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जोखिम भरा रास्ता बंद कर रहा रेलवे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:25 AM IST
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railway track, jhansi news
- फोटो : demo
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पांच वर्ष पहले झांसी-मुस्तरा रेलखंड पर पाड़री फाटक बंद कर दिया गया और अब लोगों का पटरियों के बीच से पैदल निकलने और दो पहिया वाहन निकालने के रास्ते को भी रेलवे ने सीमेंट के खंभे लगाकर बंद कर दिया है। बृहस्पतिवार को इसके विरोध में लोगों ने पटरियों पर बैठकर प्रदर्शन कर रेल प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बंद कर दिए गए पाड़री फाटक पर अंडरपास बनाने की मांग को दोहराया।
रेल प्रशासन ने ग्वालियर-कानपुर मार्ग पर वर्ष 2013 ओवरब्रिज बनने के दौरान झांसी-मुस्तरा रेलखंड पर स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए 100 साल पुराने पाड़री फाटक (क्रासिंग गेट) नंबर 120 ए को बंद कर दिया गया था। इस फाटक से प्रतिदिन पाड़री, मैरी, नगरिया कुआं, रमपुरा, मथनपुरा, बूढ़ा, केशवपुर और दूसरी तरफ शहर क्षेत्र के इतवारी गंज, मेवातीपुरा सूजे खां खिड़की, भांडेरी गेट के एक हजार से अधिक लोगों का पैदल और दो-चार पहिया गाड़ियों, ट्रैक्टर से निकलना होता था।
किसान अपने जानवर भी इसी फाटक से लेकर जाते थे। फाटक बंद होने के बाद लोगों की जरूरत को देख रेल प्रशासन ने नजदीक ही अंडर पास बनाने का आश्वासन दिया था। अंडरपास बनने की आस में अभी तक उक्त क्षेत्र के लोग पटरियों को पार करके काम चला रहे थे। रेल प्रशासन ने इसे जोखिम भरा मानते हुए पटरियां पार करने वाले स्थान के आसपास सीमेंट के खंभे लगाना शुरू कर दिया है, ताकि लोग इस रास्ते से आवागमन बंद कर दें। लोगों का कहना है कि खंभे लगने से उनकी मुश्किल बहुत बढ़ जाएंगी और उनको लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इसी समस्या को लेकर बृहस्पतिवार को लोगों ने पटरियों पर बैठकर प्रदर्शन किया और रेल प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
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‘बंद पाड़री फाटक के पास अभी अंडर पास बनाने की कोई योजना नहीं है। भविष्य में मांग को देखते हुए समस्या का निस्तारण होगा।’
नीरज भटनागर, मंडल वाणिज्य प्रबंधक।
धरना-प्रदर्शन करेंगे
रेल प्रशासन अगर समस्या का शीघ्र निस्तारण नहीं करता है तो मैं गांव वालों के साथ डीआरएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा। महाप्रबंधक को भी ज्ञापन देंगे।
पुष्पेंद्र यादव।
दो किलोमीटर दूर बनी क्रासिंग
पाड़री फाटक बंद होने के बाद दो किलोमीटर दूर दूसरी क्रासिंग बनी है। दूसरी क्रासिंग तक रास्ता भी अच्छा नहीं है। पटरियों से गुजरने का रास्ता भी बंद होने के बाद मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
जयंत यादव, नगरिया कुआं।
बच्चों को स्कूल जाने में होती हैं दिक्कत
फाटक बंद होने के बाद से गांव से शहर तक स्कूल जाने में बच्चों को दिक्कत होती हैं। स्कूल पहुंचने में कम से कम आधा घंटा ज्यादा लगता है।
गब्बर सिंह कुशवाहा, पाड़री।
वादाखिलाफी कर रहा रेलवे
फाटक बंद होने के समय रेल प्रशासन ने उसकी जगह अंडर पास बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ। रेलवे ने लोगों के साथ वादाखिलाफी की।
बृजेंद्र यादव, नगरिया कुआं।
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रेल प्रशासन ने ग्वालियर-कानपुर मार्ग पर वर्ष 2013 ओवरब्रिज बनने के दौरान झांसी-मुस्तरा रेलखंड पर स्थानीय लोगों के आवागमन के लिए 100 साल पुराने पाड़री फाटक (क्रासिंग गेट) नंबर 120 ए को बंद कर दिया गया था। इस फाटक से प्रतिदिन पाड़री, मैरी, नगरिया कुआं, रमपुरा, मथनपुरा, बूढ़ा, केशवपुर और दूसरी तरफ शहर क्षेत्र के इतवारी गंज, मेवातीपुरा सूजे खां खिड़की, भांडेरी गेट के एक हजार से अधिक लोगों का पैदल और दो-चार पहिया गाड़ियों, ट्रैक्टर से निकलना होता था।
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किसान अपने जानवर भी इसी फाटक से लेकर जाते थे। फाटक बंद होने के बाद लोगों की जरूरत को देख रेल प्रशासन ने नजदीक ही अंडर पास बनाने का आश्वासन दिया था। अंडरपास बनने की आस में अभी तक उक्त क्षेत्र के लोग पटरियों को पार करके काम चला रहे थे। रेल प्रशासन ने इसे जोखिम भरा मानते हुए पटरियां पार करने वाले स्थान के आसपास सीमेंट के खंभे लगाना शुरू कर दिया है, ताकि लोग इस रास्ते से आवागमन बंद कर दें। लोगों का कहना है कि खंभे लगने से उनकी मुश्किल बहुत बढ़ जाएंगी और उनको लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इसी समस्या को लेकर बृहस्पतिवार को लोगों ने पटरियों पर बैठकर प्रदर्शन किया और रेल प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
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‘बंद पाड़री फाटक के पास अभी अंडर पास बनाने की कोई योजना नहीं है। भविष्य में मांग को देखते हुए समस्या का निस्तारण होगा।’
नीरज भटनागर, मंडल वाणिज्य प्रबंधक।
धरना-प्रदर्शन करेंगे
रेल प्रशासन अगर समस्या का शीघ्र निस्तारण नहीं करता है तो मैं गांव वालों के साथ डीआरएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य हो जाऊंगा। महाप्रबंधक को भी ज्ञापन देंगे।
पुष्पेंद्र यादव।
दो किलोमीटर दूर बनी क्रासिंग
पाड़री फाटक बंद होने के बाद दो किलोमीटर दूर दूसरी क्रासिंग बनी है। दूसरी क्रासिंग तक रास्ता भी अच्छा नहीं है। पटरियों से गुजरने का रास्ता भी बंद होने के बाद मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
जयंत यादव, नगरिया कुआं।
बच्चों को स्कूल जाने में होती हैं दिक्कत
फाटक बंद होने के बाद से गांव से शहर तक स्कूल जाने में बच्चों को दिक्कत होती हैं। स्कूल पहुंचने में कम से कम आधा घंटा ज्यादा लगता है।
गब्बर सिंह कुशवाहा, पाड़री।
वादाखिलाफी कर रहा रेलवे
फाटक बंद होने के समय रेल प्रशासन ने उसकी जगह अंडर पास बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ। रेलवे ने लोगों के साथ वादाखिलाफी की।
बृजेंद्र यादव, नगरिया कुआं।