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थामी जा सकेगी केन नदी की बाढ़

Wed, 28 Dec 2016 01:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 28 Dec 2016 01:33 AM IST
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 Ken will be Thami river
river, jhansi news - फोटो : demo
केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को मिलाकर 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विद्युत, मछलीपालन, पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही अच्छी बारिश के बाद केन नदी में आने वाली बाढ़ को भी रोका जा सकेगा। वन जीव बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। अब आठ महीने के भीतर काम शुरू हो सकता है। 
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केंद्र में अटल बिहारी बाजपेई की सरकार ने नदी जोड़ो अभियान के तहत इस परियोजना का खाका तैयार किया था। दस साल केंद्र में यूपीए की सरकार होने से परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद इस पर फिर काम शुरू हुआ। परियोजना से सबसे ज्यादा लाभ मध्य प्रदेश को होगा। मध्य प्रदेश के 3,69,950 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश के 2,65,700 हेक्टेयर भूमि को सींचा जा सकेगा। केन-बेतवा नदी को बरुआसागर में जोड़ा जाएगा। यह परियोजना पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, ललितपुर, झांसी क्षेत्र से होते हुए गुजरेगी।
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गौरतलब है कि अच्छी बारिश न होने से बरुआसागर में झील का पानी नहीं भर पाता है। ऐसे में झरना भी नहीं चल पाता। इससे पर्यटकों का भी रुझान इस ओर कम हो रहा है। वहीं, केन नदी में पानी की अधिकता से बांदा में अकसर बाढ़ की स्थिति बन जाती है। ऐसे में केन-बेतवा नदी के गठजोड़ से एक तरफ बाढ़ को रोका जा सकेगा, दूसरी तरफ सूखे की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं, पर्यटकों को लुभाने में भी मदद मिलेगी।
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 शुरू हो सकती हैं चार अन्य परियोजनाएं
केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना सफल होती है, तो चार अन्य परियोजनाओं के भी शुरू होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना पर कोसी-घाघरा, घाघरा-यमुना, शारदा-यमुना, गंडक-गंगा नदी गठजोड़ की निगाह टिकी हुई है। केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना को लेकर होने वाली बैठकों में भविष्य में नदियों को जोड़ने की योजना में इन नदियों पर चर्चा हुई है। 


बोर्ड गठन के बाद शुरू होगा काम
दोनों राज्यों को मिलाकर एक बोर्ड का गठन होना है। इसके बाद काम शुरू होगा। इसमें चार महीने लग सकते हैं। इस परियोजना से 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विद्युत, मछलीपालन, पर्यटन को बढ़ावा व बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी। 
- एससी शर्मा, चीफ इंजीनियर, सिंचाई विभाग 
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