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कब्जा धारक पुलिसकर्मियों के जबरन खाली होंगे क्वार्टर
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कब्जा धारक पुलिसकर्मियों के जबरन खाली होंगे क्वार्टर
झांसी। अन्य जिलों में तबादला होने के बाद भी पुलिस लाइन के क्वार्टरों में जबरन कब्जा किए पुलिसकर्मियों पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। नोटिस भेजे जाने के बाद भी अब तक 32 पुलिसकर्मियों ने क्वार्टर खाली नहीं किए हैं। ऐसे में विभाग अब उनका सामान जबरन बाहर फेंकने की तैयारी कर रहा है।
जिले में तैनात रहे कई पुलिसकर्मी स्थानांतरण अन्य जिलों में हो जाने के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं कर रहे हैं। उनके स्थान पर दूसरे जिलों से आए पुलिस कर्मचारियों को आवास में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद ऐसे करीब सौ से अधिक पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजकर आवास खाली के निर्देश थे। सख्ती के चलते करीब 68 पुलिसकर्मियों ने आवास खाली कर दिए थे, लेकिन अब भी 32 से अधिक पुलिसकर्मी आज तक आदेशाें की अवहेलना कर रहे हैं। दो माह पहले भी नोटिस जारी किए थे, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिल सका। अब अधिकारियों ने शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी है। माह के अंत तक कब्जाधारी पुलिसकर्मियों के क्वार्टर खाली न करने पर जबरन उनका सामान बाहर निकाला जाएगा। अपर पुलिस अधीक्षक राहुल मिठास ने बताया कि ऐसे सभी कब्जाधारी पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही सभी पर विभागीय कार्रवाई की भी तैयारी शुरू की जा रही है।
बनवाए हैं आलीशान मकान
शासन के नियमों के अनुसार कार्य क्षेत्र वाले जिले में जिन पुलिसकर्मियों के पास निजी आवास बना हुआ है, ऐसों को आवास आवंटित नहीं हो सकेगा। शासकीय आवास में निवासरत रहते भी अगर वह अपना मकान बनाता है तो भी विभाग को इसकी जानकारी देनी होती है। ऐसी स्थिति में भी उसे आवास आवास छोड़ना होता है। इस तरह के नियम को न केवल पुलिस विभाग में ताक पर रख दिया गया है, बल्कि प्रत्येक विभाग के कई पुलिसकर्मी इन नियम को ठेंगे पर रखे हुए हैं।
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कौन भरे इनके बिल ?
आवासों में अवैध रूप से रहने वाले कई पुलिसकर्मी आवासों में लगे बिजली मीटर और पानी के बिल तक नहीं भरते। कारण स्पष्ट होता है कि उन्हें आज नहीं तो कल इन आवासों को खाली करना है। वर्दी के रौब में इनके बिजली कनेक्शन भी विभाग आसानी से काट नहीं पाता। अगर इनके मीटर कनेक्शन काट भी दिए जाते हैं तो फिर से अवैध रूप से जोड़ लिए जाते हैं। कई बार बिजली विभाग के छापे में यह उदाहरण देखने को मिलते रहे हैं। ऐसी स्थिति में मकान में रहने वाले नए कर्मचारी को बिजली और पानी के कनेक्शन जुड़वाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमानुसार ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर बकाया बिल की राशि का भुगतान उनके वेतन से राशि काटकर कराया जाना चाहिए।
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झांसी। अन्य जिलों में तबादला होने के बाद भी पुलिस लाइन के क्वार्टरों में जबरन कब्जा किए पुलिसकर्मियों पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। नोटिस भेजे जाने के बाद भी अब तक 32 पुलिसकर्मियों ने क्वार्टर खाली नहीं किए हैं। ऐसे में विभाग अब उनका सामान जबरन बाहर फेंकने की तैयारी कर रहा है।
जिले में तैनात रहे कई पुलिसकर्मी स्थानांतरण अन्य जिलों में हो जाने के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं कर रहे हैं। उनके स्थान पर दूसरे जिलों से आए पुलिस कर्मचारियों को आवास में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद ऐसे करीब सौ से अधिक पुलिसकर्मियों को नोटिस भेजकर आवास खाली के निर्देश थे। सख्ती के चलते करीब 68 पुलिसकर्मियों ने आवास खाली कर दिए थे, लेकिन अब भी 32 से अधिक पुलिसकर्मी आज तक आदेशाें की अवहेलना कर रहे हैं। दो माह पहले भी नोटिस जारी किए थे, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं मिल सका। अब अधिकारियों ने शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी है। माह के अंत तक कब्जाधारी पुलिसकर्मियों के क्वार्टर खाली न करने पर जबरन उनका सामान बाहर निकाला जाएगा। अपर पुलिस अधीक्षक राहुल मिठास ने बताया कि ऐसे सभी कब्जाधारी पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही सभी पर विभागीय कार्रवाई की भी तैयारी शुरू की जा रही है।
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बनवाए हैं आलीशान मकान
शासन के नियमों के अनुसार कार्य क्षेत्र वाले जिले में जिन पुलिसकर्मियों के पास निजी आवास बना हुआ है, ऐसों को आवास आवंटित नहीं हो सकेगा। शासकीय आवास में निवासरत रहते भी अगर वह अपना मकान बनाता है तो भी विभाग को इसकी जानकारी देनी होती है। ऐसी स्थिति में भी उसे आवास आवास छोड़ना होता है। इस तरह के नियम को न केवल पुलिस विभाग में ताक पर रख दिया गया है, बल्कि प्रत्येक विभाग के कई पुलिसकर्मी इन नियम को ठेंगे पर रखे हुए हैं।
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कौन भरे इनके बिल ?
आवासों में अवैध रूप से रहने वाले कई पुलिसकर्मी आवासों में लगे बिजली मीटर और पानी के बिल तक नहीं भरते। कारण स्पष्ट होता है कि उन्हें आज नहीं तो कल इन आवासों को खाली करना है। वर्दी के रौब में इनके बिजली कनेक्शन भी विभाग आसानी से काट नहीं पाता। अगर इनके मीटर कनेक्शन काट भी दिए जाते हैं तो फिर से अवैध रूप से जोड़ लिए जाते हैं। कई बार बिजली विभाग के छापे में यह उदाहरण देखने को मिलते रहे हैं। ऐसी स्थिति में मकान में रहने वाले नए कर्मचारी को बिजली और पानी के कनेक्शन जुड़वाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमानुसार ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर बकाया बिल की राशि का भुगतान उनके वेतन से राशि काटकर कराया जाना चाहिए।