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झांसी मंडल में 11.3 फीसदी बढ़ा बेटियों का लिंगानुपात
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झांसी। झांसी मंडल में बेटियों के लिंगानुपात में 11.3 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। अब प्रति हजार बेटों में 907 बेटियां जन्म ले रही हैं। जबकि, पांच साल पहले तक ये आंकड़ा महज 798 ही था। मंडल में लिंगानुपात के मामले में सबसे बेहतर स्थिति में ललितपुर पहुंच गया है। जबकि, सुधार के बावजूद जालौन सबसे फिसड्डी है।
हाल ही में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 2020-21 की रिपोर्ट जारी हुई है। रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि सरकार के प्रयासों ने प्रदेश में लिंगानुपात का ग्राफ सुधारा है। झांसी समेत मंडल के तीनों जिलों में भी लिंगानुपात की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गई है। एनएफएचएस-4 2015-16 की रिपोर्ट में झांसी मंडल में प्रति हजार बेटों में 79.8 फीसदी बेटियां जन्म ले रही थीं, जो कि एनएफएचएच-5 की रिपोर्ट में 90.7 प्रतिशत हो गया है। जनपदवार आंकड़ों पर गौर करें तो झांसी में बेटियों का लिंग अनुपात 11.2 फीसदी सुधर गया है। अब यहां 1000 पुरुषों के सापेक्ष 815 की जगह 927 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 112 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है। वहीं, जालौन में बेटियों का लिंगानुपात 14.4 फीसदी सुधरा है। यहां 1000 पुरुषों के सापेक्ष अब 653 की जगह 797 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 144 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है। मंडल में सबसे बेहतर स्थिति में ललितपुर है। 7.2 फीसदी लिंगानुपात सुधरने के बाद अब ललितपुर में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 926 की जगह 998 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 72 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है।
तीनों ही जिलों में बढ़ा संस्थागत
संस्थान के तीनों जिलों में संस्थागत प्रसव भी बढ़ा है। झांसी में ये 84.5 प्रतिशत की जगह 92.9 फीसदी हो गया है। सरकारी संस्थानों में भी संस्थागत प्रसव 59.6 फीसदी की जगह 75.6 प्रतिशत हो गया है। ललितपुर में संस्थागत प्रसव भी 84.5 प्रतिशत की जगह अब 90.8 फीसदी हो गया है। सरकारी संस्थानों में भी संस्थागत प्रसव 78.9 फीसदी से 86.6 प्रतिशत हो गया है। जालौन में संस्थागत प्रसव 83.8 प्रतिशत की जगह अब 85.1 फीसदी हो गया है। हालांकि, सरकारी संस्थानों में संस्थागत प्रसव में कमी आई है। अब 72.2 फीसदी की जगह 70.0 प्रतिशत हो गया है।
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वर्जन..
लिंगानुपात में सुधार किसी भी समाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह सुधार दर्शाता है कि झांसी मंडल के लोगों में नारी शक्ति के प्रति विश्वास का भाव पैदा हुआ है। बेटियों को बेटों के बराबर समझने की भावना बढ़ी है। आगामी कुछ सालों में स्थिति और सुधरेगी। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।
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हाल ही में नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे 2020-21 की रिपोर्ट जारी हुई है। रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि सरकार के प्रयासों ने प्रदेश में लिंगानुपात का ग्राफ सुधारा है। झांसी समेत मंडल के तीनों जिलों में भी लिंगानुपात की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हो गई है। एनएफएचएस-4 2015-16 की रिपोर्ट में झांसी मंडल में प्रति हजार बेटों में 79.8 फीसदी बेटियां जन्म ले रही थीं, जो कि एनएफएचएच-5 की रिपोर्ट में 90.7 प्रतिशत हो गया है। जनपदवार आंकड़ों पर गौर करें तो झांसी में बेटियों का लिंग अनुपात 11.2 फीसदी सुधर गया है। अब यहां 1000 पुरुषों के सापेक्ष 815 की जगह 927 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 112 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है। वहीं, जालौन में बेटियों का लिंगानुपात 14.4 फीसदी सुधरा है। यहां 1000 पुरुषों के सापेक्ष अब 653 की जगह 797 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 144 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है। मंडल में सबसे बेहतर स्थिति में ललितपुर है। 7.2 फीसदी लिंगानुपात सुधरने के बाद अब ललितपुर में 1000 पुरुषों के सापेक्ष 926 की जगह 998 बेटियां जन्म ले रही हैं। पिछले पांच सालों में ये ग्राफ 72 बेटियां प्रति हजार बढ़ा है।
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तीनों ही जिलों में बढ़ा संस्थागत
संस्थान के तीनों जिलों में संस्थागत प्रसव भी बढ़ा है। झांसी में ये 84.5 प्रतिशत की जगह 92.9 फीसदी हो गया है। सरकारी संस्थानों में भी संस्थागत प्रसव 59.6 फीसदी की जगह 75.6 प्रतिशत हो गया है। ललितपुर में संस्थागत प्रसव भी 84.5 प्रतिशत की जगह अब 90.8 फीसदी हो गया है। सरकारी संस्थानों में भी संस्थागत प्रसव 78.9 फीसदी से 86.6 प्रतिशत हो गया है। जालौन में संस्थागत प्रसव 83.8 प्रतिशत की जगह अब 85.1 फीसदी हो गया है। हालांकि, सरकारी संस्थानों में संस्थागत प्रसव में कमी आई है। अब 72.2 फीसदी की जगह 70.0 प्रतिशत हो गया है।
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लिंगानुपात में सुधार किसी भी समाज के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह सुधार दर्शाता है कि झांसी मंडल के लोगों में नारी शक्ति के प्रति विश्वास का भाव पैदा हुआ है। बेटियों को बेटों के बराबर समझने की भावना बढ़ी है। आगामी कुछ सालों में स्थिति और सुधरेगी। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।