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इल्ली पहुंचा रही उर्द, मूंग और मूंगफली की फसल को नुकसान
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फसलों में लगी इल्ली
- फोटो : REPORTERS
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झांसी। उर्द, मूंग और मूंगफली में इन दिनों इल्ली लग जाने की वजह से फसल को नुकसान हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि यदि समय रहते इस कीट की रोकथाम नहीं की तो 40 फीसदी या उससे अधिक फसलों को क्षति पहुंच सकती है।
कभी कम और कभी तेज बारिश की वजह से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। लगातार बदलते तापमान की वजह से आर्द्रता अधिक बनी हुई है। ऐसे मौसम में इल्ली समेत अन्य कीटों को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है। इसी वजह से इन दिनों उर्द, मूंग और मूंगफली आदि फसलों में इल्ली लगी हुई है। यह फसलों को क्षति पहुंचाने का काम कर रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि इस समय इल्ली फसलों के फल को चूस रही है। इससे फसलों को बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। फसलों को इससे बचाने के लिए एक एकड़ के खेत में 15-20 जगहों पर तीन से चार फीट लकड़ी लगा दें। इन लकड़ियों पर चिड़ियां बैठेंगी और वह इल्लियों को खा जाएंगी। उन्होंने बताया कि समय रहते कीट को नियंत्रित नहीं किया गया तो 40 प्रतिशत या उससे अधिक फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
इन दवाओं का भी कर सकते छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि इल्ली से फसलों को बचाने के लिए पाइपरमेथ्रिन या फिर इमामेक्टिन बेंजोएट को पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। दो मिलीमीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़कने से इल्ली पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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कभी कम और कभी तेज बारिश की वजह से तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। लगातार बदलते तापमान की वजह से आर्द्रता अधिक बनी हुई है। ऐसे मौसम में इल्ली समेत अन्य कीटों को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है। इसी वजह से इन दिनों उर्द, मूंग और मूंगफली आदि फसलों में इल्ली लगी हुई है। यह फसलों को क्षति पहुंचाने का काम कर रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि इस समय इल्ली फसलों के फल को चूस रही है। इससे फसलों को बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। फसलों को इससे बचाने के लिए एक एकड़ के खेत में 15-20 जगहों पर तीन से चार फीट लकड़ी लगा दें। इन लकड़ियों पर चिड़ियां बैठेंगी और वह इल्लियों को खा जाएंगी। उन्होंने बताया कि समय रहते कीट को नियंत्रित नहीं किया गया तो 40 प्रतिशत या उससे अधिक फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
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इन दवाओं का भी कर सकते छिड़काव
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि इल्ली से फसलों को बचाने के लिए पाइपरमेथ्रिन या फिर इमामेक्टिन बेंजोएट को पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। दो मिलीमीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़कने से इल्ली पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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