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घरों में कैद रहे, बाहर निकले तो पुलिस ने डपटा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:52 AM IST
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- फोटो : amar ujala, jhansi news
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राजकीय इंटर कालेज में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जनसभा आसपास की कालोनियों के निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी रही। लोग घरों में कैद होकर रह गए। कहीं स्कूली बच्चे फंसे रहे, तो कहीं कोई दवा खरीदने और अपने अन्य जरूरी कामों के लिए बाहर नहीं निकल सका। ग्वालियर रोड के आसपास स्थित कालोनियों के लिए आवागमन ठप कर दिया गया। हल्के चार पहिया वाहनों को भी पालीटेक्निक के पास रोक कर उन्हें आईटीआई क्रासिंग से होते हुए सीपरी बाजार की ओर डाइवर्ट कर दिया गया और इस तरह उन्हें आठ किलोमीटर का फेरा लगना पड़ा। लोगों को हुई भारी दिक्कत को एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया ने बेहद हल्के में लेते हुए कहा कि थोड़ी बहुत परेशानी तो होती ही है।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा के नाम पर जिला और पुलिस प्रशासन ने कुछ ऐसा सिस्टम बनाया कि इससे आमजन को खासी परेशानी हुई। तय किया गया था कि ग्वालियर रोड पर हल्के चौपहिया, दोपहिया और स्कूली वाहन का आवागमन होता रहेगा। मुख्यमंत्री के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद ही वाहनों का आवागमन रोका जाएगा। मुख्यमंत्री के जीआईसी ग्राउंड पहुंचने के बाद फिर उसी तरह आवागमन होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुबह 11 बजे ही ग्वालियर रोड एक तरफ से ब्लाक कर दिया गया। दूसरे रास्ता जनसभा स्थल जाने वालों के लिए खोल दिया गया। नेताओं की गाड़ियां तो बेरोकटोक आती-जाती रहीं, लेकिन आम आदमी को पुलिस वाले डपटते रहे।
पाल कालोनी, इंडस्ट्रियल एरिया मार्ग, बालाजी मार्ग, स्वामीपुरम् कालोनी, बंसल कालोनी, फ्रैंड्स कालोनी, सीपी मिशन कालोनी और आसपास के रास्तों पर बेरीकेडिंग कर आवागमन रोक दिया गया। हल्के चार पहिया वाहनों को ग्वालियर रोड पर पालीटेक्निक के पास रोक कर उन्हें आईटीआई क्रासिंग की ओर से सीपरी बाजार की ओर से रवाना कर दिया गया। पहले तो लोग आईटीआई क्रासिंग बंद होने पर फंसे और फिर सिद्धेश्वर नगर, रायगंज की गली-कूचों से होते हुए सीपरी बाजार की तरफ पहुंचे तो वहां जाम लगा मिला। वहां कोई पुलिस वाला भी नहीं था, जो ट्रैफिक दुरुस्त करवाता। उधर से फ्रैंड्स कालोनी या बंसल कालोनी तक पहुंचने के लिए लोगों को आठ किलोमीटर का चक्कर लगना पड़ा। सीपी मिशन और नई बस्ती की तरफ से जाने वाले लोग भी जाम में फंसे रहे।
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परेशान लोगों ने बयां किया दर्द
बीकेडी चौराहे पर ही रोक दिया
बीकेडी चौराहा से बमुश्किल 50 कदम दूर गली के निवासी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि वह सुबह करीब साढ़े 10 बजे जरूरी काम के लिए घर से निकले थे और 12 बजे लौटे तो उन्हें बीकेडी चौराहे पर ही रोक लिया गया। पुलिस वालों ने कहा कि वह दोपहिया वाहन से नहीं जा सकते। क्या करता? लौटना पड़ा और इस कारण काफी वक्त बर्बाद हो गया।
बीमार मां की दवा नहीं ले सका
