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Jhansi: एशिया कप जीतने वाली भारतीय जूनियर हॉकी टीम की कप्तान ज्योति सिंह ने साझा किए अपने अनुभव

Thu, 26 Dec 2024 02:29 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 26 Dec 2024 02:29 PM IST
सार

ज्योति ने बताया कि 12 साल की उम्र में उन्होंने हॉकी थामी थी। खेलते-खेलते हॉकी से प्यार हो गया और यह जीवन का अहम हिस्सा बन गई। एमपी हॉकी अकादमी ज्वाइन कर ली। कई खेल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। एक वक्त ऐसा आया कि भारतीय जूनियर हॉकी टीम में जगह मिल गई और बतौर कप्तान देश का नेतृत्व करने का भी मौका मिला।

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Jhansi News Indian junior hockey team captain Jyoti Singh shared her experiences
भारतीय जूनियर हॉकी टीम की कप्तान न ज्योति सिंह ने साझा किए अपने अनुभव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एशिया कप जीतने वाली भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम की कप्तान ज्योति सिंह ने कहा कि सफलता के लिए अपनी जिंदगी का टाइम टेबल बनाना चाहिए। आत्म अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। सफलता मिलेगी या नहीं, इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। बस अपने काम पर फोकस करना चाहिए। यह बात उन्होंने बृहस्पतिवार को अमर उजाला से हुई बातचीत में कही।

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ज्योति ने बताया कि 12 साल की उम्र में उन्होंने हॉकी थामी थी। खेलते-खेलते हॉकी से प्यार हो गया और यह जीवन का अहम हिस्सा बन गई। एमपी हॉकी अकादमी ज्वाइन कर ली। कई खेल स्पर्धाओं में हिस्सा लिया। एक वक्त ऐसा आया कि भारतीय जूनियर हॉकी टीम में जगह मिल गई और बतौर कप्तान देश का नेतृत्व करने का भी मौका मिला। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपने काम से प्यार करना चाहिए। काम के सारे नियमों का पालन करना चाहिए। असफलता से कभी नहीं हारना चाहिए। बल्कि, सोचना चाहिए कि मैं कर सकती हैं, पर क्यूं नहीं कर पा रही हूं। इस क्यूं का जवाब खुद ही ढूंढ़ना चाहिए। ज्योति ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह यह मुकाम हासिल कर लेंगी, वह तो केवल अपने काम पर ध्यान देती रहीं।

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रील नहीं, रियल लाइफ में जीएं
सीपरी बाजार निवासी ज्योति सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया से दूरी बनाते हुए केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। दुनिया में क्या हो रहा है, इससे दूरी बनाकर केवल अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। रील नहीं, बल्कि रीयल लाइफ में जीना चाहिए। एकाग्रता के लिए यह बेहद जरूरी है।

बहन ने थमाई हॉकी, परिवार का मिला साथ
ज्योति सिंह ने बताया कि उसके पापा धीरज सिंह परिहार एथलीट हैं। वह छह-सात साल की उम्र से पापा के साथ स्टेडियम जाया करती थी। बुआ भी एथलीट थीं, उन्होंने खेलने के लिए प्रोत्साहित किया था। मौसेरी बहन हॉकी खेलती थी। आठ साल पहले बहन ने ही पहली बार उनके हाथ में हॉकी थमाई थी। मां माधुरी सिंह का भी पूरा सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि एशिया कप में मिली सफलता महज एक पड़ाव है। उनकी निरंतरता आगे भी जारी रहेगी।

संसाधनों की होती है महत्वपूर्ण भूमिका: अशोक
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद ने कहा कि ज्योति ने मेजर ध्यानचंद की खेल परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है। ज्योति पर पूरे झांसी को गर्व है। उन्होंने कहा कि खेल के प्रति नई पीढ़ी की रुचि बढ़ाने के लिए आसपास का वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। खेल संसाधन विकसित होने सेखिलाड़ी अपने आप तैयार होंगे। यूरोपियन देश इस मामले में बहुत आगे हैं। हालांकि, अब सरकार की ओर से खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

भेंट की तलवार और पहनाया चांदी का मुकुट
ज्योति सिंह के झांसी आने पर यहां बृहस्पतिवार को माऊंट लिट्रा जी स्कूल में उनका सम्मान किया गया। विद्यालय के प्रबंधक डा. रोहित पांडेय ने ज्योति को चांदी का मुकुट पहनाया और तलवार भेंट की। इस दरम्यान विद्यालय की ओर से ज्योति को 51 हजार रुपये का चेक भी दिया गया। यहां आयोजित कार्यक्रम में पूर्व ओलंपियन अशोक ध्यानचंद, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी सुरेश बोनकर, बृजेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।

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