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सांसों पर संकट: बिगड़ने लगी झांसी की हवा, 30 फीसदी बढ़ा एक्यूआई, दीपावली पर साफ-सफाई और कचरा जलाना मुख्य कारण

Sun, 19 Oct 2025 06:29 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Sun, 19 Oct 2025 06:29 PM IST
सार

आंकड़े देखें तो अक्तूबर के शुरुआती सात दिनों में भी झांसी का एक्यूआई 43 से 62 के बीच बना था। मगर आठ अक्तूबर से इसमें तेजी से वृद्धि होनी शुरू हो गई और एकदम से ये 138.40 पर पहुंच गया।

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Jhansi's air quality deteriorates, AQI rises 30%
वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe stock

विस्तार

दीपावली से पहले ही झांसी की हवा बिगड़ने लगी है। सितंबर के मुकाबले वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में इस माह अब तक 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। दीपावली पर घर-घर में हुई सफाई, निर्माण कार्यों में तेजी से उड़ रही धूल और कचरा जलाना मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस महीने तो एक दिन एक्यूआई 193 तक पहुंच गया था।
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सामान्य तौर पर झांसी का पीएम-10 का स्तर 60 से 80 के बीच रहता है, जो कि संतोषजनक स्थिति मानी जाती है। झांसी में प्रदूषण विभाग ने वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर मापने के लिए शिवाजी नगर, वीरांगना नगर और इलाइट चौराहा पर यंत्र लगाए हैं। तीनों ही जगह के आंकड़ों को मिलाकर औसत एक्यूआई निकाला जाता है। आंकड़े देखें तो अक्तूबर के शुरुआती सात दिनों में भी झांसी का एक्यूआई 43 से 62 के बीच बना था। मगर आठ अक्तूबर से इसमें तेजी से वृद्धि होनी शुरू हो गई और एकदम से ये 138.40 पर पहुंच गया। फिर नौ अक्तूबर को 156, 10 को 193, 11 को 126 और 12 अक्तूबर को एक्यूआई 112 रहा। 13 और 14 अक्तूबर को गिरावट होने ये से 100 के नीचे आ गया। उसके बाद से उतार-चढ़ाव बना हुआ है और वायु गुणवत्ता सूचकांक सौ के आसपास बना हुआ है। शनिवार को भी एक्यूआई 102 रहा। आने वाले समय में आतिशबाजी के चलते इसमें और वृद्धि की आशंका है। ऐसे में विशेषज्ञ सांस के मरीजों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
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हल्की ठंड में धूल के कण भी चिपकने लगते

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्मृति त्रिपाठी का कहना है कि त्योहारी सीजन में साफ-सफाई हुई है। इससे धूल भी काफी उड़ रही है। दूसरी तरफ, इन दिनों तापमान में भी गिरावट आई है और सुबह-शाम हल्की ठंड पड़ने लगी है। ऐसे मौसम में धूल के कण आपस में चिपकने लगते हैं। इससे धुंध जैसी स्थिति बन जाती है। इस कारण धरती से निकलने वाली गर्म हवा वातावरण में फैल नहीं पाती है और वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने लगता है।
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सांस के रोगी इन बातों का रखें ध्यान

मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री का कहना है कि सांस के मरीज धूल से बचाव के लिए मास्क जरूर लगाएं। सांस रोगी दवा की पर्याप्त खुराक लें। इन्हेलर साथ रखें और नियमित उपयोग करें। अगर अस्थमा का अटैक आता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।


क्या होता है पीएम-10

पीएम-10 को पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। ये हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले छोटे कणों का एक समूह है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। इससे खांसी, सांस लेने में तकलीफ, हृदय, फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है।
माहवार एक्यूआई की स्थिति

माह एक्यूआई
अगस्त 61.00

सितंबर 71.00
अक्तूबर 92.88

(नोट: आंकड़े वर्ष 2025 के हैं। अक्तूबर में अब तक की औसतन स्थिति।)
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