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झांसी में बढ़ गए ‘कड़कनाथ’ के शौकीन

Mon, 13 Jan 2020 02:12 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2020 02:12 AM IST
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kadaknad chiken demand incerase in jhansi
कडकनाद मुर्गा
झांसी। ठंड बढ़ने के साथ कड़कनाथ मुर्गे के शौकीन भी बढ़ गए। मांग बढ़ने पर इसके दाम में भी जबर्दस्त उछाल आया है। ठंड से पहले पांच सौ रुपये किलो तक मिलने वाले इस मुर्गे की कीमत आठ सौ से एक हजार रुपये तक पहुंच गई। इसके अंडे भी काफी महंगे दामों में बिक रहे हैं।
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कड़कनाथ मुर्गा अपनी तमाम खूबियों के चलते खान-पान के शौकीनों के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय हुआ है। काला रंग, काला मांस, काला खून, काली हड्डी एवं जायकेदार गोश्त की वजह से इसकी डिमांड देश भर में बढ़ रही है। खासतौर से झाबुआ के आदिवासी इलाके में पाए जाने वाले इस मुर्गे का पालन चिरगांव स्थित राजकीय कृषि विद्यालय में भी हो रहा। प्रधानाचार्य कमल कटियार के मुताबिक मेलिनन पिगमेंट एवं आयरन की अधिकता के चलते इसका पूरा शरीर काला होता है।
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स्वाद एवं स्वास्थ्य की खूबियों के चलते दिल्ली, मुंबई, झांसी समेत आसपास के इलाकों में खान-पान के शौकीनों में इसकी डिमांड में इजाफा हुआ है। आयरन अधिक होने से यह शरीर को गर्म भी रखता है। इससे ठंड में मांग में इजाफा हो गया। उनका कहना है मांग इस मौसम में बढ़ गई है। कीमत भी आठ सौ से एक हजार रुपये किलो तक पहुंच गई। मुर्गे की दुकानों में लोग आर्डर करके इसे मंगवा रहे हैं।
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अंडे की भी ऊंची कीमत
सामान्य अंडे की कीमत जहां साठ-आठ रुपये के बीच है वहीं, कड़कनाथ मुर्गी का अंडा तीस से पचास रुपये की कीमत में बिक रहा। अंडे में भी तमाम रोग प्रतिरोधक क्षमताएं होती हैं। इस वजह से लोग इसे तरजीह देते हैं। ई-कार्मस कंपनियों के जरिए इसके अंडे बेचे जा रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद
विशेषज्ञों के मुताबिक कड़कनाथ मुर्गे में प्रोटीन की मात्रा सामान्य मुर्गे से करीब 30 फीसदी अधिक होती है। वसा की मात्रा काफी कम 1.94 से 2.6 फीसद होती है। कोलेस्ट्रॉल भी न के बराबर होता है। इसके सेवन से नर्वस सिस्टम को मजबूत करने में काफी मदद मिलती है। आयरन की कमी भी जल्द दूर होती है। कई रोगों में फायदेमंद होने से लोग इसको काफी पंसद करते हैं।

किसानों के लिए फायदेमंद
सामान्य मुर्गी पालन करने वाले किसान अब कड़कनाथ का भी पालन करने लगे हैं। राजकीय कृषि विद्यालय से इसकी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही। प्रधानाचार्य कमल कटियार के मुताबिक झांसी में कुछ किसानों ने यह काम हाल में शुरू किया है। इसमें सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है।
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