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आमदनी कम, खर्चा ज्याद, फिर कैसे चले राजकीय संग्रहालय
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झांसी। आम दिनों में राजकीय संग्रहालय की टिकट बिक्री के साथ ही सभागार में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों से कुल आमदनी औसतन एक लाख रुपये प्रतिमाह है। जो कि खर्च से काफी कम है। आमदनी कम होने के कारण विभागीय अधिकारी संग्रहालय के रखरखाव के साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति को खास तवज्जो नहीं दी है। आलम यह है कि संग्रहालय के संचालन की जिम्मेदारी होमगार्ड व पीआरडी के साथ ही सिविल डिफेंस के कर्मचारियों के कंधों पर है।
राजकीय संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1978 में की गई थीं। संग्रहालय में 16 वीथिकाओं का निर्माण कराया गया था। सैलानियों के लिए पांच रुपये का टिकट तय किया गया है। जबकि कैमरे को ले जाने का शुल्क बीस रुपये है। वहीं, संग्रहालय परिसर में स्थित सभागार में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए तीन से पांच हजार रुपये तय किए गए हैं। शुरुआत में संग्रहालय में 24 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था। आमदनी कम होने के कारण विभागीय अधिकारियों ने रखरखाव पर खास ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के चलते एक भी कर्मचारी नहीं होने के कारण संग्रहालय को बंद कर दिया गया था। लेेकिन स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन करने पर डीएम के हस्ताक्षेप के बाद संग्रहालय को फिर से खोल दिया गया था। वर्तमान में पीआरडी, होमगार्ड व सिविल डिफेंस के कर्मचारियों द्वारा ही संग्रहालय का संचालन किया जा रहा है।
इस संबंध में वीथिका सहायक उमा पाराशर ने बताया कि शुरूआत में संग्रहालय में 24 कर्मचारी कार्यरत थे। वहीं, कोरोना संक्रमण से पहले संग्रहालय की औसतन आय लगभग एक लाख रुपये प्रतिमाह थी, जो अब काफी घट गई है।
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राजकीय संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1978 में की गई थीं। संग्रहालय में 16 वीथिकाओं का निर्माण कराया गया था। सैलानियों के लिए पांच रुपये का टिकट तय किया गया है। जबकि कैमरे को ले जाने का शुल्क बीस रुपये है। वहीं, संग्रहालय परिसर में स्थित सभागार में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए तीन से पांच हजार रुपये तय किए गए हैं। शुरुआत में संग्रहालय में 24 कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था। आमदनी कम होने के कारण विभागीय अधिकारियों ने रखरखाव पर खास ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के चलते एक भी कर्मचारी नहीं होने के कारण संग्रहालय को बंद कर दिया गया था। लेेकिन स्थानीय स्तर पर सामाजिक संगठनों द्वारा प्रदर्शन करने पर डीएम के हस्ताक्षेप के बाद संग्रहालय को फिर से खोल दिया गया था। वर्तमान में पीआरडी, होमगार्ड व सिविल डिफेंस के कर्मचारियों द्वारा ही संग्रहालय का संचालन किया जा रहा है।
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इस संबंध में वीथिका सहायक उमा पाराशर ने बताया कि शुरूआत में संग्रहालय में 24 कर्मचारी कार्यरत थे। वहीं, कोरोना संक्रमण से पहले संग्रहालय की औसतन आय लगभग एक लाख रुपये प्रतिमाह थी, जो अब काफी घट गई है।
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