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UP: 23 करोड़ के टैक्स को 1.50 करोड़ करने में डील, सरकारी पैसों से दी थीं लग्जरी कारें; घूसखोर अफसरों पर खुलासा
Sun, 04 Jan 2026 03:06 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 04 Jan 2026 03:06 PM IST
सार
झांसी रिश्वकांड में नया खुलासा हुआ है। सरकार को 23 करोड़ की चपत लगाने के लिए अफसरों ने 1.50 करोड़ की रिश्वत मांगी थी। 13 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पाई गई थी। पचास फीसदी पेनाल्टी और ब्याज भी चुकाना था। सीजीएसटी अफसरों ने 70 लाख रुपये की पहली किस्त ले ली लेकिन सीबीआई ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
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Jhansi bribery case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
झांसी में रिश्वतखोरी मामले के भंडाफोड़ होने के बाद सीजीएसटी विभाग में बड़ा फेरबदल कर दिया गया। झांसी डिविजन निवारक दस्ते में अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा के साथ तैनात निरीक्षक प्रशांत विश्वकर्मा को यहां से हटाकर कानपुर शाखा की रिव्यू ब्रांच में भेज दिया गया।
यह साइड पोस्टिंग मानी जाती है। निरीक्षक नरेंद्र को हटाकर कानपुर मंडल भेज दिया गया। यहां से दोनों को हटाए जाने के बाद से सीजीएसटी विभाग में खलबली मची है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के संयुक्त आयुक्त प्रमोद श्योराण की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया।
वहीं, अन्य निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। झांसी मंडल रेंज प्रथम में तैनात अधीक्षक रामशरण गुप्ता को यहां से हटाकर ललितपुर मंडल, आशीष कुमार अवस्थी को रेंज-2 से हटाकर सीपीसी मंडल, सतीश कुमार-प्रथम को रेंज तृतीय से झांसी मंडल, साक्षी पतसरिया को रेंज द्वितीय से रेंज-तृतीय एवं ललितपुर मंडल, आनंद शुक्ला को उरई मंडल से उरई रेंज, अमित कुमार शर्मा को केंद्रीय निवारक शाखा से मंडलीय निवारक मंडल, झांसी भेजा गया। कानपुर मंडल से राजेश सिंह देवाल एवं हिमांशु श्रीवास्तव को भी हटा दिया गया है।
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यह साइड पोस्टिंग मानी जाती है। निरीक्षक नरेंद्र को हटाकर कानपुर मंडल भेज दिया गया। यहां से दोनों को हटाए जाने के बाद से सीजीएसटी विभाग में खलबली मची है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के संयुक्त आयुक्त प्रमोद श्योराण की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया।
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वहीं, अन्य निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। झांसी मंडल रेंज प्रथम में तैनात अधीक्षक रामशरण गुप्ता को यहां से हटाकर ललितपुर मंडल, आशीष कुमार अवस्थी को रेंज-2 से हटाकर सीपीसी मंडल, सतीश कुमार-प्रथम को रेंज तृतीय से झांसी मंडल, साक्षी पतसरिया को रेंज द्वितीय से रेंज-तृतीय एवं ललितपुर मंडल, आनंद शुक्ला को उरई मंडल से उरई रेंज, अमित कुमार शर्मा को केंद्रीय निवारक शाखा से मंडलीय निवारक मंडल, झांसी भेजा गया। कानपुर मंडल से राजेश सिंह देवाल एवं हिमांशु श्रीवास्तव को भी हटा दिया गया है।
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सरकार को 23 करोड़ की चपत लगाने के लिए मांगी थी 1.50 करोड़ की रिश्वत
