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नगर निगम पर बढ़ा तेल का बोझ, पांच करोड़ की अतिरिक्त मांग
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झांसी। नगर निगम प्रशासन ने ईधन की खपत बढ़ने की बात कहते हुए 5 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग की है। तयशुदा बजट के मुकाबले अब यह रकम बढ़कर करीब दो गुना हो गई है। मंगलवार को होने वाली कार्यकारिणी बैठक में इसे मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इसके अलावा निगम प्रशासन ने 16 विभिन्न मदों में भी बजट बढ़ोत्तरी की मांग की है वहीं, पार्षद इस मामले को लेकर अफसरों को घेरने की फिराक में हैं।
नगर निगम सदन ने मूल बजट में डीजल, पेट्रोल एवं मोविऑयल पर सलाना 5 करोड़ मंजूर किया था लेकिन, छह माह के भीतर निगम प्रशासन ने 5.40 करोड़ की मोटी रकम खर्च कर दी। अब शेष महीने के लिए 5 करोड़ की अतिरिक्त मांग कर रहा है। निगम अफसरों के मुताबिक वीवीआईपी आगमन समेत महामारी से निपटने में वाहनों के इस्तेमाल से ईधन की खपत में बढ़ोत्तरी हुई लेकिन, पार्षद उनके तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है तेल की आड़ में भ्रष्टाचार हो रहा है। इसकी जांच कराए जाने की जरुरत है। इसको लेकर हंगामे के आसार हैं।
इसी तरह सेवानिवृत्त लेखपाल एवं प्रवर्तन दल के रखरखाव पर 60 लाख स्वीकृत था। इसे बढ़ाकर 85 लाख करने का प्रस्ताव है। महामारी के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत थे लेकिन, छह महीने में ही 98.87 लाख खर्च हो गए। ऐसे में 25 लाख रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। वाहनों के रखरखाव का बजट भी कम पड़ गया। निगम प्रशासन पहले स्वीकृत 2.50 करोड़ में 2.07 करोड़ रुपये पहले ही खर्च कर दिए। स्मारकों एवं चौराहों पर अस्थाई प्रकाश व्यवस्था पर 35 लाख रखे गए थे। छह महीने में ही 26.68 लाख खर्च कर दिए। अब इसे बढ़ाकर 60 लाख करने की मांग निगम प्रशासन ने की है।
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पहले भी उजागर हो चुका तेल का खेल
नगर निगम में तेल के नाम पर होने वाली गड़बड़ी पहले भी कई बार उजागर हो चुकी। अमर उजाला ने भी नगर निगम की गाड़ियों समेत जनरेटर में इस्तेमाल होने वाले तेल की आड़ में गड़बड़ी उजागर की। इसके कुछ दिनों बाद तक तो कड़ाई की गई लेकिन, कुछ समय बाद वापस उसी तरह खेल शुरू हो जाता है। कूड़ा गाड़ियों में जीपीएस लगाने की बात हुई लेकिन, यह काम भी पूरा नही हुआ। फागिंग के नाम पर भी तेल में खेल हो रहा है। नगर निगम में चलने वाली गाड़ियों की लॉग बुक का भी कोई अता-पता नहीं है।
नगर निगम के पास पेट्रोल पंप नहीं
सूबे के दूसरे नगर निगमों के पास अपने खुद के पेट्रोल पंप हैं। इस वजह से वह सख्ती से निगरानी हो पाती है लेकिन, झांसी नगर निगम अभी तक अपने पेट्रोल पंप के लिए लाइसेंस तक नहीं ले सका। यह हालत तब हैं जब यहां सलाना दस करोड़ के ईधन की जरुरत पड़ती है।
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नगर निगम सदन ने मूल बजट में डीजल, पेट्रोल एवं मोविऑयल पर सलाना 5 करोड़ मंजूर किया था लेकिन, छह माह के भीतर निगम प्रशासन ने 5.40 करोड़ की मोटी रकम खर्च कर दी। अब शेष महीने के लिए 5 करोड़ की अतिरिक्त मांग कर रहा है। निगम अफसरों के मुताबिक वीवीआईपी आगमन समेत महामारी से निपटने में वाहनों के इस्तेमाल से ईधन की खपत में बढ़ोत्तरी हुई लेकिन, पार्षद उनके तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका आरोप है तेल की आड़ में भ्रष्टाचार हो रहा है। इसकी जांच कराए जाने की जरुरत है। इसको लेकर हंगामे के आसार हैं।
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इसी तरह सेवानिवृत्त लेखपाल एवं प्रवर्तन दल के रखरखाव पर 60 लाख स्वीकृत था। इसे बढ़ाकर 85 लाख करने का प्रस्ताव है। महामारी के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत थे लेकिन, छह महीने में ही 98.87 लाख खर्च हो गए। ऐसे में 25 लाख रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। वाहनों के रखरखाव का बजट भी कम पड़ गया। निगम प्रशासन पहले स्वीकृत 2.50 करोड़ में 2.07 करोड़ रुपये पहले ही खर्च कर दिए। स्मारकों एवं चौराहों पर अस्थाई प्रकाश व्यवस्था पर 35 लाख रखे गए थे। छह महीने में ही 26.68 लाख खर्च कर दिए। अब इसे बढ़ाकर 60 लाख करने की मांग निगम प्रशासन ने की है।
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पहले भी उजागर हो चुका तेल का खेल
नगर निगम में तेल के नाम पर होने वाली गड़बड़ी पहले भी कई बार उजागर हो चुकी। अमर उजाला ने भी नगर निगम की गाड़ियों समेत जनरेटर में इस्तेमाल होने वाले तेल की आड़ में गड़बड़ी उजागर की। इसके कुछ दिनों बाद तक तो कड़ाई की गई लेकिन, कुछ समय बाद वापस उसी तरह खेल शुरू हो जाता है। कूड़ा गाड़ियों में जीपीएस लगाने की बात हुई लेकिन, यह काम भी पूरा नही हुआ। फागिंग के नाम पर भी तेल में खेल हो रहा है। नगर निगम में चलने वाली गाड़ियों की लॉग बुक का भी कोई अता-पता नहीं है।
नगर निगम के पास पेट्रोल पंप नहीं
सूबे के दूसरे नगर निगमों के पास अपने खुद के पेट्रोल पंप हैं। इस वजह से वह सख्ती से निगरानी हो पाती है लेकिन, झांसी नगर निगम अभी तक अपने पेट्रोल पंप के लिए लाइसेंस तक नहीं ले सका। यह हालत तब हैं जब यहां सलाना दस करोड़ के ईधन की जरुरत पड़ती है।