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होली पर बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा खपाने की तैयारी

Fri, 19 Mar 2021 12:20 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Mar 2021 12:20 AM IST
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Holi more mixure mawa health dangerous
झांसी। होली का पर्व नजदीक है। ऐसे में मिलावटखोर अभी से बड़े पैमाने पर मिलावटी मावा बाजार में खपाने की तैयारी में जुट गए हैं। सामान्य दिनों में रोज लगभग 15 क्विंटल बिक्री होती है। त्योहार के सीजन में इसकी मांग में काफी इजाफा हो जाता है। चूंकि, जिले में वैसे भी मांग के अनुसार दूध की आपूर्ति कम है। ऐसे में त्योहारी सीजन में मावा बनाने में पाउडर के दूध के साथ कई तरह की मिलावट की जाती है।
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बताया गया कि दूध से बनाए जाने वाले मावा में आलू या फिर सोख्ता कागज मिलाकर उसे जलाया जाता है। यही नहीं, मिलावटी मावा सूखे दूध यानी पाउडर से भी बनता है। पाउडर में रिफाइंड या डालडा मिलाकर तैयार करते हैं। फिर मिलावटी खोया बाजार में बेचने के लिए सप्लाई किया जाता है। दूसरी तरफ, शासन स्तर से भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान छेड़ा जाए। ऐसे में खाद्य विभाग योजना तैयार कर रहा है। जल्द ही मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
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दाम में 220 तक का अंतर
दूध से बनने वाला खोआ लगभग 250 रुपये किलो मिलता है, जबकि दूध के पाउडर समेत कई मिलावटी पदार्थ मिलाकर बनाया जाने वाला खोआ करीब 130 रुपये किलो बिकता है। सस्ते के चक्कर में लोग मिलावटी मावा खरीद भी लेते हैं।
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ऐसे करें नकली खोआ की पहचान
- मावा या खोया को अपने अंगूठे के नाखूनों पर रगड़ें। असली होने पर इसमें से घी की खुशबू आएगी।
- असली मावा खाने पर मुंह में नहीं चिपकता है, जबकि नकली मावा मुंह में चिपक जाता है।
- मावा की गोली बनाने पर अगर गोली फट जाती है तो वह नकली है।
- थोड़े से मावा को गर्म पानी में घोल लें, ठंडा होने के बाद आयोडीन साल्यूशन डालें। नकली होने पर मावा का रंग नीला हो जाएगा।
जल्द ही बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जाएगा। झांसी में मिलावटी खाद्य पदार्थ नहीं बिकने दिया जाएगा। कोई भी नकली खोआ बेचता मिला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वैन से भी लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वो वर्क वाली मिठाइयां आदि न खरीदें। - राजेंद्र सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य।

मिलावटी खोआ से बनी मिठाई खाने से लोगों की सेहत पर काफी बुरा असर पड़ सकता है। पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। संक्रमण की भी संभावना रहती है। इसके अलावा छोटे बच्चों की ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है। - डॉ. डीएस गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल।
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