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Jhansi: छह महीने से विवादों में घिरी ब्रिटिश कालीन तिजोरी का अब खुलेगा राज, मकान की खोदाई के दौरान निकली थी
Thu, 16 Jul 2026 01:33 PM IST
दीपक महाजन
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:33 PM IST
सार
पुरातत्व विभाग के अफसरों का कहना है कि औपचारिकताएं पूरी करके इसका ताला जल्द खोला जाएगा। इसके बाद ही इसकी ऐतिहासिकता प्रमाणित हो सकेगी।
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खोदाई के दौरान निकली ब्रिटिश कालीन तिजोरी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
बड़ागांव के पंचमपुरा बाजार में खोदाई के दौरान निकली ब्रिटिश कालीन तिजोरी का राज जल्द सामने आएगा। इस तिजोरी के स्वामित्व कोल लेकर पिछले छह महीने से विवाद छिड़ा हुआ था लेकिन, पुरातत्व विभाग ने इसे कब्जे में लेकर सरकारी मालखाने में जमा करा दिया है। पुरातत्व विभाग के अफसरों का कहना है कि औपचारिकताएं पूरी करके इसका ताला जल्द खोला जाएगा। इसके बाद ही इसकी ऐतिहासिकता प्रमाणित हो सकेगी।
करीब 100 किलो वजनी इस तिजोरी को लेकर जनवरी माह से विवाद छिड़ा है। थाना बड़ागांव के पंचमपुरा मोहल्ला निवासी ऊषा गुप्ता पत्नी कैलाश कण का कहना है कि जनवरी महीने में कमरा जर्जर होने से उसे तोड़ा गया, उस दौरान उनके ससुर की दी हुई लोहे की तिजोरी दूसरे कमरे में रख दी गई। उनका आरोप है कि उसी दौरान किसी शरारती व्यक्ति ने जमीन के अंदर से तिजोरी निकलने की अफवाह उड़ा दी। यह बात पूरे इलाके में फैल गई। मालूम चलने पर 21 जनवरी को पुरातत्व विभाग और पुलिस टीम उनके घर पहुंच गई।
पुरातत्व विभाग ने तिजोरी को कब्जे में ले लिया जबकि ऊषा का कहना था कि उसमें चांदी के बर्तन रखे हैं। हर दीपावली पर वह इनकी पूजा करती हैं। उनके इस तर्क को न मानते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि जमीन के नीचे खोदाई में निकली निधि या कलाकृति केंद्र सरकार की होगी। एएसआई अफसरों ने जिलाधिकारी को भेजी रिपोर्ट में इसे एएसआई अथवा पुरातत्व विभाग को सौंपने की बात कही। एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कुछ दिनों पहले पुरातत्व विभाग ने तिजोरी को कब्जे में लेकर उसे सरकारी कोष में जमा करा दिया। वरिष्ठ पुरातत्व अधिकारी राजीव त्रिवेदी के मुताबिक तिजोरी में ताला लगा हुआ है। उसकी चाबी किसी के पास नहीं है। कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह तिजोरी खोली जाएगी, तब ही इसमें रखी चीजें बाहर आ सकेंगी।
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करीब 100 किलो वजनी इस तिजोरी को लेकर जनवरी माह से विवाद छिड़ा है। थाना बड़ागांव के पंचमपुरा मोहल्ला निवासी ऊषा गुप्ता पत्नी कैलाश कण का कहना है कि जनवरी महीने में कमरा जर्जर होने से उसे तोड़ा गया, उस दौरान उनके ससुर की दी हुई लोहे की तिजोरी दूसरे कमरे में रख दी गई। उनका आरोप है कि उसी दौरान किसी शरारती व्यक्ति ने जमीन के अंदर से तिजोरी निकलने की अफवाह उड़ा दी। यह बात पूरे इलाके में फैल गई। मालूम चलने पर 21 जनवरी को पुरातत्व विभाग और पुलिस टीम उनके घर पहुंच गई।
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पुरातत्व विभाग ने तिजोरी को कब्जे में ले लिया जबकि ऊषा का कहना था कि उसमें चांदी के बर्तन रखे हैं। हर दीपावली पर वह इनकी पूजा करती हैं। उनके इस तर्क को न मानते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि जमीन के नीचे खोदाई में निकली निधि या कलाकृति केंद्र सरकार की होगी। एएसआई अफसरों ने जिलाधिकारी को भेजी रिपोर्ट में इसे एएसआई अथवा पुरातत्व विभाग को सौंपने की बात कही। एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कुछ दिनों पहले पुरातत्व विभाग ने तिजोरी को कब्जे में लेकर उसे सरकारी कोष में जमा करा दिया। वरिष्ठ पुरातत्व अधिकारी राजीव त्रिवेदी के मुताबिक तिजोरी में ताला लगा हुआ है। उसकी चाबी किसी के पास नहीं है। कुछ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह तिजोरी खोली जाएगी, तब ही इसमें रखी चीजें बाहर आ सकेंगी।
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