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जेल में बंदियों की शुरू हुई एचआईवी जांच
ब्यूरो
Updated Mon, 29 Feb 2016 01:30 AM IST
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झांसी। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की एचआईवी जांच शुरू कर दी गई है। उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसायटी की टीम जेल में बंदियों के ब्लड सैंपल एकत्र करने में जुटी है। साथ ही बंदियों को एड्स के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
इन दिनों उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसायटी की टीम जिला कारागार में डेरा डाले है। यहां रोजाना बंदियों के ब्लड सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से बंदियों में एचआईवी की जांच की जाएगी। जांच का यह क्रम 16 मार्च तक जारी रहेगा। तदुपरांत, जिन मरीजों में एचआईवी पॉजिटिव प्राप्त होगा, उनके इलाज की विशेष व्यवस्था की जाएगी।
जिला कारागार के चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार भट्ट ने बताया कि जांच के साथ-साथ बंदियों को एड्स से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। जांच में बंदियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
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मालूम हो कि जिला कारागार में बंदियों की निर्धारित क्षमता 416 है, परंतु वर्तमान में यहां एक हजार से अधिक बंदी निरुद्ध हैं।
मिलाई को बनेगी कंप्यूटराइज्ड पर्ची
झांसी। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों से मिलाई के लिए आने वाले दिनों में कंप्यूटराइज्ड पर्ची बनाई जाएगी। इसके लिए तैयारियां जारी हैं। जेल परिसर में कक्ष का निर्माण कर लिया गया है। जल्द ही कंप्यूटर, फर्नीचर आदि खरीदे जाएंगे। पर्ची कंप्यूटराइज्ड बनाए जाने से बंदियों से मिलने आने वाले लोगों का रिकार्ड खोजना बेहद आसान हो जाएगा।
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इन दिनों उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण सोसायटी की टीम जिला कारागार में डेरा डाले है। यहां रोजाना बंदियों के ब्लड सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से बंदियों में एचआईवी की जांच की जाएगी। जांच का यह क्रम 16 मार्च तक जारी रहेगा। तदुपरांत, जिन मरीजों में एचआईवी पॉजिटिव प्राप्त होगा, उनके इलाज की विशेष व्यवस्था की जाएगी।
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जिला कारागार के चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार भट्ट ने बताया कि जांच के साथ-साथ बंदियों को एड्स से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। जांच में बंदियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।
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मालूम हो कि जिला कारागार में बंदियों की निर्धारित क्षमता 416 है, परंतु वर्तमान में यहां एक हजार से अधिक बंदी निरुद्ध हैं।
मिलाई को बनेगी कंप्यूटराइज्ड पर्ची
झांसी। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों से मिलाई के लिए आने वाले दिनों में कंप्यूटराइज्ड पर्ची बनाई जाएगी। इसके लिए तैयारियां जारी हैं। जेल परिसर में कक्ष का निर्माण कर लिया गया है। जल्द ही कंप्यूटर, फर्नीचर आदि खरीदे जाएंगे। पर्ची कंप्यूटराइज्ड बनाए जाने से बंदियों से मिलने आने वाले लोगों का रिकार्ड खोजना बेहद आसान हो जाएगा।