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ओरछा राजघराने की महारानी ने कराया था नेपाल में सीता जी के नौ लखा मंदिर का निर्माण

Wed, 15 Jul 2020 02:52 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2020 02:52 AM IST
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The Queen of Orchha royalty had built nauLakha temple of Sita ji in Nepal
भारत-नेपाल - फोटो : iStock

आज वैश्विक परिस्थितियों में भले ही भारत और नेपाल के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को लेकर बिगड़े बोल बोले जा रहे हों, पर इन दोनों ही देशों की धर्म और संस्कृति से जुड़ी विरासत को अलग नहीं किया जा सकता है। नेपाल के प्रधानमंत्री ओली द्वारा दिए गए बयान में भगवान श्रीराम को नेपाल का बताने के साथ ही अयोध्या की भौगोलिक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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नेपाल और भारत के हजारों साल पुराने सांस्कृतिक व धार्मिक संबंधों को तार तार करने वाले इस बयान से बुंदेलखंड के धर्मगुरु व पुजारी दुखी हैं। यह बात बहुत कम लोग जानते होंगे कि नेपाल के जनकपुर में माता सीता के प्राकट्य स्थल पर स्थित नौ लखा मंदिर का निर्माण ओरछा राजघराने की टीकमगढ़ रियासत की महारानी बृषभानु कुँअर ने कराया था।
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नेपाल में स्थित भगवान श्रीराम की ससुराल व सीता जी की प्राकट्य स्थली जनकपुर का बुंदेलखंड से गहरा नाता रहा है। इस बातके साक्ष्य न केवल भारतीय इतिहास में मौजूद हैं, बल्कि नेपाल में स्थित इस मंदिर के अंदर भी इसके प्रमाण हैं। यहां के महंत व अन्य लोग भी इन तथ्यों को स्वीकार करते हैं।
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जनकपुर में आज से 200 वर्ष पहले 4860 वर्गफुट क्षेत्र में बुंदेलखंड के ओरछा राजघराने की टीकमगढ़ रियासत की महारानी बृषभानु कुंअर ने माता सीता के भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। उस समय इसके निर्माण पर नौ लाख रुपये खर्च हुए थे, इस कारण नेपाल में इस मंदिर को नौलखा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के परिसर में 115 सरोवर हैं। इस मंदिर के निर्माण की एक अलग कहानी है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नेपाल में जिस स्थान पर भूमि से माता सीताजी का प्राकट्य हुआ था, उस स्थान पर जंगल में एक छोटा सा मंदिर था, यहीं पर जाकर भक्त पूजा अर्चना करते थे, अठारहवीं शताब्दी में बुंदेलखंड की ओरछा राजघराने की टीकमगढ़ रियासत की महारानी बृषभानु कुंअर भी यहां माता सीता की जन्मभूमि के दर्शन के लिए गई हुई थीं, महारानी के यहां कोई पुत्र नहीं था, उन्होंने मनौती मांगी कि अगर उन्हें पुत्र की प्राप्ति होगी तो वह यहां पर भव्य मंदिर बनवाएंगी। उनके यहां पुत्र हुआ तो उन्होंने 1895 में जनकपुर में माता सीता के भव्य मंदिर का निर्माण प्रारंभ कराया जो कि 16 साल बाद यानि कि 1911 में पूरा हुआ। सीता जी के इस भव्य मंदिर में महारानी बृषभानु कुंअर के नाम का शिलालेख आज भी लगा हुआ है।

बुंदेलखंड से नेपाल का रहा है पुराना नाता
नेपाल के जनकपुर में स्थित सीता जी के मंदिर का निर्माण बुंदेला राजघराने की महारानी बृषभानु कुँ्अर ने कराया था। ओरछा और जनकपुर में विवाह पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, दोनों ही जगह के उत्सव की व्यवस्था बुंदेला राजघराने से की जाती थी, एक लंबे समय तक जनकपुर के मंदिर से संत विवाह पंचमी पर्व में ओरछा आते थे तथा रामराजा मंदिर से लोग नेपाल जनकपुर कार्यक्रम में शामिल होने जाते थे, पर वक्त के साथ अब यह परंपरा समाप्त हो गई है।

बुंदेला महारानी द्वारा कराए गए माता सीता के भव्य मंदिर निर्माण की बात को किसी प्रमाण की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि मंदिर में उनके नाम का शिलालेख लगा हुआ है। माता सीता के मंदिर में इस समय तपेश्वर दास वैष्णव मुख्य महंत हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री का यह बयान कि रामजी की जन्मभूमि अयोध्या नेपाल में है यह एकदम गलत और दुखी करने वाला है।

रमाकांत शरण महाराज प्रधान पुजारी रामराजा मंदिर ओरछा धाम

ओली का बयान दुखी करने वाला
ओली ने जिस तरह भगवान श्रीराम और अयोध्या को लेकर बयान दिया है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। संपूर्ण भारत के साथ ही बुंदेलखंड से भी नेपाल के जो सांस्कृतिक व धार्मिक संबंध रहे हैं उनको विस्मृत नहीं किया जा सकता है। दोनों ही देशों की संस्कृति व धर्म एक हैं, इसलिए इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। माता सीता के मंदिर का निर्माण बुंदेलखंड की महारानी बृषभानु कुंअर ने कराया था।
पुजारी चतुर्भुज मंदिर ओरछा धाम

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