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गर्मी में यात्रियों का निकल रहा दम, पीड़ा नहीं हो पा रही कम

Fri, 20 May 2016 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 20 May 2016 12:34 AM IST
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In the heat of the exiting passengers Own , is unable to reduce pain
train, jhansi news - फोटो : demo
झांसी। इलाहाबाद व कानपुर सिंगल रेल मार्ग पर यात्रियों का भार बढ़ता जा रहा है। रेल प्रशासन अभी इन दोनों रूट पर दो और तीन ही पैसेंजर ट्रेनें दौड़ा रहा है। इस भीषण गर्मी में पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों का दम निकल रहा है। ट्रेनों के ठसाठस भर कर चलने के कारण यात्री पानी तक को तरस जाते हैं। इससे यात्रियों को हर दिन परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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राष्ट्रीय सड़क मार्ग पर लगातार किराया बढ़ने से अधिकांश यात्री पैसेंजर ट्रेनों में यात्रा करना ही सुगम मानते हैं। झांसी स्टेशन से औसतन प्रतिदिन पांच से छह हजार पैसेंजर टिकटों की बिक्री होती है। सबसे अधिक यात्री कानपुर व इलाहाबाद की तरफ छोटे स्टेशनों को जाते हैं।
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मगर पैसेंजर ट्रेनों के नाम पर अभी भी इन रूटों पर क्रमश: दो और तीन ट्रेनें ही चलती हैं। इनमें भी कोचों की संख्या नहीं बढ़ाई जा रही हैं। भीषण गर्मी में भी पैसेंजर ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं होती है। अगर वह किसी स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर पानी पीना भी चाहें तो भीड़ के कारण वह उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
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गौर करें तो झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर मुस्तरा, गढ़मऊ, पारीछा, चिरगांव, नंदखास, मोंठ, एरच रोड, पिरौना, एट, भुआ, उरई, आटा, कालपी, चौराहा, पुखरायां, मलासा, लालपुर, तिलौची, पामा, भीमसेन आदि स्टेशन हैं। इस रूट पर दो ही पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है।

इनमें एक झांसी-लखनऊ पैसेंजर तड़के 2.50 बजे व दूसरी गाड़ी झांसी-कानपुर पैसेंजर सुबह 7.55 बजे झांसी से चलती है। इसके बाद 19 घंटे तक इस मार्ग पर कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं है। रात 2.50 बजे चलने वाली गाड़ी के लिए यात्रियों को अपनी पूरी रात खराब करनी पड़ती है। उक्त स्टेशनों के यात्री लंबे समय से दिन के समय पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

इसी तरह झांसी-इलाहाबाद मार्ग पर ओरछा, बरुआसागर, निवाड़ी, टेहरका, मऊरानीपुर, बेलाताल, हरपालपुर, महोबा समेत दो दर्जन से अधिक स्टेशन हैं। इस रूट पर सुबह सात बजे, अपराह्न साढ़े बारह बजे व शाम पांच बजे झांसी से पैसेंजर जाती हैं। इस रूट पर रात के समय एक भी पैसेंजर ट्रेन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।


‘रेलवे बोर्ड के निर्देश पर ही किसी ट्रेन का संचालन हो सकता है। पैसेंजर ट्रेन बढ़ाने व कोचों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।’
- गिरीश कंचन, जनसंपर्क अधिकारी (रेलवे)
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