बड़ा बाजार निवासी प्रसून अग्रवाल ने बताया कि उन्हें सीपी मिशन स्थित शिव नर्सिंगहोम में मां की बीमारी के सिलसिले में डाक्टर से मिलकर दवाएं लेनी थीं। बीकेडी चौराहे के पास बेरीकेडिंग पर पुलिस वालों ने उन्हें रोक लिया। वह गिड़गिड़ाते रहे, मां की दवा का हवाला देते रहे पर पुलिस वाले नहीं पसीजे। आगे नहीं बढ़ने दिया और डपट कर लौटा दिया।
स्कूली बच्चों को रोका
शेयर बुड स्कूल के बच्चे आटो से घर की ओर जा रहे थे। आटो चालक मोहन ने बताया कि ग्वालियर रोड पर पुलिस ने रोक लिया। उसने कहा कि बच्चे तो जा ही सकते हैं तो पुलिस वालों ने उसे डपट दिया। इसी कोई बड़ा पुलिस अधिकारी आया। उससे मिन्नत की तो उसने उधर से निकलने की अनुमति दे दी। लेकिन इस सबमें आधा घंटा लग गया।
रोड तक क्रास नहीं करने दिया
मिशन कंपाउंड निवासी संजय केसरिया ने बताया कि वह स्कूल से स्कूटी पर अपने बच्चों को लेकर घर की तरफ आ रहे थे। बीकेडी चौराहे के पास पुलिस ने रोक दिया तो वह आंतियां तालाब की तरफ से घर जाने लगे तो मिशन गेट के सामने रोड पर पुलिस ने फिर रोक लिया। इसके बाद वह कोई पांच किलोमीटर का चक्कर लगाकर घर पहुंचे।
एसएसपी बोले - थोड़ी परेशानी तो होती है
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार चौरसिया ने का कहना है कि वीआईपी के कार्यक्रम में लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी तो होती ही है। ट्रैफिक जाम से बचने के लिए चारपहिया वाहनों का आवागमन रोका गया था। ऐसा जरूरी होता है। जिनके पास सूचना विभाग की ओर से जारी किए गए पास थे, उन्हें नहीं रोका गया। स्कूली वाहनों को रोकने की बात गलत है।
आमजन को पास जारी नहीं किए
किसी के लिए हमारे विभाग की ओर से आमजनों को पास जारी नहीं किए गए थे। हो सकता है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पुलिस विभाग की तरफ से पास जारी किए गए हों।
अतुल दीक्षित
सहायक सूचनाधिकारी
ये नहीं किया गया
-जिन रास्तों का आवागमन रोका गया था, उनके आसपास रहने वालों को एक दिन पहले पास जारी किए जाने चाहिये पर ऐसा नहीं किया गया।
-जिला प्रशासन यह भी कर सकता था कि कालोनी या आवासीय सोसाइटी के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी को वहां के निवासियों को पास जारी करने के लिए अधिकृत कर सकता था।
-कालोनियों के रास्तों पर परिचितों की ड्यूटी लगाई जाती ताकि वहां रहने वालों को पहचान कर उन्हें आनेजाने दिया जाता।
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मुख्यमंत्री की सुरक्षा के नाम पर जिला और पुलिस प्रशासन ने कुछ ऐसा सिस्टम बनाया कि इससे आमजन को खासी परेशानी हुई। तय किया गया था कि ग्वालियर रोड पर हल्के चौपहिया, दोपहिया और स्कूली वाहन का आवागमन होता रहेगा। मुख्यमंत्री के हवाई अड्डे पर उतरने के बाद ही वाहनों का आवागमन रोका जाएगा। मुख्यमंत्री के जीआईसी ग्राउंड पहुंचने के बाद फिर उसी तरह आवागमन होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुबह 11 बजे ही ग्वालियर रोड एक तरफ से ब्लाक कर दिया गया। दूसरे रास्ता जनसभा स्थल जाने वालों के लिए खोल दिया गया। नेताओं की गाड़ियां तो बेरोकटोक आती-जाती रहीं, लेकिन आम आदमी को पुलिस वाले डपटते रहे।
