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Jhansi News: खरपतवार से सुरक्षा नहीं की तो 50 फीसदी कम होगी पैदावार
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- 30-35 दिन की फसल में नियंत्रण से अच्छी होती है पैदावार
- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों का मशविरा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। खरपतवार से सुरक्षा नहीं की जाए तो पैदावार 50 फीसदी तक कम होती है। 30-35 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण उपाय से पैदावार अच्छी होती है। रसायनिक खरपतवारनाशी का उपयोग है तो जरूरी मगर फसल देखकर करें। यह मशविरा रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने जेठमासी मूंग में खरपतवार प्रबंधन को लेकर दिया है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार राय और डॉ. योगेश्वर सिंह ने बताया जिन किसानों ने जेठमासी मूंग की बुवाई कर ली है, वह एक या दो दिन बाद तक 3.30 लीटर पेंडीमेथलीन दवा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। प्रथम निराई-बुवाई 20-25 दिन के भीतर व दूसरी 40-45 दिन में करें। फसल जब 25-30 दिन की हो जाए तो एक गुडाई कस्सी से कर देनी चहिये। इमेंजीथाइपर की 750 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पीनी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया यदि समय पर खरपतवार से सुरक्षा नहीं की जाए तो उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। 30-35 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के उपाय से पैदावार अच्छी होती है। निराई-गुड़ाई के अलावा रसायनिक खरपतवारनाशी का उपयोग जरूरी है। खास ध्यान रखना है कि फसल की स्थिति देखकर ही इसका प्रयोग किया जाए अन्यथा फसल को नुकसान हो सकता है। अधिक तापमान से ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है। इसलिए छह से आठ दिन के अंतराल में सिंचाई करें। फसल में फूल आने से पूर्व तथा फलियों में दाना बनते समय खेत में पर्याप्त नमीं रखी जाए।
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- रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों का मशविरा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। खरपतवार से सुरक्षा नहीं की जाए तो पैदावार 50 फीसदी तक कम होती है। 30-35 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण उपाय से पैदावार अच्छी होती है। रसायनिक खरपतवारनाशी का उपयोग है तो जरूरी मगर फसल देखकर करें। यह मशविरा रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने जेठमासी मूंग में खरपतवार प्रबंधन को लेकर दिया है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार राय और डॉ. योगेश्वर सिंह ने बताया जिन किसानों ने जेठमासी मूंग की बुवाई कर ली है, वह एक या दो दिन बाद तक 3.30 लीटर पेंडीमेथलीन दवा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। प्रथम निराई-बुवाई 20-25 दिन के भीतर व दूसरी 40-45 दिन में करें। फसल जब 25-30 दिन की हो जाए तो एक गुडाई कस्सी से कर देनी चहिये। इमेंजीथाइपर की 750 मिली मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पीनी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया यदि समय पर खरपतवार से सुरक्षा नहीं की जाए तो उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। 30-35 दिन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के उपाय से पैदावार अच्छी होती है। निराई-गुड़ाई के अलावा रसायनिक खरपतवारनाशी का उपयोग जरूरी है। खास ध्यान रखना है कि फसल की स्थिति देखकर ही इसका प्रयोग किया जाए अन्यथा फसल को नुकसान हो सकता है। अधिक तापमान से ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है। इसलिए छह से आठ दिन के अंतराल में सिंचाई करें। फसल में फूल आने से पूर्व तथा फलियों में दाना बनते समय खेत में पर्याप्त नमीं रखी जाए।
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