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अफसरों की लापरवाही से अटकी कनेरा नदी की सफाई
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झांसी। अस्तित्व खत्म होने की कगार तक पहुंच चुकी कनेरा नदी का उद्घार मनरेगा के जरिए भी नहीं हो पा रहा। इसके पुर्नरूद्घार के लिए करीब छह माह पहले प्रस्ताव तैयार कराया गया लेकिन, अफसरों के दिलचस्पी न लेने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा। इससे स्थानीय लोग भी कफी निराश हैं।
बबीना ब्लॉक के कई गांवों में इस नदी के जरिए सिंचाई होती थी लेकिन, कुछ वर्षों से लगातार अतिक्रमण एवं गंदगी के चलते नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी। नदी का अस्तित्व खत्म होने के करीब पहुंच चुका। जिलाधिकारी के निर्देश पर नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई में प्रस्ताव तैयार कराया गया। शुरुआत में 44 लाख की लागत से प्रस्ताव बना जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 70 लाख कर दिया गया। इसमें करीब 44 लाख से सिल्ट सफाई एवं नए चेकडैम निर्माण, 12.85 लाख से वन विभाग एवं 17.80 लाख से उद्यान विभाग को काम कराना था।
नदी में पहले से भी चैकडैम बने हैं लेकिन, प्रवाह बनाए रखने को नए चेकडैम भी बनाया जाना प्रस्तावित था। पूरा काम मनरेगा के जरिए कराना है लेकिन, कार्यदायी एजेंसी तय होने में ही कई माह लग गए। शुरुआत में सिंचाई विभाग के बेतवा प्रखंड को काम सौंपा गया। कुछ माह बाद उसने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद लघु सिंचाई विभाग को जिम्मा दिया गया लेकिन उसके अभियंता भी तेजी नहीं ला पा रहे। वहीं, मनरेगा से भी मजदूर नहीं मिल पा रहे। अभी भी शुरुआती चरण से काम आगे नहीं बढ़ सका जबकि दिसंबर महीने में इसे पूरा करने की डेडलाइन तय की गई थी।
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बबीना ब्लॉक के कई गांवों में इस नदी के जरिए सिंचाई होती थी लेकिन, कुछ वर्षों से लगातार अतिक्रमण एवं गंदगी के चलते नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी। नदी का अस्तित्व खत्म होने के करीब पहुंच चुका। जिलाधिकारी के निर्देश पर नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जुलाई में प्रस्ताव तैयार कराया गया। शुरुआत में 44 लाख की लागत से प्रस्ताव बना जिसे बाद में बढ़ाकर करीब 70 लाख कर दिया गया। इसमें करीब 44 लाख से सिल्ट सफाई एवं नए चेकडैम निर्माण, 12.85 लाख से वन विभाग एवं 17.80 लाख से उद्यान विभाग को काम कराना था।
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नदी में पहले से भी चैकडैम बने हैं लेकिन, प्रवाह बनाए रखने को नए चेकडैम भी बनाया जाना प्रस्तावित था। पूरा काम मनरेगा के जरिए कराना है लेकिन, कार्यदायी एजेंसी तय होने में ही कई माह लग गए। शुरुआत में सिंचाई विभाग के बेतवा प्रखंड को काम सौंपा गया। कुछ माह बाद उसने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद लघु सिंचाई विभाग को जिम्मा दिया गया लेकिन उसके अभियंता भी तेजी नहीं ला पा रहे। वहीं, मनरेगा से भी मजदूर नहीं मिल पा रहे। अभी भी शुरुआती चरण से काम आगे नहीं बढ़ सका जबकि दिसंबर महीने में इसे पूरा करने की डेडलाइन तय की गई थी।
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