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जलसंस्थान: ब्लीचिंग पाउडर खरीद में फंस रहे अफसर

Fri, 26 Nov 2021 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Nov 2021 12:36 AM IST
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Jal Sansthan: Officers getting trapped in the purchase of bleaching powder
झांसी। जलसंस्थान के पूर्व महाप्रबंधक के कार्यकाल के दौरान हुए ब्लीचिंग पाउडर खरीद घोटाले में अफसर फंस रहे हैं। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने तीन बिंदुओं पर ब्योरा तलब किया है। इसमें महाप्रबंधक के 13 महीने के कार्यकाल में मंडल में किए गए 14 करोड़ रुपये के भुगतान, लॉग बुक बदलना व पन्ने फाड़ना और ब्लीचिंग पाउडर खरीद के दो- दो आर्डर जारी करना शामिल है।
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जलसंस्थान में ब्लीचिंग पाउडर की खरीद में घोटाला हुआ था। इसमें पाउडर की खरीद को लेकर एक दिन में दो-दो वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। ब्लीचिंग पाउडर खरीदने के लिए दो- दो आर्डर जारी करने और आर्डर में ब्लीचिंग पाउडर की मात्रा बढ़ा देने की शिकायत मंडलायुक्त और शासन में की गई थी।
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इसे संज्ञान में लेते हुए शासन ने विजिलेंस को जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है। जांच के लिए चार प्रपत्र तैयार किए गए हैं। इसमें तीन प्रमुख बिंदुओं का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। इस ब्योरा की जांच के लिए अलग- अलग कॉपी तैयार कर 39 बिदुओं को शामिल किया गया है। इसमें एक बिंदु यह भी है कि महाप्रबंधक के आगमन से पहले विभाग में टेंडर डाले गए थे, टेंडर उनकी ज्वाइनिंग मई 2020 के बाद खोले गए थे। इन टेंडरों का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। महाप्रबंधक का पूरा पता, सेवाकाल का ब्योरा और कहां- कहां तैनाती रही, ब्लीचिंग पाउडर खरीद का आर्डर देना और फिर जुलाई 2021 में एक ही दिन में दो- दो आर्डर देना, जिसमें पहला आर्डर सौ मीट्रिक टन और दूसरा आर्डर साढ़े तीन सौ मीट्रिक टन का देना शामिल है। इसके अलावा जब शिकायत हुई और हो- हल्ला मचा तो टेंडर निरस्त कर दिया गया, बिना अवर अभियंता और सहायक अभियंता की अनुमति के ब्लीचिंग पाउडर खरीदने का आर्डर जारी कर दिया और बाद में लॉग बुक के पन्ने फाड़कर उन्हें बदल देना आदि शामिल है। यह बात अलग है कि बाद में विभागीय कर्मचारियों की कलम फंसती देख ब्लीचिंग पाउडर का आर्डर निरस्त कर दिया गया।
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इसमें एक लिपिक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो उक्त लिपिक महाप्रबंधक के कार्यकाल के दौरान खुद को स्वयंभू समझने लगा था और नियमों को दरकिनार कर काम कर रहा था। विजिलेंस इस लिपिक की भूमिका की पड़ताल कर रही है। उधर, महाप्रबंधक का कार्यकाल 13 महीने का रहा। इस दौरान मंडल भर में 14 करोड़ रुपये के भुगतान किए गए थे। इन भुगतानों को चेक किया जा रहा है कि किस मद में क्या भुगतान किया गया और भुगतान करने की जरूरत क्यों पड़ी।

महाप्रबंधक के कार्यकाल को शामिल किया गया
जांच में तत्कालीन महाप्रबंधक के झांसी में कार्यकाल को शामिल किया गया है। उनका यहां पर 13 महीने का कार्यकाल रहा है। उन्होंने इस दौरान जो- जो कार्य किए गए। उन सभी की जांच की जा रही है।
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