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थानेदार सुस्त, 900 मुकदमे लंबित
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Wed, 15 Jul 2015 01:14 AM IST
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झांसी। पुलिस की ढिलाई से मुकदमों के निस्तारण में हो रही देरी पर अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) ने एसएसपी को पत्र भेजकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि थानेदारों व पैरोकार मुकदमों के निस्तारण में रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे अभियुक्तों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि अभियुक्त को लाभ मिलता है, तो उसकी जिम्मेदार पुलिस विभाग व अभियोजन पक्ष होगा। अदालत के इस पत्र से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है। वहीं, एसएसपी ने थानेदारों व पैरोकारों को मुकदमों की पैरवी और गवाहों को कोर्ट में पेश करने के आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शकील अहमद खां ने 30 जून को एसएसपी किरण एस को पत्र भेजकर कोर्ट में पुलिस पैरवी में ढिलाई पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने पुलिस की सुस्ती से अभियुक्तों को लाभ मिलने की भी बात कही है। सूत्र बताते हैं कि अपर सत्र न्यायाधीश ने पत्र में कहा है कि उनके न्यायालय में गैंगेस्टर एक्ट के लगभग 900 मुकदमे लंबित हैं और हर माह नये मुकदमों के आरोप पत्र प्राप्त हो रहे हैं, जिससे कोर्ट में मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है। कहा है कि गवाहों की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करवाने में संबंधित पैरोकार और थानेदार अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। इस कारण मुकदमे निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं।
पत्र में कहा कि गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों के निस्तारण में जितना विलंब होगा, अभियुक्त को उतना ही फायदा होगा। वहीं, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए बराबर निर्देश प्राप्त हो रहे हैं। इस वजह से अब लंबित गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों में अभियोजन द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो साक्ष्य का अवसर समाप्त कर विधि अनुसार आगे कार्यवाही की जाएगी। यदि इसका लाभ अभियुक्त को मिलता है, तो इसका पूरा उत्तरदायित्व अभियोजन व पुलिस विभाग का होगा।
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अदालत के इस पत्र से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। कोर्ट के सख्त तेवर भांपकर एसएसपी किरण एस ने थानेदारों को गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों में विशेष रूप से गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुकदमों के निस्तारण में विशेष रुचि लेकर आदेश का कड़ाई से पालन करने को कहा है।
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अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शकील अहमद खां ने 30 जून को एसएसपी किरण एस को पत्र भेजकर कोर्ट में पुलिस पैरवी में ढिलाई पर आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने पुलिस की सुस्ती से अभियुक्तों को लाभ मिलने की भी बात कही है। सूत्र बताते हैं कि अपर सत्र न्यायाधीश ने पत्र में कहा है कि उनके न्यायालय में गैंगेस्टर एक्ट के लगभग 900 मुकदमे लंबित हैं और हर माह नये मुकदमों के आरोप पत्र प्राप्त हो रहे हैं, जिससे कोर्ट में मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है। कहा है कि गवाहों की कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करवाने में संबंधित पैरोकार और थानेदार अपेक्षित रुचि नहीं ले रहे हैं। इस कारण मुकदमे निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं।
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पत्र में कहा कि गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों के निस्तारण में जितना विलंब होगा, अभियुक्त को उतना ही फायदा होगा। वहीं, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए बराबर निर्देश प्राप्त हो रहे हैं। इस वजह से अब लंबित गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों में अभियोजन द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो साक्ष्य का अवसर समाप्त कर विधि अनुसार आगे कार्यवाही की जाएगी। यदि इसका लाभ अभियुक्त को मिलता है, तो इसका पूरा उत्तरदायित्व अभियोजन व पुलिस विभाग का होगा।
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अदालत के इस पत्र से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। कोर्ट के सख्त तेवर भांपकर एसएसपी किरण एस ने थानेदारों को गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमों में विशेष रूप से गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुकदमों के निस्तारण में विशेष रुचि लेकर आदेश का कड़ाई से पालन करने को कहा है।