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जले मरीजों को झांसी में ही मिलेगा आधुनिक इलाज

Sat, 19 Jan 2019 01:58 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Sat, 19 Jan 2019 01:58 AM IST
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jle marijo ko jhansi me hi milega ilaj
medical collage, jhansi - फोटो : demo
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आधुनिक बर्न यूनिट बनेगी। यूनिट में आईसोलेटेड आईसीयू, मेजर और माइनर ओटी, वेंटिलेटर, अलग से फिजियोथैरेपी सेंटर समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ बर्न इंजरी (एनपीपीएमबीआई) के तहत केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। आधुनिक बर्न यूनिट बनने के बाद बुंदेलखंड के मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
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मलेरिया, तपेदिक की तुलना में जलने से होने वाली मौतों की संख्या ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन 2014 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल दस लाख से अधिक लोग मामूली या गंभीर रूप से जलते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ बर्न इंजरी (एनपीपीएमबीआई) के तहत देश के चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में आधुनिक बर्न यूनिट की स्थापना करा रही है। बर्न यूनिट के प्रभारी अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट की स्थापना की मंजूरी दे दी है।
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आधुनिक बर्न यूनिट के लिए 720 स्क्वॉयर मीटर जगह की आवश्यकता होती है। ऐसे में कॉलेज परिसर में दो जगहों पर यूनिट बनाने पर विचार चल रहा है। यूनिट या तो इमरजेंसी के बगल में या फिर सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बनेगी। यूनिट में आईसोलेटेड आईसीयू, मेजर और माइनर ओटी, वेंटिलेटर, फिजियोथैरेपी सेंटर, सेंट्रल ऑक्सीजन समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें जनरल में 12 और आईसीयू में चार बेड उपलब्ध रहेंगे। इस यूनिट की स्थापना के बाद झांसी समेत बुंदेलखंड के मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत बन रहे सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में प्लास्टिक सर्जरी की अलग से यूनिट बन रही है। ऐसे में जरूरत पर जले हुए मरीजों की तुरंत प्लास्टिक सर्जरी भी हो सकेगी।
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अभी सामान्य सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज में अभी 10 बेड के बर्न वार्ड में सामान्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां न तो वेंटिलेटर की सुविधा है और न ही आईसोलेटेड आईसीयू की। जबकि, यहां साल भर में 1000-1400 बर्न केस आते हैं। महीने का अनुमान लगाया जाए, तो लगभग सौ नए केस आते हैं।

इलाज बहुत महंगा
आग, केमिकल, करंट या किसी भी अन्य चीज से जले हुए व्यक्ति का इलाज करने में बहुत लंबा खर्च आता है। डॉ. सुधीर कुमार के मुताबिक 35-40 फीसदी जले हुए व्यक्ति के इलाज में डेढ़ से दो लाख रुपये से कम खर्च नहीं होता है। मौजूदा समय में प्रदेश सरकार की तरफ से भरपूर दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेप्रेटजोन, डिप्रोस्लिन, कॉलिस्टिन समेत महंगी से महंगी एंटीबायोटिक दवाएं कॉलेज में उपलब्ध हैं। ऐसे में आधुनिक बर्न यूनिट बन जाने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का नि:शुल्क या बेहद मामूली खर्च पर इलाज हो सकेगा।


एनपीपीएमबीआई का उद्देश्य
- बर्न इंजरी के कारण होने वाली मृत्यु, रुग्णता या विकलांगता कम करना।
- व्यवहार परिवर्तन, संचार प्रबंधन और पुनर्वास हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त ढांचागत सुविधा व नेटवर्क स्थापित करना।
- विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, औद्योगिक, खतरनाक, व्यावसायिक श्रमिकों, कमजोर समूहों व आम जन के बीच जागरूकता बढ़ाना।

बर्न यूनिट बनने के बाद कॉलेज को संसाधन और मैन पावर मिल जाएगा। कॉलेज में स्पेशलिस्ट प्लास्टिक सर्जन हैं ही। ऐसे में मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। - डॉ. साधना कौशिक, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।
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