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रेलवे प्रशासन कर्मचारियों से जानेगा विभागीय गार्ड परीक्षा की हकीकत
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झांसी। रेलवे गार्ड की विभागीय परीक्षा का पेपर तीन लाख रुपये लेकर उपलब्ध कराने के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। ऑडियो को संज्ञान में लेने के बाद प्रशासन अब संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने की तैयारी कर रहा है। कर्मचारियों से ऑडियो में हुई बातचीत की हकीकत का पता किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। साथ ही, प्रशासन मामले को विजिलेंस के पास भी भेजने पर विचार कर रहा है।
रेलवे गार्ड की विभागीय परीक्षा सवालों के घेरे में आने के बाद से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। बृहस्पतिवार को प्रशासन ऑडियो की हकीकत जानने में लगा रहा। पता चला कि ऑडियो में जो दो कर्मचारी पेपर के बदले तीन लाख रुपये लेनदेन की बात कर रहे हैं। उस नाम के कर्मचारी उनके यहां हैं कि नहीं। हालांकि, इस बात की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने ऑडियो के आधार पर मामले की जांच का निर्णय लिया है। हालांकि, अभी इसके लिए जांच समिति का गठन नहीं किया गया है। प्रशासन पहले संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर उनसे हकीकत जानने का प्रयास करेगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में रुपये लेने वाले अधिकारी व मध्यस्थता करने वाले कर्मचारियों का फंसना तय है। मंडल स्तर पर जांच प्रभावित न हो, इसके लिए रेल प्रशासन जांच को उत्तर मध्य रेलवे की विजिलेंस को सौंपने पर भी विचार कर रहा है।
इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन ने ऑडियो को संज्ञान में लेने के बाद निगरानी शुरू कर दी है। जल्द ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
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रेलवे विभागीय परीक्षा के जरिये वाणिज्य, बुकिंग, टीएनसी, प्वाइंट्समैन आदि कर्मचारियों को गार्ड बनने का मौका प्रदान करता है। मंडल प्रशासन ने 2018 में विभागीय परीक्षा से गार्डों के 84 पद भरने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जिसकी परीक्षा 23 फरवरी 2020 को करवाई गई थी। तीस जुलाई को परिणाम घोषित हुआ। इस परीक्षा को लेकर एक वाणिज्य कर्मचारी व इंजीनियरिंग कर्मी के बीच बातचीत के 18 से अधिक ऑडियो वायरल हुए हैं, जिसमें परीक्षा में असफल रहे इंजीनियरिंग कर्मी (प्वाइंट्समैन) वाणिज्य कर्मचारी से पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लिए गए तीन लाख रुपये संबंधित अधिकारी से दिलाने की मांग कर रहा है। ऑडियो में पैसे लेकर उत्तीर्ण होने वाले कई और कर्मचारियों के नाम लिए गए।
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रेलवे गार्ड की विभागीय परीक्षा सवालों के घेरे में आने के बाद से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। बृहस्पतिवार को प्रशासन ऑडियो की हकीकत जानने में लगा रहा। पता चला कि ऑडियो में जो दो कर्मचारी पेपर के बदले तीन लाख रुपये लेनदेन की बात कर रहे हैं। उस नाम के कर्मचारी उनके यहां हैं कि नहीं। हालांकि, इस बात की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने ऑडियो के आधार पर मामले की जांच का निर्णय लिया है। हालांकि, अभी इसके लिए जांच समिति का गठन नहीं किया गया है। प्रशासन पहले संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर उनसे हकीकत जानने का प्रयास करेगा। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी। सूत्रों की मानें तो इस मामले में रुपये लेने वाले अधिकारी व मध्यस्थता करने वाले कर्मचारियों का फंसना तय है। मंडल स्तर पर जांच प्रभावित न हो, इसके लिए रेल प्रशासन जांच को उत्तर मध्य रेलवे की विजिलेंस को सौंपने पर भी विचार कर रहा है।
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इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन ने ऑडियो को संज्ञान में लेने के बाद निगरानी शुरू कर दी है। जल्द ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
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रेलवे विभागीय परीक्षा के जरिये वाणिज्य, बुकिंग, टीएनसी, प्वाइंट्समैन आदि कर्मचारियों को गार्ड बनने का मौका प्रदान करता है। मंडल प्रशासन ने 2018 में विभागीय परीक्षा से गार्डों के 84 पद भरने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी, जिसकी परीक्षा 23 फरवरी 2020 को करवाई गई थी। तीस जुलाई को परिणाम घोषित हुआ। इस परीक्षा को लेकर एक वाणिज्य कर्मचारी व इंजीनियरिंग कर्मी के बीच बातचीत के 18 से अधिक ऑडियो वायरल हुए हैं, जिसमें परीक्षा में असफल रहे इंजीनियरिंग कर्मी (प्वाइंट्समैन) वाणिज्य कर्मचारी से पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लिए गए तीन लाख रुपये संबंधित अधिकारी से दिलाने की मांग कर रहा है। ऑडियो में पैसे लेकर उत्तीर्ण होने वाले कई और कर्मचारियों के नाम लिए गए।