उधर, मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर एवं जय अंबे प्लाईवुड के प्रोपराइटर को टैक्स चोरी के एवज में 23 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करने थे लेकिन सीजीएसटी अफसरों ने 1.50 करोड़ रुपये की रिश्वत मिलने पर यह रकम घटाकर 50 लाख रुपये करने की बात कही थी। सीजीएसटी अफसरों ने 70 लाख रुपये की पहली किस्त ले ली लेकिन सीबीआई ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
उधर, मेसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर एवं जय अंबे प्लाईवुड के प्रोपराइटर को टैक्स चोरी के एवज में 23 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करने थे लेकिन सीजीएसटी अफसरों ने 1.50 करोड़ रुपये की रिश्वत मिलने पर यह रकम घटाकर 50 लाख रुपये करने की बात कही थी। सीजीएसटी अफसरों ने 70 लाख रुपये की पहली किस्त ले ली लेकिन सीबीआई ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
अब तक छानबीन में यह बात सामने आई है कि कई कारोबारियों की टैक्स रकम पहले भी घटाई जा चुकी है। 18 दिसंबर को जय अंबे प्लाईवुड एवं जय दुर्गा हार्डवेयर में सीजीएसटी टीम ने छापा मारा था। इस दौरान भारी मात्रा में अघोषित माल एवं करोड़ों रुपये के कच्चे बिल पकड़े गए थे।
सेंट्रल जीएसटी टीम की गणना में 13 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पाई गई। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम के मुताबिक इस टैक्स चोरी की राशि पर पचास फीसदी पेनाल्टी एवं पांच साल के ब्याज के हिसाब से पैसा वसूला जाना था। इस हिसाब से कारोबारी को 23 करोड़ रुपये जमा करने थे। इससे बचने के लिए कारोबारियों ने अधीक्षक अनिल तिवारी से संपर्क साधा।
अनिल ने 23 करोड़ की भारी भरकम राशि कम करा देने का भरोसा दिलाया। इसके एवज में उसने पहले दो करोड़ मांगे। इसके बाद रकम घटाकर 1.50 करोड़ कर दी। अनिल ने अजय शर्मा के साथ मिलकर डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी से बात की।
राजू मंगतानी एवं लोकेश तोलानी की भी प्रभा से बता कराई गई। राजू मंगतानी ने 1.50 करोड़ की रकम काफी अधिक बताते हुए डिप्टी कमिश्नर से पैसा कम करने को कहा लेकिन वह राजी नहीं हुईं। उनके इन्कार कर देने पर दोनों कारोबारी 1.50 करोड़ देने पर सहमत हो गए।
घूसखोर अफसरों को सरकारी पैसों से दी गई थीं लग्जरी कारें
सीजीएसटी अधीक्षक अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा सरकारी पैसों के सहारे अपना रुतबा गांठते थे। सरकारी नियमों में सिर्फ प्रवेंटिव टीम को ही एक कार दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए करीब 30 हजार रुपये महीने का बजट है लेकिन, यहां दो लग्जरी कार किराये पर रखी गई थी।
सीजीएसटी अधीक्षक अनिल तिवारी एवं अजय शर्मा सरकारी पैसों के सहारे अपना रुतबा गांठते थे। सरकारी नियमों में सिर्फ प्रवेंटिव टीम को ही एक कार दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए करीब 30 हजार रुपये महीने का बजट है लेकिन, यहां दो लग्जरी कार किराये पर रखी गई थी।
इनके किराए पर हर महीने 80 हजार रुपये खर्च किए जाते थे। इनका इस्तेमाल अफसर अपने निजी काम में करते थे। परिवार के लोगों भी इन्हीं वाहनों का इस्तेमाल करते थे।सरकारी खजाने के सहारे सीजीएसटी अफसरों की शाहखर्ची सिर्फ यहीं तक नहीं थी बल्कि डिप्टी कमिश्नर से लेकर अधीक्षक तक हर अफसर अपनी मनमर्नी से पैसे खर्च कर रहा था।
डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी ने करीब 1200 वर्गफीट में अपना आलीशान कार्यालय तैयार कराया था। इसकी सजावट में भी लाखों रुपये खर्च किए गए थे। करीब 1.50 लाख रुपये खर्च करके उनके मनपसंद रंग से कमरे की रंगाई कराने के साथ ही परदे लगाए गए थे। उनका कक्ष महंगे फर्नीचर, टीवी, सोफा समेत समेत अन्य उपकरणों से लैस था।