्ट्र से आ रहे थे। बच्चों के चेहरे भूख-प्यास से सूख रहे थे। पूछने पर मजदूरों ने बताया कि खाने को लेकर बिस्कुट और ब्रेड ही मिला। उसके भरोसे ही पूरा सफर बच्चों ने काटा है। कुछ बच्चे तो रो-रोकर सो गए थे। जगह कम थी और लोगों की संख्या ज्यादा लिहाजा गर्मी के कारण सभी के चेहरे भी लाल पड़ गए थे। प्रमोद कुमार ने बताया कि मजदूरों ने मिलकर छोटा हाथी को बुक कर लिया था।
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मां थक गई तो छोटे अल्लू ने कंधे पर बैठा लिया भाई विक्की को
झांसी। यह परिवार नासिक में रह रहा था। रक्सा बार्डर तक किसी तरह ट्रक से यहां पहुंचे। काफी सफर पैदल भी तय किया था। अल्लू ने अपने छोटे भाई विक्की को कंधे पर बैठा रखा था और बस की तरफ दौड़ रहा था। उसकी मां अपने दूसरे बच्चों के साथ आगे था। इन बच्चों के चेहरों पर भूख साफ दिख रही थी। भूख और प्यास के कारण फूल के चेहरे मुरझा गए थे। सिकंदरा बार्डर पर रोडवेज की बस में बैठकर यह बच्चे गोरखपुर के लिए रवाना हुए।
तीन दिन में महाराष्ट्र से चलकर झांसी पहुंचे 4000 वाहन, रोक के बाद भी मजदूरों को ढोते रहे ट्रक
झांसी। महाराष्ट्र से मजदूर अपने वाहन करके आ रहे हैं। ट्रक, छोटा हाथी, लोडर और टैक्सी से आ रहे हैं। सेमरी टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की संख्या तीन दिन में 4000 है। शुक्रवार को शासन ने भले ही ट्रकों द्वारा मजदूरों को ढोने पर रोक लगा दी थी लेकिन शुक्रवार को हजारों श्रमिक ट्रकों में बैठकर गुजरे। यह ट्रक गोरखपुर, कानपुर, इलाहाबाद तक गए हैं। ट्रकों में तो मजदूरों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। हालांकि शासन ने ट्रकों से सवारी ढोने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है लेकिन झांसी से मजदूरों को भरकर ले जाने वाले ट्रक खूब निकले।
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झांसी। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली से अपने गांव जाने को निकले श्रमिकों के सफर की पीड़ा सुनने भर से रूह कांप जाती है। झांसी होकर गुजरने वाले ट्रकों को कभी दूर से देखना। मजदूर ठूंस-ठूंसकर भरे गए हैं। सांस लेना भी दूभर है। कइयों की तबीयत बिगड़ जा रही है। महाराष्ट्र से ही मजदूर अपने परिवार को मोटरसाइकिल पर बैठाकर गोरखपुर ले जा रहे हैं। गर्भवती महिला श्रमिक ने सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। पैरों की खाल उधड़ गई। बच्चे एक दूसरे को कंधे पर उठाकर ले जा रहे हैं। शुक्रवार को कुछ इस तरह के पीड़ा दायी दृश्य यूपी-एमपी के सिकंदरा बार्डर, मुंबई-झांसी हाईवे, कानपुर हाईवे और ललितपुर हाईवे पर देखने को मिले।
महाराष्ट्र से पत्नी-बच्चों को बाइक पर बैठाकर निकल पड़े अखिलेश
झांसी। अखिलेश और रविंद्र महाराष्ट्र में एक फैक्टरी में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन का पहला चरण जब शुरू हुआ तो खर्च चलाने के लिए कुछ जमा पूंजी थी। लेकिन जब लॉकडाउन बढ़ा तो गांव चलने की ठान ली। न बस मिली और न कोई दूसरा वाहन। लिहाजा अपनी बाइक पर पत्नी और बच्चों को बैठाकर निकल पड़े। चार दिन पहले यह लोग चले थे। शुक्रवार को झांसी से गुजरे हैं। इनका कहना है कि शनिवार की शाम तक पहुंच जाएंगे।
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भूख से रो रहे थे बच्चे, बिस्कुट और ब्रेड के अलावा कुछ नहीं था
झांसी। छोटा हाथी में बच्चे भरे थे। यह लोग भी महाराष्ट्र से आ रहे थे। बच्चों के चेहरे भूख-प्यास से सूख रहे थे। पूछने पर मजदूरों ने बताया कि खाने को लेकर बिस्कुट और ब्रेड ही मिला। उसके भरोसे ही पूरा सफर बच्चों ने काटा है। कुछ बच्चे तो रो-रोकर सो गए थे। जगह कम थी और लोगों की संख्या ज्यादा लिहाजा गर्मी के कारण सभी के चेहरे भी लाल पड़ गए थे। प्रमोद कुमार ने बताया कि मजदूरों ने मिलकर छोटा हाथी को बुक कर लिया था।
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मां थक गई तो छोटे अल्लू ने कंधे पर बैठा लिया भाई विक्की को
झांसी। यह परिवार नासिक में रह रहा था। रक्सा बार्डर तक किसी तरह ट्रक से यहां पहुंचे। काफी सफर पैदल भी तय किया था। अल्लू ने अपने छोटे भाई विक्की को कंधे पर बैठा रखा था और बस की तरफ दौड़ रहा था। उसकी मां अपने दूसरे बच्चों के साथ आगे था। इन बच्चों के चेहरों पर भूख साफ दिख रही थी। भूख और प्यास के कारण फूल के चेहरे मुरझा गए थे। सिकंदरा बार्डर पर रोडवेज की बस में बैठकर यह बच्चे गोरखपुर के लिए रवाना हुए।
तीन दिन में महाराष्ट्र से चलकर झांसी पहुंचे 4000 वाहन, रोक के बाद भी मजदूरों को ढोते रहे ट्रक
झांसी। महाराष्ट्र से मजदूर अपने वाहन करके आ रहे हैं। ट्रक, छोटा हाथी, लोडर और टैक्सी से आ रहे हैं। सेमरी टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों की संख्या तीन दिन में 4000 है। शुक्रवार को शासन ने भले ही ट्रकों द्वारा मजदूरों को ढोने पर रोक लगा दी थी लेकिन शुक्रवार को हजारों श्रमिक ट्रकों में बैठकर गुजरे। यह ट्रक गोरखपुर, कानपुर, इलाहाबाद तक गए हैं। ट्रकों में तो मजदूरों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। हालांकि शासन ने ट्रकों से सवारी ढोने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है लेकिन झांसी से मजदूरों को भरकर ले जाने वाले ट्रक खूब निकले।

गोरखपुर जाने के लिए बच्चे के साथ बस का इंतजार करती गर्भवती शीला ।

सिकंदरा यूपी एमपी बॉडर से इस तरह ट्रकों में बैठ कर सफर कर रहे हैं मजदूर।