प्रेम विवाह करने वाले जोड़े को पंचायत का फरमान, समाज में रहना है तो गोमूत्र पिओ और गोबर खाओ
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दूसरे समाज की युवती से प्रेम विवाह करने पर बिरादरी से अलग-थलग किए गए युवक ने शुक्रवार को प्रशासन की शरण ली और उसे और उसके परिवार को लेकर गांव में होने वाली पंचायत की जानकारी दी। उसने बताया कि समाज के लोगों ने उसके परिवार का बहिष्कार कर रखा है।
पंचायत की सूचना पर प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल अधिकारी गांव में पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए पंचायत रुकवा दी और आधा दर्जन लोगों का शांति भंग में चालान किया गया।
महानगर के एक मुहल्ले में रहने वाले पेशे से प्रॉपर्टी डीलर भूपेश का विवाह 30 जून 2015 को शहर के ही एक मुहल्ला निवासी युवती से हुई थी। दोनों ही अलग-अलग बिरादरी के हैं। यह इनका प्रेम विवाह था और दोनों के ही परिवार वाले सहमत हो गए थे। इस विवाह के बाद से ही भूपेश का परिवार समाज की आंखों में चढ़ गया। उसी समय समाज के लोगों ने पंचायत करके उनके पूरे परिवार का बहिष्कार कर दिया। यहां तक कि उनके घर के लोगों के लिए अपने रिश्तेदारों की शादियों तक में जाना या उन्हें अपने यहां बुलाना तक बंद कर दिया।
जनवरी 2019 में भूपेश की बहन की शादी हुई, इस शादी में भी समाज ने शामिल न होने का एलान कर दिया। भूपेश के पिता ने पंचों से गुहार लगाई। पंचायत ने दो माह का समय देते हुए फैसला सुनाया कि भूपेश की पत्नी आस्था को गोमूत्र व गोबर का सेवन करना पड़ेगा। इतना ही नहीं, पांच लाख रुपये दंड भी अदा करना होगा। इसके लिए दो माह का समय दिया गया। हालांकि, भूपेश का परिवार इस पर राजी नहीं हुआ। अंतिम फैसला लेने के लिए शुक्रवार को ग्वाल टोली में बड़ी पंचायत बुलाई गई थी। लेकिन, इससे पहले बृहस्पतिवार को भूपेश ने इसकी सूचना जिलाधिकारी को दी।
डीएम शिवसहाय अवस्थी के निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल और सीओ सिटी संग्राम सिंह के साथ टीम मौके पर पहुंचे। यहां लोगों को चेतावनी दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कोई भी पंचायत किसी को भी इस तरह का दंड नहीं दे सकती है। इसका पालन न करने पर कार्रवाई होगी। इस मामले में पंचायत में शामिल आधा दर्जन लोगों का शांति भंग में चालान भी काटा गया।
मां को भागवत कथा से लौटाया
पंचायत के फरमान के बाद भूपेश के परिवार का समाज से बहिष्कार कर दिया गया था। इससे उनके परिवार को भारी जलालत झेलनी पड़ी। यहां तक के एक बार उनकी मां मुहल्ले में आयोजित भागवत कथा में शामिल होने गईं थीं। कथा की शोभा यात्रा का मंगल कलश उन्होंने सिर पर धारण किया था। इसकी भनक लगते ही समाज के लोगों ने कलश उतारकर भागवत कथा से दूर कर दिया।
पहनावे पर भी ऐतराज
भूपेश की पत्नी ने बताया कि उनके पति, सास, ससुर व अन्य सभी रिश्तेदार उन्हें स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन समाज उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है। आस्था ने बताया कि वे एक कॉलेज में नौकरी करती हैं। समाज को उनके नौकरी करने तथा पहनावे पर भी ऐतराज रहता है। कई बार समाज के इसका विरोध भी उनके परिजनों के समक्ष दर्ज करा चुके हैं।