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Jhansi: मेडिकल कॉलेज में 150 टीबी रोगियों पर हुआ शोध, शुगर स्तर बढ़े रहने से दोबारा होने का खतरा

Wed, 18 Feb 2026 09:03 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Wed, 18 Feb 2026 09:03 PM IST
सार

जिन शुगर रोगियों को टीबी से राहत मिली, उनकी लगातार निगरानी की गई। इनमें से 33 फीसदी रोगियों को शुगर का स्तर ज्यादा बढ़ा रहने की वजह से फिर से टीबी का संक्रमण हो गया।
 

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Jhansi: Research conducted on 150 TB patients in the medical college, risk of recurrence
टीबी का संक्रमण, सांकेतिक। - फोटो : Freepik.com

विस्तार

रक्त में लंबे समय तक बढ़ा हुआ शुगर स्तर न सिर्फ हृदय, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह टीबी (क्षय रोग) के दोबारा होने का खतरा भी बढ़ाता है। शोध में यह सामने आया है कि अनियंत्रित डायबिटीज वाले मरीजों में टीबी का संक्रमण दोबारा सक्रिय होने या फिर नए रूप में होने की आशंका सामान्य रोगी की तुलना में कहीं अधिक होती है। यह सार महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डाॅ. रामबाबू सिंह के शोध में निकलकर सामने आया है।
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मेडिसिन विभाग में 20 महीने तक 150 टीबी रोगियों पर किए गए शोध में पाया गया है कि 35 फीसदी शुगर रोगियों में सामान्य मरीजों की तुलना में टीबी ठीक होने की संभावना कम पाई गई। चाैंकाने वाली बात यह कि इलाज पूरा होने के बाद भी शुगर स्तर अधिक बने रहने से एक तिहाई रोगी दोबारा टीबी की चपेट में पाए गए। डॉ. रामबाबू सिंह ने बताया कि इस शोध का प्रकाशन बीते माह इंटरनेशनल जर्नल्स ऑफ साइंस एंड रिसर्च में हो गया है। उन्होंने शोध निष्कर्षों को साझा करते हुए बताया कि शुगर का उच्च स्तर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। शुगर बढ़ने से सफेद रक्त कोशिकाएं कमजोर होती हैं। बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता घटती है। यही वजह है कि टीबी के जीवाणु मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस को दोबारा सक्रिय होने का मौका मिल जाता है। ऐसे में डायबिटीज को नियंत्रित रखना न केवल जरूरी है, बल्कि टीबी से बचाव का अहम हथियार भी।
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ऐसे किया गया शोध
अगस्त 2024 से दिसंबर 2024 तक टीबी रोगियों पर शोध किया गया। एक ग्रुप में शुगर पीड़ित 75 टीबी रोगियों को रखा तो दूसरे में टीबी के सामान्य 75 रोगियों को। दोनों ही ग्रुप के टीबी रोगियों का उपचार एकसाथ शुरू किया गया। छह महीने का पूरा कोर्स होने के बाद दोनों ग्रुप के रोगियों की जांच कराई गई। पता चला कि सामान्य टीबी रोगियों को संक्रमण से निजात मिल गई है। वहीं, शुगर का स्तर बढ़ा रहने की वजह से 35 फीसदी रोगियों में टीबी से निजात मिलने की कम संभावना मिली। इसके बाद जिन शुगर रोगियों को टीबी से राहत मिली, उनकी लगातार निगरानी की गई। इनमें से 33 फीसदी रोगियों को शुगर का स्तर ज्यादा बढ़ा रहने की वजह से फिर से टीबी का संक्रमण हो गया।
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शुगर रोगी टीबी से ऐसे करें बचाव
शुगर की नियमित जांच कराएं, नियमित सैर करें।
बीड़ी-सिगरेट और शराब न पिएं।
भीड़भाड़ वाले इलाके में जाएं तो मास्क जरूर लगाएं।
संतुलित आहार, समय से दवाएं लें।
ऐसे मरीजों को विशेष ध्यान देने की जरूरत।
जिनकी शुगर लंबे समय से अनियंत्रित है।
पहले टीबी हो चुकी है।
वजन तेजी से घट रहा है।
बार-बार खांसी, बुखार या कमजोरी महसूस हो रही है।
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