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अभ्यास से बढ़ा हिंदी का ज्ञान, अब हो गई आसान
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झांसी। पहली बार हिंदी से वास्ता स्कूल में हुआ था। लेकिन, तब ये एक विषय तक ही सीमित थी। असली वास्ता आयकर विभाग की सेवा में आने के बाद हुआ। इसके बाद प्रशासनिक सेवा में यूपी कैडर में चयन हुआ। पहले हिंदी को समझना और फिर बोलना शुरू किया। लेकिन, अब हिंदी आसानी से समझ लेते हैं, बोल भी लेते हैं और लिख भी लेते हैं। जी हां, यहां बात झांसी के जिलाधिकारी आंद्रा वामसी की हो रही है। जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं। लेकिन, भाषा उनके लिए कभी बाधा नहीं बन पाई।
डीएम आंद्रा वामसी ने बताया कि 2008 में उनका चयन आयकर सेवा में हुआ था। तब नागपुर में रहते हुए उनका हिंदी से सीधा वास्ता हुआ था। इसके बाद से ही उन्होंने आम बोलचाल में हिंदी के शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। इसके बाद 2011 में आईएसएस में चयन हुआ और यूपी कैडर मिला। पूर्व में आयकर सेवा में रहते हुए हिंदी को लेकर किया गया अभ्यास यहां उनके बेहद काम आया। हिंदी को वे समझने लगे थे, लेकिन बोलने में हिचक होती थी। लेकिन, आगे चलकर ये कमी भी दूर हो गई। अब धड़ल्ले से सामान्य हिंदी ही नहीं बोलते हैं, बल्कि हिंदी के क्लिष्ट शब्दों का भी बोलचाल में आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं। हिंदी में कामकाज को प्राथमिकता देते हैं। झांसी में रहने के दौरान बुंदेली भाषा की भी बेहतर समझ हो गई है। डीएम ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसमें आसानी से अपनी बात को रखा और समझा जा सकता है।
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डीएम आंद्रा वामसी ने बताया कि 2008 में उनका चयन आयकर सेवा में हुआ था। तब नागपुर में रहते हुए उनका हिंदी से सीधा वास्ता हुआ था। इसके बाद से ही उन्होंने आम बोलचाल में हिंदी के शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। इसके बाद 2011 में आईएसएस में चयन हुआ और यूपी कैडर मिला। पूर्व में आयकर सेवा में रहते हुए हिंदी को लेकर किया गया अभ्यास यहां उनके बेहद काम आया। हिंदी को वे समझने लगे थे, लेकिन बोलने में हिचक होती थी। लेकिन, आगे चलकर ये कमी भी दूर हो गई। अब धड़ल्ले से सामान्य हिंदी ही नहीं बोलते हैं, बल्कि हिंदी के क्लिष्ट शब्दों का भी बोलचाल में आसानी से इस्तेमाल कर लेते हैं। हिंदी में कामकाज को प्राथमिकता देते हैं। झांसी में रहने के दौरान बुंदेली भाषा की भी बेहतर समझ हो गई है। डीएम ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसमें आसानी से अपनी बात को रखा और समझा जा सकता है।
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