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कोरोना थमा तो दो फीसदी भी नहीं बचे ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले
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झांसी। कोरोना संक्रमण थमने के साथ ही स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ने लगी है। स्थिति यह है कि संक्रमण थमने के बाद ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले दो फीसदी भी नहीं रह गए हैं। महानगर में सीबीएसई, आइसीएसई समेत कई स्कूलों में उपस्थिति का प्रतिशत 98 फीसदी तक पहुंच गया है। स्कूलों में चल रहीं परीक्षाओं में भी विद्यार्थी ऑफलाइन ही भाग ले रहे हैं। स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन होने से अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। वहीं उपस्थिति बढ़ने के साथ स्कूल कोर्स पूरा कराने में जुटे हैं।
कोरोना संक्रमण के चलते पिछले डेढ़ साल से स्कूल बंद ही चल रहे थे। संक्रमण काल में स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई करानी शुरू कर दी थी। इसके चलते बच्चों में तमाम तरह के मानसिक विकार सामने आ रहे थे। इसके बाद फरवरी मार्च में हालात सुधरे तो स्कूलों को खोलने की तैयारी की गई, लेकिन अभिभावक तैयार नहीं थे। इसकी बाद आई दूसरी लहर में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाने लगा। दूसरी लहर थमने के बाद स्कूलों को खोलने से पहले अभिभावक की राय ली गई, तो तमाम अभिभावक स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं थे। संक्रमण थमने के बाद बीते सितंबर माह से स्कूल खोले गए। शुरू में तो स्कूलों में उपस्थिति का प्रतिशत कम था। एक महीना बीतने के बाद स्थिति यह है कि स्कूलों में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ गया है। अब 98 फीसद बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं। महानगर के तमाम स्कूलों में यूनिट टेस्ट और प्री बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। स्कूलों की ओर से ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प दिया गया था, लेकिन परीक्षाओं शत प्रतिशत उपस्थिति हो रही है। तमाम अभिभावक कोर्स छूटने के चलते बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। ब्लू वेल्स पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य नितिन विलियम्स बताते हैं कि स्कूल में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ गया है। यह अच्छी शुरुआत है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों के स्किल्स कम हुए हैं। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल के गौरव मिश्रा कहते हैं कि धीरे-धीरे हालात सुधर रहे हैं। उपस्थिति बढ़ रही है। ऐसे में कोर्स को पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है।
कोचिंग अब तक ऑनलाइन
संक्रमण थमने के बाद स्कूल तो खोल दिए गए हैं, लेकिन महानगर में तमाम कोचिंग संस्थान अब तक ऑनलाइन ही चल रहे हैं। कोचिंग संचालक आफलाइन कक्षाएं अब तक शुरू नहीं कर सके हैं। तमाम कोचिंग सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। कई कोचिंग संस्थान कोविड प्रोटोकॉल का पालन न हो पाने का हवाला देते हुए ऑनलाइन ही पढ़ाई करवा रहे हैं।
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कोरोना संक्रमण के चलते पिछले डेढ़ साल से स्कूल बंद ही चल रहे थे। संक्रमण काल में स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई करानी शुरू कर दी थी। इसके चलते बच्चों में तमाम तरह के मानसिक विकार सामने आ रहे थे। इसके बाद फरवरी मार्च में हालात सुधरे तो स्कूलों को खोलने की तैयारी की गई, लेकिन अभिभावक तैयार नहीं थे। इसकी बाद आई दूसरी लहर में ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जाने लगा। दूसरी लहर थमने के बाद स्कूलों को खोलने से पहले अभिभावक की राय ली गई, तो तमाम अभिभावक स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं थे। संक्रमण थमने के बाद बीते सितंबर माह से स्कूल खोले गए। शुरू में तो स्कूलों में उपस्थिति का प्रतिशत कम था। एक महीना बीतने के बाद स्थिति यह है कि स्कूलों में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ गया है। अब 98 फीसद बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं। महानगर के तमाम स्कूलों में यूनिट टेस्ट और प्री बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। स्कूलों की ओर से ऑनलाइन परीक्षा का विकल्प दिया गया था, लेकिन परीक्षाओं शत प्रतिशत उपस्थिति हो रही है। तमाम अभिभावक कोर्स छूटने के चलते बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। ब्लू वेल्स पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य नितिन विलियम्स बताते हैं कि स्कूल में उपस्थिति का प्रतिशत बढ़ गया है। यह अच्छी शुरुआत है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों के स्किल्स कम हुए हैं। महात्मा हंसराज मॉडर्न स्कूल के गौरव मिश्रा कहते हैं कि धीरे-धीरे हालात सुधर रहे हैं। उपस्थिति बढ़ रही है। ऐसे में कोर्स को पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है।
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कोचिंग अब तक ऑनलाइन
संक्रमण थमने के बाद स्कूल तो खोल दिए गए हैं, लेकिन महानगर में तमाम कोचिंग संस्थान अब तक ऑनलाइन ही चल रहे हैं। कोचिंग संचालक आफलाइन कक्षाएं अब तक शुरू नहीं कर सके हैं। तमाम कोचिंग सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। कई कोचिंग संस्थान कोविड प्रोटोकॉल का पालन न हो पाने का हवाला देते हुए ऑनलाइन ही पढ़ाई करवा रहे हैं।
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