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पाल कालोनी, इंडस्ट्रियल एरिया मार्ग, बालाजी मार्ग, स्वामीपुरम् कालोनी, बंसल कालोनी, फ्रैंड्स कालोनी, सीपी मिशन कालोनी और आसपास के रास्तों पर बेरीकेडिंग कर आवागमन रोक दिया गया। हल्के चार पहिया वाहनों को ग्वालियर रोड पर पालीटेक्निक के पास रोक कर उन्हें आईटीआई क्रासिंग की ओर से सीपरी बाजार की ओर से रवाना कर दिया गया। पहले तो लोग आईटीआई क्रासिंग बंद होने पर फंसे और फिर सिद्धेश्वर नगर, रायगंज की गली-कूचों से होते हुए सीपरी बाजार की तरफ पहुंचे तो वहां जाम लगा मिला। वहां कोई पुलिस वाला भी नहीं था, जो ट्रैफिक दुरुस्त करवाता। उधर से फ्रैंड्स कालोनी या बंसल कालोनी तक पहुंचने के लिए लोगों को आठ किलोमीटर का चक्कर लगना पड़ा। सीपी मिशन और नई बस्ती की तरफ से जाने वाले लोग भी जाम में फंसे रहे।
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परेशान लोगों ने बयां किया दर्द
बीकेडी चौराहे पर ही रोक दिया
बीकेडी चौराहा से बमुश्किल 50 कदम दूर गली के निवासी सुरेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि वह सुबह करीब साढ़े 10 बजे जरूरी काम के लिए घर से निकले थे और 12 बजे लौटे तो उन्हें बीकेडी चौराहे पर ही रोक लिया गया। पुलिस वालों ने कहा कि वह दोपहिया वाहन से नहीं जा सकते। क्या करता? लौटना पड़ा और इस कारण काफी वक्त बर्बाद हो गया।
बीमार मां की दवा नहीं ले सका
बड़ा बाजार निवासी प्रसून अग्रवाल ने बताया कि उन्हें सीपी मिशन स्थित शिव नर्सिंगहोम में मां की बीमारी के सिलसिले में डाक्टर से मिलकर दवाएं लेनी थीं। बीकेडी चौराहे के पास बेरीकेडिंग पर पुलिस वालों ने उन्हें रोक लिया। वह गिड़गिड़ाते रहे, मां की दवा का हवाला देते रहे पर पुलिस वाले नहीं पसीजे। आगे नहीं बढ़ने दिया और डपट कर लौटा दिया।
स्कूली बच्चों को रोका
शेयर बुड स्कूल के बच्चे आटो से घर की ओर जा रहे थे। आटो चालक मोहन ने बताया कि ग्वालियर रोड पर पुलिस ने रोक लिया। उसने कहा कि बच्चे तो जा ही सकते हैं तो पुलिस वालों ने उसे डपट दिया। इसी कोई बड़ा पुलिस अधिकारी आया। उससे मिन्नत की तो उसने उधर से निकलने की अनुमति दे दी। लेकिन इस सबमें आधा घंटा लग गया।
रोड तक क्रास नहीं करने दिया
मिशन कंपाउंड निवासी संजय केसरिया ने बताया कि वह स्कूल से स्कूटी पर अपने बच्चों को लेकर घर की तरफ आ रहे थे। बीकेडी चौराहे के पास पुलिस ने रोक दिया तो वह आंतियां तालाब की तरफ से घर जाने लगे तो मिशन गेट के सामने रोड पर पुलिस ने फिर रोक लिया। इसके बाद वह कोई पांच किलोमीटर का चक्कर लगाकर घर पहुंचे।
एसएसपी बोले - थोड़ी परेशानी तो होती है
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार चौरसिया ने का कहना है कि वीआईपी के कार्यक्रम में लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी तो होती ही है। ट्रैफिक जाम से बचने के लिए चारपहिया वाहनों का आवागमन रोका गया था। ऐसा जरूरी होता है। जिनके पास सूचना विभाग की ओर से जारी किए गए पास थे, उन्हें नहीं रोका गया। स्कूली वाहनों को रोकने की बात गलत है।
आमजन को पास जारी नहीं किए
किसी के लिए हमारे विभाग की ओर से आमजनों को पास जारी नहीं किए गए थे। हो सकता है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को पुलिस विभाग की तरफ से पास जारी किए गए हों।
अतुल दीक्षित
सहायक सूचनाधिकारी
ये नहीं किया गया
-जिन रास्तों का आवागमन रोका गया था, उनके आसपास रहने वालों को एक दिन पहले पास जारी किए जाने चाहिये पर ऐसा नहीं किया गया।
-जिला प्रशासन यह भी कर सकता था कि कालोनी या आवासीय सोसाइटी के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी को वहां के निवासियों को पास जारी करने के लिए अधिकृत कर सकता था।
-कालोनियों के रास्तों पर परिचितों की ड्यूटी लगाई जाती ताकि वहां रहने वालों को पहचान कर उन्हें आनेजाने दिया जाता।